वाच्यम् Class 9 Notes and Answers

शारदा • कक्षा 9 • परिशिष्टम् 3

वाच्यम् (Voice in Sanskrit Grammar)

संस्कृत वाक्य में कभी कर्ता, कभी कर्म और कभी केवल क्रिया का भाव प्रमुख होता है। इसी आधार पर प्रयोग तीन प्रकार के होते हैं— कर्तरि प्रयोग, कर्मणि प्रयोग और भावे प्रयोग।

Table of Contents

वाच्यम् प्रयोगः कर्तृवाच्यम् कर्ता प्रधान क्रिया कर्ता के अनुसार कर्मवाच्यम् कर्म प्रधान क्रिया कर्म के अनुसार भाववाच्यम् भाव / क्रिया प्रधान अकर्मक धातुओं में

परिचय — वाच्यम् क्या है?

संस्कृत में किसी क्रिया को प्रस्तुत करने के तीन मुख्य तरीके हैं। इन तीनों को सामान्यतः प्रयोगः कहा जाता है।

कर्तरि प्रयोगः → कर्तृवाच्यम्    |    कर्मणि प्रयोगः → कर्मवाच्यम्    |    भावे प्रयोगः → भाववाच्यम्
English Explanation: Sanskrit voice tells us what the sentence mainly focuses on. Active voice focuses on the doer, passive voice focuses on the object, while impersonal voice focuses mainly on the occurrence of the action.
Imp for Exams: वाच्य परिवर्तन करते समय सबसे पहले यह पहचानें कि धातु सकर्मक है या अकर्मक। सकर्मक धातुओं में कर्मवाच्य सम्भव है, जबकि अकर्मक धातुओं में सामान्यतः भाववाच्य होता है।

एक सरल Concept Story

स्थिति 1 — करने वाला मुख्य है

मान लीजिए एक बालक पुस्तक पढ़ रहा है। यदि हमारा ध्यान बालक पर है, तो हम कहते हैं—

बालकः पुस्तकं पठति।

यहाँ “बालकः” कार्य करने वाला है और वही वाक्य का मुख्य केन्द्र है। यह कर्तृवाच्य है।

स्थिति 2 — पुस्तक मुख्य है

अब उसी घटना में यदि हमारा ध्यान इस बात पर हो कि पुस्तक पढ़ी जा रही है, तो वाक्य की रचना बदल जाती है।

बालकेन पुस्तकं पठ्यते।

यहाँ “बालकेन” तृतीया विभक्ति में है और कर्म प्रधान है। यह कर्मवाच्य है।

स्थिति 3 — केवल कार्य का भाव मुख्य है

अब कल्पना करें कि कुछ बच्चे हँस रहे हैं। “हस्” अकर्मक धातु है; इसका कोई कर्म नहीं होता। इसलिए इसका कर्मवाच्य नहीं बनता।

बालकाः हसन्ति। → बालकैः हस्यते।

यहाँ मुख्य विचार है — हँसने की क्रिया हो रही है। यह भाववाच्य है।

1. कर्तरि प्रयोगः / कर्तृवाच्यम्

कर्तरि प्रयोग में कर्ता प्रधान होता है।

मुख्य नियम

  • कर्ता प्रथमा विभक्ति में होता है।
  • कर्म द्वितीया विभक्ति में होता है।
  • क्रियापद कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार होता है।
  • कर्म का वचन बदलने पर क्रियापद बदलना आवश्यक नहीं है।
कर्ता — प्रथमा → कर्म — द्वितीया → क्रिया — कर्ता के अनुसार
English Explanation: In active voice the verb agrees with the subject. Changing the number of the object does not by itself change the verb.
कर्ताकर्मक्रिया
बालःफलम्खादति
बालौफलम्खादतः
बालाःफलम्खादन्ति

कर्तृवाच्य में पुरुष-व्यवस्था

मध्यमपुरुषः

यदि कर्ता त्वम्, युवाम्, यूयम् हो, तो क्रिया मध्यमपुरुष में होती है।

वचनम्कर्ताउदाहरण
एकवचनम्त्वम्त्वं पाठं पठसि।
द्विवचनम्युवाम्युवां पाठं पठथः।
बहुवचनम्यूयम्यूयं पाठं पठथ।

उत्तमपुरुषः

यदि कर्ता अहम्, आवाम्, वयम् हो, तो क्रिया उत्तमपुरुष में होती है।

वचनम्कर्ताउदाहरण
एकवचनम्अहम्अहं पाठं पठामि।
द्विवचनम्आवाम्आवां पाठं पठावः।
बहुवचनम्वयम्वयं पाठं पठामः।

प्रथमपुरुषः

यदि कर्ता उपर्युक्त मध्यम और उत्तमपुरुष के सर्वनामों से भिन्न हो, तो सामान्यतः प्रथमपुरुष का प्रयोग होता है।

उदाहरण:
सः पठति।
तौ पठतः।
ते पठन्ति।
Imp for Exams: संस्कृत में हिन्दी के विपरीत “प्रथमपुरुष” का अर्थ he/she/they type subject है, जबकि “अहम्” उत्तमपुरुष और “त्वम्” मध्यमपुरुष है।

2. कर्मणि प्रयोगः / कर्मवाच्यम्

कर्मणि प्रयोग में कर्म प्रधान होता है।

मुख्य नियम

  • कर्ता तृतीया विभक्ति में आता है।
  • कर्म प्रथमा विभक्ति में आता है।
  • क्रियापद कर्म के वचन के अनुसार होता है।
  • कर्ता का वचन क्रियापद को नियंत्रित नहीं करता।
  • धातु में सामान्यतः यक् (य) प्रत्यय जोड़ा जाता है।
  • क्रियापद आत्मनेपदी रूप ग्रहण करता है।
कर्ता — तृतीया → कर्म — प्रथमा → क्रिया — कर्म के अनुसार
English Explanation: In passive voice, the object becomes grammatically prominent. The original subject is expressed in the instrumental case, while the verb agrees with the promoted object.

कर्मवाच्य में ‘यक्’ प्रत्यय

वर्तमानकाल के कर्मणि प्रयोग में धातु के साथ सामान्यतः यक् — “य” प्रत्यय का प्रयोग होता है।

धातुः + यक् + आत्मनेपद-प्रत्यय → कर्मवाच्य-क्रिया
निर्माणरूप
गम् + य + तेगम्यते
पठ् + य + तेपठ्यते
लिख् + य + तेलिख्यते
Imp for Exams: वर्तमानकाल में कर्तृवाच्य का “ति” अन्त प्रायः कर्मवाच्य में “ते” प्रकार का आत्मनेपदी रूप ग्रहण करता है, परन्तु केवल “ति → ते” बदलना पर्याप्त नियम नहीं है; धातु का कर्मणि-रूप भी सही बनना चाहिए।

महत्वपूर्ण कर्तरि → कर्मणि क्रियारूप

कर्तरिकर्मणिकर्तरिकर्मणि
पठतिपठ्यतेपिबतिपीयते
लिखतिलिख्यतेददातिदीयते
खादतिखाद्यतेनयतिनीयते
गच्छतिगम्यतेकरोतिक्रियते
त्यजतित्यज्यतेशृणोतिश्रूयते
पृच्छतिपृच्छ्यतेगायतिगीयते
जानातिज्ञायतेआरोहतिआरुह्यते
स्मरतिस्मर्यतेपश्यतिदृश्यते
वदतिउद्यते / उच्यतेपरीक्षतेपरीक्ष्यते
क्षिपतिक्षिप्यतेसेवतेसेव्यते
प्राप्नोतिप्राप्यतेवन्दतेवन्द्यते
प्रणमतिप्रणम्यतेक्रीडतिक्रीड्यते
प्रक्षालयतिप्रक्षाल्यतेगणयतिगण्यते
चिन्तयतिचिन्त्यतेरचयतिरच्यते
पालयतिपाल्यतेताडयतिताड्यते
सूचयतिसूच्यतेकथयतिकथ्यते
पूजयतिपूज्यतेपाठयतिपाठ्यते
बोधयतिबोध्यते——

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य कैसे बनाएँ?

1
कर्ता पहचानें

कर्तृवाच्य में वह प्रथमा विभक्ति में होगा।

2
कर्ता को तृतीया विभक्ति में बदलें

जैसे—रामः → रामेण, बालिका → बालिकया, छात्राः → छात्रैः।

3
कर्म को प्रथमा विभक्ति में बदलें

जैसे—पुस्तकम् → पुस्तकम्, कविताम् → कविता, वृक्षान् → वृक्षाः।

4
क्रिया को कर्मणि रूप में बदलें

पठति → पठ्यते, लिखति → लिख्यते, पश्यति → दृश्यते।

5
क्रिया का वचन कर्म के अनुसार करें

एकवचन कर्म → एकवचन क्रिया, द्विवचन कर्म → द्विवचन क्रिया, बहुवचन कर्म → बहुवचन क्रिया।

सरल अभ्यास उदाहरण

कर्तृवाच्यम्कर्मवाच्यम्परिवर्तन समझें
मोहनः पत्रं लिखति।मोहेन पत्रं लिख्यते। मोहनः → मोहेन; पत्रम् प्रथमा में भी नपुंसकलिङ्ग एकवचन; लिखति → लिख्यते
बालिका कथा पठति।बालिकया कथा पठ्यते। बालिका → बालिकया; कथाम् के स्थान पर कथा; पठति → पठ्यते
छात्राः वृक्षान् पश्यन्ति।छात्रैः वृक्षाः दृश्यन्ते। छात्राः → छात्रैः; वृक्षान् → वृक्षाः; पश्यन्ति → दृश्यन्ते

वाच्य और काल

कर्तरि और कर्मणि प्रयोग के मूल नियम केवल वर्तमानकाल में ही नहीं, अन्य कालों में भी लागू होते हैं।

परिवर्तन करते समय क्रियारूप उस काल के अनुसार बदलता है, परन्तु कर्ता-कर्म की विभक्ति और प्रधानता के मूल नियम समान रहते हैं।

Imp for Exams: केवल वर्तमानकाल का “पठति → पठ्यते” नियम याद न करें। भूतकाल तथा विधिलिङ् में भी यह देखना आवश्यक है कि वाक्य कर्तृप्रधान है या कर्मप्रधान।

भूतकाल में कर्तृवाच्य और कर्मवाच्य

पाठ में भूतकाल के कृदन्त प्रयोग में—

कर्तृवाच्य → क्तवतु-प्रत्यय    |    कर्मवाच्य → क्त-प्रत्यय
कर्तृवाच्य: पठितवान् / लिखितवती / खादितवन्तः आदि
कर्मवाच्य: पठितः / लिखिता / खादितानि आदि
English Explanation: In past participial usage, active voice commonly uses the क्तवतु form, while passive voice uses the क्त form. In passive voice the participle agrees in gender and number with the object.
कर्तृवाच्यम्कर्मवाच्यम्विशेष ध्यान
बालकः पाठं पठितवान्।बालकेन पाठः पठितः।पाठः पुल्लिङ्ग एकवचन → पठितः
बालिका कविता लिखितवती।बालिकया कविता लिखिता।कविता स्त्रीलिङ्ग एकवचन → लिखिता
बालकः फलानि खादितवान्।बालकेन फलानि खादितानि।फलानि नपुंसकलिङ्ग बहुवचन → खादितानि
Imp for Exams: भूतकालीन कर्मवाच्य में क्त-प्रत्ययान्त शब्द का लिङ्ग और वचन कर्म के अनुसार होना चाहिए।

विधिलिङ् तथा तव्यत् / अनीयर्

कर्तरि प्रयोग में विधिलिङ् का प्रयोग इच्छा, कर्तव्य, सम्भावना आदि अर्थों में हो सकता है। कर्मणि प्रयोग में उसी भाव को व्यक्त करने के लिए तव्यत् और अनीयर् प्रत्ययों का प्रयोग किया जा सकता है।

कर्तरि — विधिलिङ् → कर्मणि — तव्यत् / अनीयर्
कर्तृवाच्यम्कर्मवाच्यम्सरल अर्थ
बालकः पाठं पठेत्।बालकेन पाठः पठितव्यः / पठनीयः।बालक को पाठ पढ़ना चाहिए।
बालिका कथां लिखेत्।बालिकया कथा लिखितव्या / लेखनीया।बालिका द्वारा कथा लिखी जानी चाहिए।
छात्राः वृक्षान् पश्येयुः।छात्रैः वृक्षाः द्रष्टव्याः / दर्शनीयाः।छात्रों द्वारा वृक्ष देखे जाने चाहिए।
Imp for Exams: तव्यत् और अनीयर् प्रत्ययान्त शब्द भी कर्म के लिङ्ग और वचन के अनुसार बदलते हैं।

3. भावे प्रयोगः / भाववाच्यम्

जहाँ किसी अकर्मक क्रिया में कर्ता की अपेक्षा क्रिया या भाव को प्रधान बनाया जाता है, वहाँ भावे प्रयोग होता है।

भाववाच्य केवल उन धातुओं से सम्बन्धित है जिनके साथ कर्म का प्रयोग नहीं होता। ऐसी धातुओं को अकर्मकधातवः कहा जाता है।

अकर्मक धातुः → कर्म नहीं → भाववाच्यम्
English Explanation: Bhava voice is an impersonal construction. Because an intransitive verb has no object, there is no object that can be promoted to the subject position. The sentence therefore emphasizes the occurrence of the action itself.

भाववाच्य के मुख्य नियम

  • भाववाच्य सामान्यतः अकर्मक धातु से बनता है।
  • कर्ता तृतीया विभक्ति में होता है।
  • कर्म नहीं होता।
  • क्रियापद का रूप कर्मणि प्रयोग के समान बनता है।
  • क्रियापद सदा प्रथमपुरुष एकवचन में रहता है।
ते हसन्ति → तैः हस्यते
Imp for Exams: भाववाच्य में कर्ता बहुवचन हो सकता है, लेकिन क्रिया फिर भी प्रथमपुरुष एकवचन में रहती है।

वर्तमानकाल में भाववाच्य

कर्तृवाच्यम्भाववाच्यम्समझें
ते हसन्ति।तैः हस्यते।वे हँसते हैं → उनके द्वारा हँसा जाता है।
बालाः उद्याने क्रीडन्ति।बालैः उद्याने क्रीड्यते।क्रीडा की क्रिया प्रधान है।
फलानि भूमौ पतन्ति।फलैः भूमौ पत्यते।“पत्” अकर्मक है।
सा उत्तिष्ठति।तया उत्थीयते।उठने की क्रिया प्रधान है।
वृद्धः आसने उपविशति।वृद्धेन आसने उपविश्यते।बैठने की क्रिया प्रधान है।
नर्तकाः नृत्यन्ति।नर्तकैः नृत्यते।नृत्य की क्रिया पर बल।
बालिकाः प्रयतन्ते।बालिकाभिः प्रयत्यते।प्रयत्न करने का भाव प्रधान।
शुनकः धावति।शुनकेन धाव्यते।धाव् अकर्मक धातु है।
वृक्षः वर्धते।वृक्षेण वर्ध्यते।वृद्धि का भाव प्रधान।
शिशुः शेते।शिशुना शय्यते।सोने का भाव प्रधान।
रुग्णः कासते।रुग्णेन कास्यते।खाँसने की क्रिया प्रधान।

अध्ययन के लिए कुछ अकर्मक धातुएँ

इन क्रियाओं में सामान्यतः कर्म की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए इनके भाववाच्य रूप बनाये जा सकते हैं।

क्रीडति भषति स्फुरति रोदिति भवति शोभते मोदते वर्तते कम्पते स्पर्धते विकसति उपविशति विश्वसिति नश्यति गर्जति लज्जते प्लवते स्पन्दते वर्धते त्वरते

भूतकाल में भाववाच्य

भूतकाल के भाववाच्य में क्त-प्रत्ययान्त रूप सामान्यतः नपुंसकलिङ्ग, प्रथमाविभक्ति, एकवचन में रहता है।

कर्तृवाच्यम्भाववाच्यम्
ते हसितवन्तः।तैः हसितम्।
बालाः उद्याने क्रीडितवन्तः।बालैः उद्याने क्रीडितम्।
फलानि भूमौ पतितवन्ति।फलैः भूमौ पतितम्।
वाहनानि मार्गे स्थितवन्ति।वाहनैः मार्गे स्थितम्।
सा उत्थितवती।तया उत्थितम्।
शिशुः शयितवान्।शिशुना शयितम्।
Imp for Exams: भाववाच्य में कर्ता स्त्रीलिङ्ग या बहुवचन होने पर भी भूतकालीन क्त-रूप नपुंसकलिङ्ग एकवचन रहता है।

भाववाच्य में तव्यत् / अनीयर्

अकर्मक धातुओं के भाववाच्य में तव्यत् तथा अनीयर् प्रत्ययान्त रूप नपुंसकलिङ्ग एकवचन में प्रयुक्त होते हैं।

कर्तृवाच्यम्भाववाच्यम्अर्थ
नर्तकाः नृत्येयुः।नर्तकैः नर्तितव्यम् / नर्तनीयम्।नर्तकों द्वारा नृत्य किया जाना चाहिए।
बालिकाः प्रयतेयुः।बालिकाभिः प्रयतितव्यम् / प्रयतनीयम्।बालिकाओं द्वारा प्रयत्न किया जाना चाहिए।
शुनकः धावेत्।शुनकेन धावितव्यम् / धावनीयम्।कुत्ते द्वारा दौड़ा जाना चाहिए।
वृक्षः वर्धेत।वृक्षेण वर्धितव्यम् / वर्धनीयम्।वृद्धि का भाव व्यक्त होता है।
वृद्धः उपविशेत्।वृद्धेन उपवेष्टव्यम् / उपवेशनीयम्।वृद्ध द्वारा बैठा जाना चाहिए।
रुग्णः कासेत्।रुग्णेन कासितव्यम् / कासनीयम्।रोगी द्वारा खाँसा जाना।

कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य में अन्तर

आधारकर्तृवाच्यम्कर्मवाच्यम्भाववाच्यम्
प्रधानताकर्ताकर्मक्रिया / भाव
कर्ता की विभक्तिप्रथमातृतीयातृतीया
कर्मद्वितीयाप्रथमानहीं होता
क्रिया किसके अनुसार?कर्ताकर्मसदा प्रथमपुरुष एकवचन
धातुसकर्मक / अकर्मकसकर्मकअकर्मक
उदाहरणबालः पाठं पठति।बालकेन पाठः पठ्यते।बालैः हस्यते।

वाच्य पहचानने का आसान तरीका

वाक्य को देखें क्या कर्म उपस्थित है? हाँ नहीं कर्ता प्रथमा में? हाँ → कर्तृवाच्य कर्ता तृतीया + कर्म प्रथमा → कर्मवाच्य अकर्मक धातु? कर्ता प्रथमा → कर्तृवाच्य कर्ता तृतीया → भाववाच्य

Questions and Detailed Answers

इस परिशिष्ट में पृथक् क्रमांकित अभ्यास-प्रश्न नहीं दिये गये हैं। अतः नीचे पाठ के सभी नियमों और रूपान्तरणों को समेटते हुए विस्तृत अभ्यास-प्रश्नोत्तर दिये गये हैं।

1. वाच्यम् किम्?
वाक्य में कर्ता, कर्म अथवा क्रिया-भाव में से किसकी प्रधानता है, उसे व्यक्त करने वाली व्याकरणिक व्यवस्था वाच्यम् कहलाती है। इसके तीन मुख्य प्रकार हैं—कर्तृवाच्यम्, कर्मवाच्यम् और भाववाच्यम्।
2. कर्तृवाच्यस्य मुख्याः नियमाः के?
कर्तृवाच्य में कर्ता प्रथमा विभक्ति में, कर्म द्वितीया विभक्ति में और क्रियापद कर्ता के पुरुष तथा वचन के अनुसार होता है। कर्म का वचन बदलने से क्रिया नहीं बदलती, जब तक कर्ता वही रहता है।
3. कर्मवाच्यस्य मुख्याः नियमाः के?
कर्मवाच्य में कर्ता तृतीया विभक्ति में तथा कर्म प्रथमा विभक्ति में आता है। क्रिया कर्म के वचन के अनुसार होती है। वर्तमानकाल में धातु से कर्मणि रूप बनाने के लिए सामान्यतः यक् प्रत्यय तथा आत्मनेपदी प्रत्यय प्रयुक्त होते हैं।
4. कर्तृवाच्ये क्रियापदं कस्य अनुसारं भवति?
कर्तृवाच्ये क्रियापदं कर्तृपदस्य पुरुषं वचनं च अनुसरति। उदाहरणतः “बालाः पठन्ति” में बहुवचन कर्ता होने के कारण “पठन्ति” बहुवचन है।
5. कर्मवाच्ये क्रियापदं कस्य अनुसारं भवति?
कर्मवाच्य में क्रियापद कर्मपद के वचन के अनुसार होता है। जैसे—“बालकेन पुस्तकानि पठ्यन्ते” में “पुस्तकानि” बहुवचन होने के कारण क्रिया भी “पठ्यन्ते” बहुवचन है।
6. कर्तरि प्रयोगे पुरुषव्यवस्था कथं भवति?
“त्वम्, युवाम्, यूयम्” होने पर मध्यमपुरुष; “अहम्, आवाम्, वयम्” होने पर उत्तमपुरुष; और इनसे भिन्न कर्ता होने पर सामान्यतः प्रथमपुरुष का प्रयोग होता है। प्रत्येक स्थिति में क्रिया का वचन कर्ता के वचन के अनुसार होता है।
7. कर्मवाच्ये ‘यक्’ प्रत्ययस्य भूमिका का?
वर्तमानकालीन कर्मणि प्रयोग में धातु से passive stem बनाने के लिए सामान्यतः यक् अर्थात् “य” प्रत्यय लगाया जाता है। जैसे—पठ् + य + ते = पठ्यते तथा गम् + य + ते = गम्यते।
8. “पश्यति” इत्यस्य कर्मणि रूपं किम्?
“पश्यति” का कर्मणि रूप दृश्यते है। यह केवल सामान्य “य” जोड़कर बनने वाला रूप नहीं है, इसलिए इसे विशेष रूप से याद रखना उपयोगी है।
9. भूतकाले कर्तृवाच्ये कः प्रत्ययः प्रयुज्यते?
पाठ के अनुसार भूतकालीन कर्तृप्रधान कृदन्त प्रयोग में सामान्यतः क्तवतु प्रत्यय का प्रयोग होता है, जैसे पठितवान्, लिखितवती, कृतवान् आदि।
10. भूतकाले कर्मवाच्ये कः प्रत्ययः प्रयुज्यते?
भूतकालीन कर्मवाच्य में क्त प्रत्यय का प्रयोग होता है। इस रूप का लिङ्ग और वचन कर्म के अनुसार होता है— पाठः पठितः, कविता लिखिता, फलानि खादितानि।
11. तव्यत् और अनीयर् प्रत्ययान्त रूप किसके अनुसार बदलते हैं?
कर्मवाच्य में तव्यत् और अनीयर् प्रत्ययान्त रूप कर्मपद के लिङ्ग और वचन के अनुसार बदलते हैं। जैसे—पाठः पठितव्यः, कथा लिखितव्या, वृक्षाः द्रष्टव्याः।
12. भाववाच्यम् किम्?
जहाँ अकर्मक धातु के प्रयोग में कर्ता की अपेक्षा क्रिया का भाव प्रधान बनाया जाता है, वह भाववाच्य है। इसमें कर्ता तृतीया विभक्ति में होता है और क्रिया सामान्यतः प्रथमपुरुष एकवचन में रहती है।
13. भाववाच्य केवल अकर्मक धातुओं में क्यों होता है?
अकर्मक धातुओं का कोई कर्म नहीं होता। इसलिए किसी कर्म को प्रथमा में लाकर कर्मवाच्य बनाना सम्भव नहीं होता। ऐसे वाक्यों में क्रिया या भाव को प्रधान करके भाववाच्य बनाया जाता है।
14. भाववाच्ये क्रियापदस्य वचनं किम्?
भाववाच्य में क्रियापद सदा प्रथमपुरुष एकवचन में रहता है, चाहे कर्ता एकवचन, द्विवचन या बहुवचन क्यों न हो। जैसे—“ते हसन्ति” का भाववाच्य “तैः हस्यते” है।
15. भाववाच्य के भूतकालीन रूप में कौन-सा लिङ्ग-वचन होता है?
क्त-प्रत्ययान्त भाववाच्य रूप सामान्यतः नपुंसकलिङ्ग, प्रथमाविभक्ति, एकवचन में रहता है। जैसे—तैः हसितम्, बालैः क्रीडितम्।
16. कर्मवाच्य और भाववाच्य में मुख्य अन्तर क्या है?
कर्मवाच्य सकर्मक धातु से बनता है और उसमें कर्म प्रथमा विभक्ति में आकर प्रधान हो जाता है। भाववाच्य अकर्मक धातु से बनता है, उसमें कर्म होता ही नहीं और क्रिया का भाव प्रधान होता है।
17. कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाते समय कर्ता का क्या परिवर्तन होता है?
कर्तृवाच्य का प्रथमा-विभक्त्यन्त कर्ता कर्मवाच्य में तृतीया विभक्ति में बदलता है। जैसे—रामः → रामेण, सीता → सीतया, छात्राः → छात्रैः।
18. कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाते समय कर्म का क्या परिवर्तन होता है?
कर्तृवाच्य में कर्म सामान्यतः द्वितीया विभक्ति में होता है। कर्मवाच्य में वही कर्म प्रथमा विभक्ति में आकर वाक्य का प्रधान पद बनता है। जैसे—कविताम् → कविता, वृक्षान् → वृक्षाः।
19. सकर्मक और अकर्मक धातु में क्या अन्तर है?
जिस धातु की क्रिया को पूरा अर्थ देने के लिए कर्म की आवश्यकता होती है वह सकर्मक धातु है, जैसे पठ्—“बालः पुस्तकं पठति”। जिस धातु में कर्म की आवश्यकता नहीं होती वह अकर्मक धातु है, जैसे हस्—“बालः हसति”।
20. परीक्षा में वाच्य परिवर्तन की जाँच कैसे करें?
पहले धातु सकर्मक या अकर्मक पहचानें। फिर कर्ता और कर्म की विभक्तियाँ जाँचें। उसके बाद देखें कि क्रिया कर्ता, कर्म या केवल भाव के अनुसार है। अन्त में क्रियारूप, लिङ्ग और वचन को पुनः जाँचें।

Imp for Exams

1. कर्तृवाच्य:
कर्ता — प्रथमा, कर्म — द्वितीया, क्रिया — कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार।
2. कर्मवाच्य:
कर्ता — तृतीया, कर्म — प्रथमा, क्रिया — कर्म के अनुसार।
3. भाववाच्य:
अकर्मक धातु, कर्ता — तृतीया, कर्म नहीं, क्रिया — प्रथमपुरुष एकवचन।
4. भूतकाल:
कर्तृवाच्य में क्तवतु; कर्मवाच्य में क्त; भाववाच्य में क्त-रूप नपुंसकलिङ्ग एकवचन।
5. तव्यत् / अनीयर्:
कर्मवाच्य में कर्म के लिङ्ग-वचन के अनुसार; भाववाच्य में नपुंसकलिङ्ग एकवचन।

Important Concepts — English Explanation

Active Voice

The subject is the main grammatical centre. The verb agrees with the subject in person and number.

Passive Voice

The object becomes grammatically prominent. The original subject changes to the instrumental case, and the verb agrees with the object.

Impersonal / Bhava Voice

This is used with intransitive verbs. Since there is no object to promote, the action itself becomes prominent. The verb remains third-person singular.

Most Important Difference

Do not confuse passive and bhava voice. Passive voice requires a transitive verb and an object; bhava voice is built from an intransitive verb and has no object.