कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः Class 9 Notes and Answers

शारदा • कक्षा 9 • नवमः पाठः

कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः (A Good Deed Should Be Repaid — This Is the Eternal Dharma)

महाभारत की प्रसिद्ध बकासुर-वध कथा पर आधारित यह संस्कृत रूपक उपकार, प्रत्युपकार, साहस, क्षत्रिय-धर्म और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की भावना को रोचक संवादों के माध्यम से प्रस्तुत करता है।

एकचक्र नगर पाण्डवों का निवास ब्राह्मण परिवार बलिदान की बारी भीमसेन प्रत्युपकार का संकल्प बकासुर-वध नगर की रक्षा उपकार → प्रत्युपकार → साहस → धर्मरक्षा

परिचय

रामायण और महाभारत भारत के दो प्रसिद्ध इतिहास-ग्रन्थ हैं। महाभारत की कथाओं के आधार पर अनेक संस्कृत रचनाएँ लिखी गयी हैं। यह पाठ विद्वान् श्री एन. रङ्गनाथशर्मा द्वारा रचित “एकचक्रम्” नामक लघुरूपक से लिया गया है।

इस रूपक की मुख्य कथावस्तु बकासुर-वध है। पाठ का यह भाग रूपक के तृतीय और चतुर्थ अङ्क से लिया गया है।

Imp: इस पाठ का मुख्य विचार है — जिसने हमारा उपकार किया है, अवसर आने पर उसके उपकार का प्रत्युपकार करना हमारा कर्तव्य है।
English Explanation: The title teaches the principle of gratitude. If someone helps us in difficult times, we should remember that kindness and repay it when we get an opportunity. The lesson also shows that courage must be used for protecting innocent people.

पूर्वकथा — एकचक्र नगर में पाण्डव

1
पाण्डव एक ब्राह्मण के घर रहते हैं।

लाक्षागृह से बचने के बाद पाण्डव माता कुन्ती के साथ एकचक्र नगर में एक ब्राह्मण के घर निवास करते हैं।

2
नगर पर बकासुर का भय

नगर के निकट एक पर्वत पर बक नाम का शक्तिशाली राक्षस रहता है। नगरवासियों और बकासुर के बीच ऐसी व्यवस्था है कि प्रतिदिन भोजन से भरी गाड़ी के साथ एक मनुष्य भी उसके पास भेजा जाए।

3
ब्राह्मण परिवार की बारी

जिस दिन की कथा इस पाठ में है, उस दिन उसी ब्राह्मण परिवार की बारी आती है जिसके घर पाण्डव रह रहे हैं। परिवार में केवल एक पुत्र होने के कारण सब अत्यन्त दुःखी हैं।

4
कुन्ती की प्रतिज्ञा

ब्राह्मण परिवार की अवस्था देखकर कुन्ती कहती हैं कि वह अपने पुत्रों में से एक को बकासुर के पास भेजेंगी।

5
भीम का निर्णय

भीम इसे उस ब्राह्मण द्वारा किये गये उपकार का प्रत्युपकार मानते हैं और स्वयं बकासुर के पास जाने का निर्णय लेते हैं।

कथा और संवाद

1. कुन्ती और भीम की बातचीत

कुन्ती: मैंने पड़ोसी ब्राह्मण को एक वचन दिया है। एकचक्र नगर के निकट बक नाम का दैत्य रहता है।
भीम: मैंने उसके विषय में सुन रखा है। नगरवासी क्रम से उसके लिए बलि ले जाते हैं।

कुन्ती बताती हैं कि अगली सुबह उस ब्राह्मण की बारी है। केवल भोजन भेजना पर्याप्त नहीं है; भोजन के साथ एक मनुष्य भी भेजना होता है।

भीम: आपने निश्चय ही अपने पुत्रों में से किसी एक को भेजने का वचन दिया है।

कुन्ती मौन हो जाती हैं। भीम समझ जाते हैं कि यह दायित्व उन्हीं को पूरा करना है।

2. भीम का प्रत्युपकार-धर्म

भीम कहते हैं कि एक क्षत्रिय के लिए इसमें चिन्ता की कोई बात नहीं। जिस ब्राह्मण ने विपत्ति के समय पाण्डवों की सहायता की, उसका प्रत्युपकार किया जाना चाहिए।

भैक्षप्रदानेन चिरं परैरुपकृता वयम्।
कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः॥

भाव यह है कि पाण्डवों को नगरवासियों और ब्राह्मण परिवार से सहायता मिली थी। इसलिए अब सहायता लौटाने का अवसर आया है।

English Explanation: Bhima says that the Pandavas have been supported by others for a long time. Helping the Brahmin family now is not merely bravery; it is an act of gratitude and moral responsibility.
Imp: “कृतं प्रतिकृतं भूयात्” का सरल अर्थ है — उपकार का प्रत्युपकार होना चाहिए।

3. भोजन और युद्ध — दोनों का उत्साह

युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल और सहदेव वहाँ आते हैं। वे देखते हैं कि भीम बहुत प्रसन्न हैं।

भीम: कल प्रातः मेरे लिए बहुत भोजन उपलब्ध होगा।
अर्जुन: भोजनप्रिय व्यक्ति का प्रसन्न होना स्वाभाविक है।
भीम: केवल भोजन ही नहीं, युद्ध भी उपस्थित है।

यह सुनकर युधिष्ठिर जानना चाहते हैं कि युद्ध किससे होगा। भीम स्पष्ट करते हैं — बकासुर से।

4. युधिष्ठिर की चिन्ता

कुन्ती पूरी बात युधिष्ठिर को बताती हैं। युधिष्ठिर को यह उचित नहीं लगता क्योंकि वे जानते हैं कि भीम की शक्ति ही पाण्डवों का बड़ा सहारा है।

वे पूछते हैं कि जिस भीम की शक्ति का विचार करके दुर्योधन भी चैन से नहीं सोता, उसी भीम को राक्षस के पास भेजने का निर्णय कैसे किया गया?

भीम: धर्म को समझने वाले आप यहाँ धर्म का विचार कीजिए। माता की आज्ञा की अवज्ञा नहीं की जानी चाहिए।

5. अर्जुन की सहायता का प्रस्ताव

युधिष्ठिर बताते हैं कि बकासुर शक्तिशाली और नरभक्षी है। भीम निडर होकर कहते हैं कि वे उसे मार देंगे।

अर्जुन: मैं धनुर्धर हूँ। मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगा।
भीम: मेरी चिन्ता मत करो। जैसे सिंह को शिकार करते समय सहायक की आवश्यकता नहीं होती, वैसे ही मुझे भी सहायता की आवश्यकता नहीं है।
इमौ हि पीवरौ बाहू सहायौ सहजौ मम।
बकं विध्वंसयिष्यामि सिंहः क्षुद्रमृगं यथा॥
English Explanation: Bhima confidently points to his two powerful arms as his natural companions. He compares Baka to a small animal before a lion. The comparison highlights Bhima's courage and physical strength.

6. भीम और बकासुर आमने-सामने

सबकी अनुमति मिलने पर भीम भोजन से भरी गाड़ी लेकर बकासुर के पास पहुँचते हैं। परन्तु बकासुर के लिए रखा हुआ भोजन भीम स्वयं खाने लगते हैं।

बक: हे मनुष्यों में निकृष्ट! मेरा भोजन परोसो।
भीम: भोजन तो मेरे पेट की अग्नि को अर्पित हो चुका है। मैं तुम्हें मारने आया हूँ।

बक पूछता है कि उसने कौन-सा अधर्म किया है। भीम उत्तर देते हैं — नरभक्षणम्, अर्थात मनुष्यों को खाना।

बक: नरभक्षण तो मांसाहारी राक्षसों का धर्म है।
भीम: मनुष्यों की रक्षा करना भूमिपाल क्षत्रियों का धर्म है।
Imp: यहाँ “धर्म” का टकराव दिखाया गया है। बक अपनी हिंसा को अपना धर्म बताता है, जबकि भीम निर्दोष लोगों की रक्षा को क्षत्रिय का धर्म बताते हैं।

7. भीम अपनी पहचान बताते हैं

भीम बताते हैं कि वे हिडिम्ब का वध करने वाले, साधुजनों के रक्षक और शक्तिशाली क्षत्रिय हैं।

रक्षिता साधुलोकानां वरिष्ठो बाहुशालिनाम्।
निषूदको हिडिम्बस्य मृत्युश्चास्मि भवादृशाम्॥

बक समझ जाता है कि उसके सामने कुन्तीपुत्र भीमसेन खड़े हैं। दोनों एक-दूसरे को चुनौती देते हैं।

8. मल्लयुद्ध और बकासुर का अन्त

बक शस्त्र उठाने को कहता है, पर भीम कहते हैं कि उन्हें शस्त्र की आवश्यकता नहीं है। उनकी मुट्ठी ही बक के मस्तक की हड्डियाँ तोड़ने के लिए पर्याप्त है।

दोनों के बीच भयंकर मल्लयुद्ध होता है। अन्ततः भीम बकासुर का वध कर देते हैं और एकचक्र नगर को उसके भय से मुक्त करते हैं।

Imp: भीम की शक्ति केवल व्यक्तिगत वीरता के लिए नहीं, बल्कि निर्दोष लोगों की रक्षा के लिए प्रयुक्त होती है।

मुख्य पात्र और उनकी भूमिका

कुन्ती — करुणामयी, वचनपालक और धर्मबुद्धि से युक्त माता। ब्राह्मण परिवार की पीड़ा देखकर सहायता का वचन देती हैं।
भीमसेन — साहसी, शक्तिशाली, कृतज्ञ और क्षत्रिय-धर्म का पालन करने वाले। वे ब्राह्मण के उपकार का प्रत्युपकार करने के लिए स्वयं बकासुर से युद्ध करते हैं।
युधिष्ठिर — विचारशील और सावधान बड़े भाई। वे भीम की सुरक्षा को लेकर चिन्तित होते हैं और कुन्ती के निर्णय पर प्रश्न करते हैं।
अर्जुन — वीर और सहायक भाई। वे धनुष लेकर भीम के साथ चलने के लिए तैयार हो जाते हैं।
नकुल और सहदेव — भीम के प्रसन्न स्वभाव को देखकर हल्के हास्यपूर्ण संवाद करते हैं।
बकासुर — एकचक्र नगर को भयभीत करने वाला नरभक्षी राक्षस। अन्ततः भीम उसे युद्ध में मार देते हैं।
ब्राह्मण — वह गृहस्वामी जिसने पाण्डवों को आश्रय दिया था। उसी के परिवार की बकासुर को बलि देने की बारी आती है।

पाठ की मुख्य अवधारणाएँ

1. उपकार और प्रत्युपकार

दूसरों की सहायता को भूलना नहीं चाहिए। संकट के समय जिसने हमारी सहायता की हो, उसके प्रति कृतज्ञता दिखाना मानवीय कर्तव्य है।

2. क्षत्रिय-धर्म

भीम के अनुसार शक्तिशाली व्यक्ति का धर्म निर्बलों की रक्षा करना है। इसलिए वे बकासुर के अत्याचार को समाप्त करने को अपना कर्तव्य मानते हैं।

3. साहस और आत्मविश्वास

भीम अपने बल पर विश्वास रखते हैं, पर उनकी शक्ति केवल प्रदर्शन के लिए नहीं है। उसका उद्देश्य जनसुरक्षा है।

4. माता की आज्ञा

भीम माता की आज्ञा को सम्मान देते हैं और कहते हैं कि “मातुराज्ञा प्रत्यादेशं नार्हति” — माता की आज्ञा की अवज्ञा उचित नहीं है।

Imp पंक्तियाँ — सरल अर्थ सहित

कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः॥

अर्थ: किये गये उपकार का प्रत्युपकार होना चाहिए। यह सदा से मान्य धर्म है।

English: Kindness should be remembered and repaid. Gratitude is presented as an enduring moral duty.
नररक्षणं नाम भूमिपालानां क्षत्रियाणां धर्मः।

अर्थ: मनुष्यों की रक्षा करना राजाओं और क्षत्रियों का धर्म है।

English: Strength and authority carry responsibility. A warrior's duty is to protect people from injustice and violence.
इमौ हि पीवरौ बाहू सहायौ सहजौ मम।

अर्थ: भीम कहते हैं कि उनकी दो बलवान भुजाएँ ही उनके स्वाभाविक सहायक हैं।

रचनाकार — श्री एन. रङ्गनाथशर्मा

इस पाठ के मूल रूपक “एकचक्रम्” के रचनाकार महामहोपाध्याय एन. रङ्गनाथशर्मा थे। उनका जन्म 7 अप्रैल 1926 को कर्नाटक के शिवमोग्गा क्षेत्र के नडळल्ली ग्राम में हुआ।

वे संस्कृत व्याकरण, अलङ्कारशास्त्र और अद्वैत-वेदान्त के विद्वान थे। उन्होंने मौलिक ग्रन्थ, अनुवाद, व्याख्यान और अनेक लेख लिखे।

उनकी प्रसिद्ध संस्कृत रचनाओं में बाहुबलिविजयम्, एकचक्रम्, कुसुमाञ्जलिः और श्रीशङ्करचरितामृतम् आदि सम्मिलित हैं।

अभ्यास 1 — एकपदेन उत्तराणि

(क) भीमस्य जननी का?
कुन्ती।
(ख) कुन्त्या निश्चितं कः न समर्थयति?
युधिष्ठिरः।
(ग) पाण्डवानाम् उपकर्ता कः?
ब्राह्मणः।
(घ) कं चिन्तयन् दुर्योधनः निद्रां न लभते?
भीमम्।
(ङ) पाण्डवाः कुत्र निवसन्ति स्म?
एकचक्रनगरे।
(च) भरतवंशप्रदीपः कः?
भीमः।
(छ) कः भृशं परिदेवयते?
ब्राह्मणः।

अभ्यास 2 — पूर्णवाक्येन उत्तराणि

(क) “भैक्षप्रदानेन...” इति श्लोकानुसारं सनातनः धर्मः कः?
उपकृतस्य प्रत्युपकारः करणीयः इति सनातनः धर्मः।
(ख) बकनामा दैत्यः कुत्र वसति?
बकनामा दैत्यः एकचक्रनगरस्य अदूरवर्तिनि पर्वते वसति।
(ग) कुन्ती किं प्रतिश्रुतवती?
कुन्ती स्वपुत्रेषु एकं बकासुरस्य समीपं प्रेषयामीति प्रतिश्रुतवती।
(घ) भीमस्य अग्रजः कः?
भीमस्य अग्रजः युधिष्ठिरः अस्ति।
(ङ) का प्रत्यादेशं न अर्हति?
मातुः आज्ञा प्रत्यादेशं न अर्हति।
(च) पौराः बकासुराय कथं बलिम् आहरन्ति?
पौराः बकासुराय पर्यायक्रमेण बलिम् आहरन्ति।
(छ) क्षत्रियाणां धर्मः कः?
नररक्षणं क्षत्रियाणां धर्मः अस्ति।

अभ्यास 3 — केन / कया कं प्रति उक्तम्?

वाक्यम्केन / कयाकं / कां प्रति
न हि मातुराज्ञा प्रत्यादेशमर्हति।भीमेनयुधिष्ठिरम्
न हि खरदंष्ट्रो मृगाधिपः सहायमपेक्षते।भीमेनअर्जुनम्
क्षत्रियाण्या यदुचितं तदनुष्ठितम्।भीमेनकुन्तीम्
अपि हस्तद्वयेन भोक्ष्यसे?सहदेवेनभीमम्
तस्य भीमस्य प्रेषणं कथं न त्वया सङ्कल्पितम्?युधिष्ठिरेणकुन्तीम्
नरभक्षणं नाम मांसाशिनां राक्षसानां धर्मः।बकेनभीमम्

अभ्यास 4 — सन्धिविच्छेद और सन्धिनाम

पदम्सन्धिविच्छेदःसन्धिः
सम्यगनुष्ठितम्सम्यक् + अनुष्ठितम्जश्त्व-सन्धिः
पुरस्यादूरवर्तिनिपुरस्य + अदूरवर्तिनिसवर्णदीर्घ-सन्धिः
दुरात्मनो वृत्तम्दुरात्मनः + वृत्तम्विसर्ग-सन्धिः
मानुषोऽपिमानुषः + अपिविसर्ग-सन्धिः
नास्त्यत्रनास्ति + अत्रयण्-सन्धिः
यदुचितम्यत् + उचितम्जश्त्व-सन्धिः
खल्वेकपुत्रःखलु + एकपुत्रःयण्-सन्धिः
कथं नकथम् + नअनुस्वार-सन्धिः
धर्मसङ्ग्रहोऽत्रधर्मसङ्ग्रहः + अत्रविसर्ग-सन्धिः
राक्षस इतिराक्षसः + इतिविसर्ग-सन्धिः

अभ्यास 5 — पर्यायवाचि-पदानां मेलनम्

पदम्पर्यायवाची
आयोधनम्युद्धम्
विप्रःब्राह्मणः
असुरःदैत्यः
अम्बजननी
हुताशनःअग्निः

अभ्यास 6 — विपरीतार्थक शब्द

शब्दःविपरीतार्थकः
पीवरःकृशः
उपकृतःअपकृतः
अग्रजस्यअनुजस्य
उचितम्अनुचितम्
हर्षःशोकः

अभ्यास 7 — समुचित विशेषणपद

पदम्समुचित विशेषणम्पूर्ण पदसमूह
बाहूपीवरौपीवरौ बाहू
मृष्टान्नम्शकटपूर्णम्शकटपूर्णं मृष्टान्नम्
ब्राह्मणःप्रतिवेशीप्रतिवेशी ब्राह्मणः
मृगाधिपःखरदंष्ट्रःखरदंष्ट्रः मृगाधिपः
भीमःकौन्तेयःकौन्तेयः भीमः
कुन्तीक्षत्रियाणीक्षत्रियाणी कुन्ती
हुताशनःजठरस्थःजठरस्थः हुताशनः

अभ्यास 8 — समस्तपदानि लिखत

विग्रहःसमस्तपदम्
मृष्टम् अन्नम्मृष्टान्नम्
भुजयोः बलम्भुजबलम्
धर्माणां सङ्ग्रहःधर्मसङ्ग्रहः
मातुः आज्ञामातुराज्ञा
धनुः धरति इतिधनुर्धरः
मृगाणाम् अधिपःमृगाधिपः
पुरस्य न दूरे वर्ततेपुरस्यादूरवर्ती

अभ्यास 9 — वाक्य और उचित भाव

वाक्यम्भावः
धनुर्धरोऽहमनुगमिष्यामि।धैर्यम्
भीमस्य प्रेषणं कथं न त्वया सङ्कल्पितम्?ग्लानिः
अपि हस्तद्वयेन भोक्ष्यसे?हासः
हनिष्यामि तं दुरात्मानम्।ओजः
स खल्वेकपुत्रस्तपस्वी भृशं परिदेवयते।निराशा
मानुषापसद, परिवेषय मे भोजनम्।अधिकारः

अभ्यास 10 — वाच्यपरिवर्तनम्

नीचे कर्मवाच्य अथवा भावप्रधान प्रयोगों को कर्तृप्रधान रूप में बदला गया है।

दत्त वाक्यम्परिवर्तित रूपम्
भवत्या प्रतिश्रुतम्।भवती प्रतिश्रुतवती।
क्षत्रियाण्या अनुष्ठितम्।क्षत्रियाणी अनुष्ठितवती।
भवत्या सज्जीक्रियताम्।भवती सज्जीकरोतु।
भवत्या उपक्षिप्तम्।भवती उपक्षिप्तवती।
त्वया सङ्कल्पितम्।त्वं सङ्कल्पितवती।
भवता धर्मसङ्ग्रहः द्रष्टव्यः।भवान् धर्मसङ्ग्रहं पश्यतु।
पौरजनैः मानुषः प्रेषयितव्यः।पौरजनाः मानुषं प्रेषयन्तु।

परीक्षा के लिए Imp प्रश्न और उत्तर

1. इस पाठ का मूल स्रोत क्या है?
यह पाठ श्री एन. रङ्गनाथशर्मा द्वारा रचित “एकचक्रम्” नामक संस्कृत लघुरूपक के तृतीय और चतुर्थ अङ्क से लिया गया है। इसकी कथावस्तु महाभारत की बकासुर-वध कथा पर आधारित है।
2. ब्राह्मण परिवार क्यों दुःखी था?
उस दिन बकासुर को भोजन और एक मनुष्य भेजने की बारी उसी परिवार की थी। परिवार में केवल एक पुत्र होने के कारण सब अत्यन्त दुःखी थे।
3. कुन्ती ने ब्राह्मण परिवार की सहायता कैसे की?
कुन्ती ने वचन दिया कि वह अपने पुत्रों में से एक को ब्राह्मण परिवार की ओर से बकासुर के पास भेजेंगी।
4. भीम स्वयं बकासुर के पास क्यों गये?
भीम ने इसे ब्राह्मण द्वारा किये गये उपकार का प्रत्युपकार माना। साथ ही क्षत्रिय होने के कारण वे नगरवासियों की रक्षा करना अपना धर्म मानते थे।
5. युधिष्ठिर को कुन्ती का निर्णय क्यों उचित नहीं लगा?
युधिष्ठिर जानते थे कि भीम अत्यन्त शक्तिशाली हैं और उनकी शक्ति पाण्डवों की सुरक्षा का प्रमुख आधार है। इसलिए उन्हें भीम को बकासुर के पास भेजने में बड़ा खतरा दिखाई दिया।
6. भीम ने अर्जुन की सहायता क्यों अस्वीकार की?
भीम को अपनी शक्ति पर पूरा विश्वास था। उन्होंने कहा कि जैसे सिंह को छोटे पशु से लड़ने के लिए सहायक की आवश्यकता नहीं होती, वैसे ही उन्हें भी बकासुर से युद्ध के लिए सहायता की आवश्यकता नहीं है।
7. बक और भीम के धर्म-विचार में क्या अन्तर था?
बक नरभक्षण को राक्षसों का धर्म बताता है, जबकि भीम निर्दोष मनुष्यों की रक्षा को क्षत्रियों का धर्म बताते हैं।
8. भीम ने बकासुर का वध कैसे किया?
भीम और बकासुर के बीच मल्लयुद्ध हुआ। अपनी असाधारण शारीरिक शक्ति से भीम ने बकासुर को पराजित कर उसका वध किया।
9. पाठ के शीर्षक का अर्थ क्या है?
“कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः” का अर्थ है — किये गये उपकार का प्रत्युपकार होना चाहिए; यही सनातन धर्म है।
10. भीम के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
भीम साहसी, कृतज्ञ, आत्मविश्वासी, मातृभक्त, शक्तिशाली तथा निर्बलों की रक्षा करने वाले क्षत्रिय के रूप में प्रस्तुत होते हैं।