वाच्यम् (Voice in Sanskrit Grammar)
संस्कृत वाक्य में कभी कर्ता, कभी कर्म और कभी केवल क्रिया का भाव प्रमुख होता है। इसी आधार पर प्रयोग तीन प्रकार के होते हैं— कर्तरि प्रयोग, कर्मणि प्रयोग और भावे प्रयोग।
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Toggleपरिचय — वाच्यम् क्या है?
संस्कृत में किसी क्रिया को प्रस्तुत करने के तीन मुख्य तरीके हैं। इन तीनों को सामान्यतः प्रयोगः कहा जाता है।
एक सरल Concept Story
स्थिति 1 — करने वाला मुख्य है
मान लीजिए एक बालक पुस्तक पढ़ रहा है। यदि हमारा ध्यान बालक पर है, तो हम कहते हैं—
यहाँ “बालकः” कार्य करने वाला है और वही वाक्य का मुख्य केन्द्र है। यह कर्तृवाच्य है।
स्थिति 2 — पुस्तक मुख्य है
अब उसी घटना में यदि हमारा ध्यान इस बात पर हो कि पुस्तक पढ़ी जा रही है, तो वाक्य की रचना बदल जाती है।
यहाँ “बालकेन” तृतीया विभक्ति में है और कर्म प्रधान है। यह कर्मवाच्य है।
स्थिति 3 — केवल कार्य का भाव मुख्य है
अब कल्पना करें कि कुछ बच्चे हँस रहे हैं। “हस्” अकर्मक धातु है; इसका कोई कर्म नहीं होता। इसलिए इसका कर्मवाच्य नहीं बनता।
यहाँ मुख्य विचार है — हँसने की क्रिया हो रही है। यह भाववाच्य है।
1. कर्तरि प्रयोगः / कर्तृवाच्यम्
कर्तरि प्रयोग में कर्ता प्रधान होता है।
मुख्य नियम
- कर्ता प्रथमा विभक्ति में होता है।
- कर्म द्वितीया विभक्ति में होता है।
- क्रियापद कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार होता है।
- कर्म का वचन बदलने पर क्रियापद बदलना आवश्यक नहीं है।
| कर्ता | कर्म | क्रिया |
|---|---|---|
| बालः | फलम् | खादति |
| बालौ | फलम् | खादतः |
| बालाः | फलम् | खादन्ति |
कर्तृवाच्य में पुरुष-व्यवस्था
मध्यमपुरुषः
यदि कर्ता त्वम्, युवाम्, यूयम् हो, तो क्रिया मध्यमपुरुष में होती है।
| वचनम् | कर्ता | उदाहरण |
|---|---|---|
| एकवचनम् | त्वम् | त्वं पाठं पठसि। |
| द्विवचनम् | युवाम् | युवां पाठं पठथः। |
| बहुवचनम् | यूयम् | यूयं पाठं पठथ। |
उत्तमपुरुषः
यदि कर्ता अहम्, आवाम्, वयम् हो, तो क्रिया उत्तमपुरुष में होती है।
| वचनम् | कर्ता | उदाहरण |
|---|---|---|
| एकवचनम् | अहम् | अहं पाठं पठामि। |
| द्विवचनम् | आवाम् | आवां पाठं पठावः। |
| बहुवचनम् | वयम् | वयं पाठं पठामः। |
प्रथमपुरुषः
यदि कर्ता उपर्युक्त मध्यम और उत्तमपुरुष के सर्वनामों से भिन्न हो, तो सामान्यतः प्रथमपुरुष का प्रयोग होता है।
सः पठति।
तौ पठतः।
ते पठन्ति।
2. कर्मणि प्रयोगः / कर्मवाच्यम्
कर्मणि प्रयोग में कर्म प्रधान होता है।
मुख्य नियम
- कर्ता तृतीया विभक्ति में आता है।
- कर्म प्रथमा विभक्ति में आता है।
- क्रियापद कर्म के वचन के अनुसार होता है।
- कर्ता का वचन क्रियापद को नियंत्रित नहीं करता।
- धातु में सामान्यतः यक् (य) प्रत्यय जोड़ा जाता है।
- क्रियापद आत्मनेपदी रूप ग्रहण करता है।
कर्मवाच्य में ‘यक्’ प्रत्यय
वर्तमानकाल के कर्मणि प्रयोग में धातु के साथ सामान्यतः यक् — “य” प्रत्यय का प्रयोग होता है।
| निर्माण | रूप |
|---|---|
| गम् + य + ते | गम्यते |
| पठ् + य + ते | पठ्यते |
| लिख् + य + ते | लिख्यते |
महत्वपूर्ण कर्तरि → कर्मणि क्रियारूप
| कर्तरि | कर्मणि | कर्तरि | कर्मणि |
|---|---|---|---|
| पठति | पठ्यते | पिबति | पीयते |
| लिखति | लिख्यते | ददाति | दीयते |
| खादति | खाद्यते | नयति | नीयते |
| गच्छति | गम्यते | करोति | क्रियते |
| त्यजति | त्यज्यते | शृणोति | श्रूयते |
| पृच्छति | पृच्छ्यते | गायति | गीयते |
| जानाति | ज्ञायते | आरोहति | आरुह्यते |
| स्मरति | स्मर्यते | पश्यति | दृश्यते |
| वदति | उद्यते / उच्यते | परीक्षते | परीक्ष्यते |
| क्षिपति | क्षिप्यते | सेवते | सेव्यते |
| प्राप्नोति | प्राप्यते | वन्दते | वन्द्यते |
| प्रणमति | प्रणम्यते | क्रीडति | क्रीड्यते |
| प्रक्षालयति | प्रक्षाल्यते | गणयति | गण्यते |
| चिन्तयति | चिन्त्यते | रचयति | रच्यते |
| पालयति | पाल्यते | ताडयति | ताड्यते |
| सूचयति | सूच्यते | कथयति | कथ्यते |
| पूजयति | पूज्यते | पाठयति | पाठ्यते |
| बोधयति | बोध्यते | — | — |
कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य कैसे बनाएँ?
कर्तृवाच्य में वह प्रथमा विभक्ति में होगा।
जैसे—रामः → रामेण, बालिका → बालिकया, छात्राः → छात्रैः।
जैसे—पुस्तकम् → पुस्तकम्, कविताम् → कविता, वृक्षान् → वृक्षाः।
पठति → पठ्यते, लिखति → लिख्यते, पश्यति → दृश्यते।
एकवचन कर्म → एकवचन क्रिया, द्विवचन कर्म → द्विवचन क्रिया, बहुवचन कर्म → बहुवचन क्रिया।
सरल अभ्यास उदाहरण
| कर्तृवाच्यम् | कर्मवाच्यम् | परिवर्तन समझें |
|---|---|---|
| मोहनः पत्रं लिखति। | मोहेन पत्रं लिख्यते। | मोहनः → मोहेन; पत्रम् प्रथमा में भी नपुंसकलिङ्ग एकवचन; लिखति → लिख्यते |
| बालिका कथा पठति। | बालिकया कथा पठ्यते। | बालिका → बालिकया; कथाम् के स्थान पर कथा; पठति → पठ्यते |
| छात्राः वृक्षान् पश्यन्ति। | छात्रैः वृक्षाः दृश्यन्ते। | छात्राः → छात्रैः; वृक्षान् → वृक्षाः; पश्यन्ति → दृश्यन्ते |
वाच्य और काल
कर्तरि और कर्मणि प्रयोग के मूल नियम केवल वर्तमानकाल में ही नहीं, अन्य कालों में भी लागू होते हैं।
परिवर्तन करते समय क्रियारूप उस काल के अनुसार बदलता है, परन्तु कर्ता-कर्म की विभक्ति और प्रधानता के मूल नियम समान रहते हैं।
भूतकाल में कर्तृवाच्य और कर्मवाच्य
पाठ में भूतकाल के कृदन्त प्रयोग में—
| कर्तृवाच्यम् | कर्मवाच्यम् | विशेष ध्यान |
|---|---|---|
| बालकः पाठं पठितवान्। | बालकेन पाठः पठितः। | पाठः पुल्लिङ्ग एकवचन → पठितः |
| बालिका कविता लिखितवती। | बालिकया कविता लिखिता। | कविता स्त्रीलिङ्ग एकवचन → लिखिता |
| बालकः फलानि खादितवान्। | बालकेन फलानि खादितानि। | फलानि नपुंसकलिङ्ग बहुवचन → खादितानि |
विधिलिङ् तथा तव्यत् / अनीयर्
कर्तरि प्रयोग में विधिलिङ् का प्रयोग इच्छा, कर्तव्य, सम्भावना आदि अर्थों में हो सकता है। कर्मणि प्रयोग में उसी भाव को व्यक्त करने के लिए तव्यत् और अनीयर् प्रत्ययों का प्रयोग किया जा सकता है।
| कर्तृवाच्यम् | कर्मवाच्यम् | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| बालकः पाठं पठेत्। | बालकेन पाठः पठितव्यः / पठनीयः। | बालक को पाठ पढ़ना चाहिए। |
| बालिका कथां लिखेत्। | बालिकया कथा लिखितव्या / लेखनीया। | बालिका द्वारा कथा लिखी जानी चाहिए। |
| छात्राः वृक्षान् पश्येयुः। | छात्रैः वृक्षाः द्रष्टव्याः / दर्शनीयाः। | छात्रों द्वारा वृक्ष देखे जाने चाहिए। |
3. भावे प्रयोगः / भाववाच्यम्
जहाँ किसी अकर्मक क्रिया में कर्ता की अपेक्षा क्रिया या भाव को प्रधान बनाया जाता है, वहाँ भावे प्रयोग होता है।
भाववाच्य केवल उन धातुओं से सम्बन्धित है जिनके साथ कर्म का प्रयोग नहीं होता। ऐसी धातुओं को अकर्मकधातवः कहा जाता है।
भाववाच्य के मुख्य नियम
- भाववाच्य सामान्यतः अकर्मक धातु से बनता है।
- कर्ता तृतीया विभक्ति में होता है।
- कर्म नहीं होता।
- क्रियापद का रूप कर्मणि प्रयोग के समान बनता है।
- क्रियापद सदा प्रथमपुरुष एकवचन में रहता है।
वर्तमानकाल में भाववाच्य
| कर्तृवाच्यम् | भाववाच्यम् | समझें |
|---|---|---|
| ते हसन्ति। | तैः हस्यते। | वे हँसते हैं → उनके द्वारा हँसा जाता है। |
| बालाः उद्याने क्रीडन्ति। | बालैः उद्याने क्रीड्यते। | क्रीडा की क्रिया प्रधान है। |
| फलानि भूमौ पतन्ति। | फलैः भूमौ पत्यते। | “पत्” अकर्मक है। |
| सा उत्तिष्ठति। | तया उत्थीयते। | उठने की क्रिया प्रधान है। |
| वृद्धः आसने उपविशति। | वृद्धेन आसने उपविश्यते। | बैठने की क्रिया प्रधान है। |
| नर्तकाः नृत्यन्ति। | नर्तकैः नृत्यते। | नृत्य की क्रिया पर बल। |
| बालिकाः प्रयतन्ते। | बालिकाभिः प्रयत्यते। | प्रयत्न करने का भाव प्रधान। |
| शुनकः धावति। | शुनकेन धाव्यते। | धाव् अकर्मक धातु है। |
| वृक्षः वर्धते। | वृक्षेण वर्ध्यते। | वृद्धि का भाव प्रधान। |
| शिशुः शेते। | शिशुना शय्यते। | सोने का भाव प्रधान। |
| रुग्णः कासते। | रुग्णेन कास्यते। | खाँसने की क्रिया प्रधान। |
अध्ययन के लिए कुछ अकर्मक धातुएँ
इन क्रियाओं में सामान्यतः कर्म की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए इनके भाववाच्य रूप बनाये जा सकते हैं।
भूतकाल में भाववाच्य
भूतकाल के भाववाच्य में क्त-प्रत्ययान्त रूप सामान्यतः नपुंसकलिङ्ग, प्रथमाविभक्ति, एकवचन में रहता है।
| कर्तृवाच्यम् | भाववाच्यम् |
|---|---|
| ते हसितवन्तः। | तैः हसितम्। |
| बालाः उद्याने क्रीडितवन्तः। | बालैः उद्याने क्रीडितम्। |
| फलानि भूमौ पतितवन्ति। | फलैः भूमौ पतितम्। |
| वाहनानि मार्गे स्थितवन्ति। | वाहनैः मार्गे स्थितम्। |
| सा उत्थितवती। | तया उत्थितम्। |
| शिशुः शयितवान्। | शिशुना शयितम्। |
भाववाच्य में तव्यत् / अनीयर्
अकर्मक धातुओं के भाववाच्य में तव्यत् तथा अनीयर् प्रत्ययान्त रूप नपुंसकलिङ्ग एकवचन में प्रयुक्त होते हैं।
| कर्तृवाच्यम् | भाववाच्यम् | अर्थ |
|---|---|---|
| नर्तकाः नृत्येयुः। | नर्तकैः नर्तितव्यम् / नर्तनीयम्। | नर्तकों द्वारा नृत्य किया जाना चाहिए। |
| बालिकाः प्रयतेयुः। | बालिकाभिः प्रयतितव्यम् / प्रयतनीयम्। | बालिकाओं द्वारा प्रयत्न किया जाना चाहिए। |
| शुनकः धावेत्। | शुनकेन धावितव्यम् / धावनीयम्। | कुत्ते द्वारा दौड़ा जाना चाहिए। |
| वृक्षः वर्धेत। | वृक्षेण वर्धितव्यम् / वर्धनीयम्। | वृद्धि का भाव व्यक्त होता है। |
| वृद्धः उपविशेत्। | वृद्धेन उपवेष्टव्यम् / उपवेशनीयम्। | वृद्ध द्वारा बैठा जाना चाहिए। |
| रुग्णः कासेत्। | रुग्णेन कासितव्यम् / कासनीयम्। | रोगी द्वारा खाँसा जाना। |
कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य में अन्तर
| आधार | कर्तृवाच्यम् | कर्मवाच्यम् | भाववाच्यम् |
|---|---|---|---|
| प्रधानता | कर्ता | कर्म | क्रिया / भाव |
| कर्ता की विभक्ति | प्रथमा | तृतीया | तृतीया |
| कर्म | द्वितीया | प्रथमा | नहीं होता |
| क्रिया किसके अनुसार? | कर्ता | कर्म | सदा प्रथमपुरुष एकवचन |
| धातु | सकर्मक / अकर्मक | सकर्मक | अकर्मक |
| उदाहरण | बालः पाठं पठति। | बालकेन पाठः पठ्यते। | बालैः हस्यते। |
वाच्य पहचानने का आसान तरीका
Questions and Detailed Answers
इस परिशिष्ट में पृथक् क्रमांकित अभ्यास-प्रश्न नहीं दिये गये हैं। अतः नीचे पाठ के सभी नियमों और रूपान्तरणों को समेटते हुए विस्तृत अभ्यास-प्रश्नोत्तर दिये गये हैं।
Imp for Exams
कर्ता — प्रथमा, कर्म — द्वितीया, क्रिया — कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार।
कर्ता — तृतीया, कर्म — प्रथमा, क्रिया — कर्म के अनुसार।
अकर्मक धातु, कर्ता — तृतीया, कर्म नहीं, क्रिया — प्रथमपुरुष एकवचन।
कर्तृवाच्य में क्तवतु; कर्मवाच्य में क्त; भाववाच्य में क्त-रूप नपुंसकलिङ्ग एकवचन।
कर्मवाच्य में कर्म के लिङ्ग-वचन के अनुसार; भाववाच्य में नपुंसकलिङ्ग एकवचन।
Important Concepts — English Explanation
Active Voice
The subject is the main grammatical centre. The verb agrees with the subject in person and number.
Passive Voice
The object becomes grammatically prominent. The original subject changes to the instrumental case, and the verb agrees with the object.
Impersonal / Bhava Voice
This is used with intransitive verbs. Since there is no object to promote, the action itself becomes prominent. The verb remains third-person singular.
Most Important Difference
Do not confuse passive and bhava voice. Passive voice requires a transitive verb and an object; bhava voice is built from an intransitive verb and has no object.
