धातुरूपाणि Class 9 Notes and Answers

शारदा • कक्षा 9 • परिशिष्टम् 5

धातुरूपाणि (Verb Conjugation Forms in Sanskrit)

संस्कृत में क्रिया का रूप धातु, पुरुष, वचन, पद तथा लकार के अनुसार बदलता है। इस परिशिष्ट में पठ् धातु के परस्मैपदी रूप, णिच्-प्रत्यय से प्रेरणार्थक रूप, आत्मनेपदी वृध् और लभ् धातु तथा विशेष शीङ् और भुज् धातुओं के रूप समझाये गये हैं।

धातुरूपम् Verb Form धातुः पठ् • वृध् • लभ् पुरुषः प्रथम • मध्यम • उत्तम वचनम् एक • द्वि • बहु लकारः काल / भाव उचित क्रियारूप

परिचय — धातुरूप क्या है?

संस्कृत में क्रिया का मूल रूप धातु कहलाता है। उदाहरण के लिए पठ् का मूल अर्थ पढ़ना है।

यही धातु जब अलग-अलग पुरुष, वचन और काल में प्रयुक्त होती है, तब उसके रूप बदलते हैं—

पठ् → पठति → पठतः → पठन्ति
English Explanation: A Sanskrit verbal root is called a dhātu. The root changes its visible form according to person, number, tense or mood, and whether it follows Parasmaipada or Atmanepada endings.
Imp for Exams: धातुरूप लिखते समय चार बातें अवश्य पहचानें— धातु + लकार + पुरुष + वचन।

Concept Story — पठ् धातु की यात्रा

1. एक छात्र पढ़ता है

एक छात्र पढ़ रहा है। हम कहते हैं— छात्रः पठति। यहाँ वर्तमानकाल है, इसलिए लट्-लकार का प्रयोग हुआ।

2. दो छात्र पढ़ते हैं

संस्कृत में दो व्यक्तियों के लिए अलग द्विवचन होता है— छात्रौ पठतः।

3. बहुत से छात्र पढ़ते हैं

बहुवचन में— छात्राः पठन्ति।

4. शिक्षक किसी को पढ़वाता है

अब अर्थ केवल “पढ़ता है” नहीं बल्कि “पढ़वाता है” हो जाता है। प्रेरणार्थक अर्थ के लिए णिच्-प्रत्यय से— पठ् → पाठयति।

पुरुष और वचन

पुरुषःसामान्य कर्ताएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपुरुषःसः / तौ / ते आदिएक व्यक्तिदो व्यक्तिअनेक व्यक्ति
मध्यमपुरुषःत्वम् / युवाम् / यूयम्तुमतुम दोनोंतुम सब
उत्तमपुरुषःअहम् / आवाम् / वयम्मैंहम दोनोंहम सब
Imp: संस्कृत का प्रथमपुरुष English grammar के “third person” के समान है, जबकि उत्तमपुरुष “I / We” के लिए आता है।

इस परिशिष्ट में प्रयुक्त पाँच लकार

लकारःमुख्य अर्थपठ् का उदाहरण
लट्वर्तमानकालपठति
लृट्भविष्यत्कालपठिष्यति
लङ्भूतकालअपठत्
लोट्आज्ञा / प्रेरणापठतु
विधिलिङ्विधि / सम्भावना / चाहिएपठेत्

णिच्-प्रत्यय — प्रेरणार्थक प्रयोग

जब कर्ता स्वयं कार्य नहीं करता बल्कि किसी दूसरे से कार्य करवाता है, तब प्रेरणार्थक अर्थ प्रकट होता है।

पठ् — पढ़ना → णिच् → पाठयति — पढ़वाता है

पठ् — लट्-लकार

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुषःपठतिपठतःपठन्ति
मध्यमपुरुषःपठसिपठथःपठथ
उत्तमपुरुषःपठामिपठावःपठामः

पठ् + णिच् — पाठयति

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुषःपाठयतिपाठयतःपाठयन्ति
मध्यमपुरुषःपाठयसिपाठयथःपाठयथ
उत्तमपुरुषःपाठयामिपाठयावःपाठयामः
अन्य प्रेरणार्थक रूप:
लेखयति, खादयति, हासयति, चालयति, स्मारयति, पाययति, क्रीडयति, नाययति, दर्शयति, गमयति, भोजयति, दापयति, श्रावयति, ज्ञापयति, गणयति।
English Explanation: The causative expresses “to make or cause someone to do something”. Thus पठति means “he reads”, while पाठयति means “he teaches / makes someone read”.

परस्मैपदी पठ् धातु — पाँच लकार

1. लट्-लकार — Present Tense

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपठतिपठतःपठन्ति
मध्यमपठसिपठथःपठथ
उत्तमपठामिपठावःपठामः

2. लृट्-लकार — Future Tense

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपठिष्यतिपठिष्यतःपठिष्यन्ति
मध्यमपठिष्यसिपठिष्यथःपठिष्यथ
उत्तमपठिष्यामिपठिष्यावःपठिष्यामः

3. लङ्-लकार — Past Tense

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमअपठत्अपठताम्अपठन्
मध्यमअपठःअपठतम्अपठत
उत्तमअपठम्अपठावअपठाम
Imp: लङ्-लकार में प्रायः धातु के पहले अ- आगम दिखाई देता है— पठति → अपठत्।

4. लोट्-लकार — Imperative

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपठतु / पठतात्पठताम्पठन्तु
मध्यमपठ / पठतात्पठतम्पठत
उत्तमपठानिपठावपठाम

5. विधिलिङ् — Potential / Optative

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपठेत्पठेताम्पठेयुः
मध्यमपठेःपठेतम्पठेत
उत्तमपठेयम्पठेवपठेम

आत्मनेपदी धातवः

परिशिष्ट में आत्मनेपदी धातुओं के रूप समझाने के लिए वृध् और लभ् को प्रमुख उदाहरण बनाया गया है।

वृध् → वर्धते     लभ् → लभते
पाठ में इसी प्रकार के अन्य आत्मनेपदी प्रयोगों में भाषते, वर्तते, कम्पते, स्पर्धते, सेवते, स्पन्दते, यतते, रोचते, एधते, मोदते, वन्दते, रमते, शोभते, सहते, ईक्षते और शिक्षते आदि दिये गये हैं।

वृध् धातु — लट्-लकार

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमवर्धतेवर्धेतेवर्धन्ते
मध्यमवर्धसेवर्धेथेवर्धध्वे
उत्तमवर्धेवर्धावहेवर्धामहे

वाक्येषु प्रयोगः

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमवृक्षः वर्धते।वृक्षौ वर्धेते।वृक्षाः वर्धन्ते।
मध्यमत्वं वर्धसे।युवां वर्धेथे।यूयं वर्धध्वे।
उत्तमअहं वर्धे।आवां वर्धावहे।वयं वर्धामहे।

लभ् धातु — लट्-लकार

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमलभतेलभेतेलभन्ते
मध्यमलभसेलभेथेलभध्वे
उत्तमलभेलभावहेलभामहे

आत्मनेपदी धातु — लृट्-लकार

वृध् — Future

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमवर्धिष्यतेवर्धिष्येतेवर्धिष्यन्ते
मध्यमवर्धिष्यसेवर्धिष्येथेवर्धिष्यध्वे
उत्तमवर्धिष्येवर्धिष्यावहेवर्धिष्यामहे

लभ् — Future

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमलप्स्यतेलप्स्येतेलप्स्यन्ते
मध्यमलप्स्यसेलप्स्येथेलप्स्यध्वे
उत्तमलप्स्येलप्स्यावहेलप्स्यामहे
Imp: लभ् धातु का भविष्यत्काल सीधे “लभिष्यते” नहीं, बल्कि पाठ में लप्स्यते दिया गया है।

आत्मनेपदी धातु — लङ्-लकार

वृध्

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमअवर्धतअवर्धेताम्अवर्धन्त
मध्यमअवर्धथाःअवर्धेथाम्अवर्धध्वम्
उत्तमअवर्धेअवर्धावहिअवर्धामहि

लभ्

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमअलभतअलभेताम्अलभन्त
मध्यमअलभथाःअलभेथाम्अलभध्वम्
उत्तमअलभेअलभावहिअलभामहि

आत्मनेपदी धातु — लोट्-लकार

वृध्

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमवर्धताम्वर्धेताम्वर्धन्ताम्
मध्यमवर्धस्ववर्धेथाम्वर्धध्वम्
उत्तमवर्धैवर्धावहैवर्धामहै

लभ्

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमलभताम्लभेताम्लभन्ताम्
मध्यमलभस्वलभेथाम्लभध्वम्
उत्तमलभैलभावहैलभामहै

आत्मनेपदी धातु — विधिलिङ्

वृध्

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमवर्धेतवर्धेयाताम्वर्धेरन्
मध्यमवर्धेथाःवर्धेयाथाम्वर्धेध्वम्
उत्तमवर्धेयवर्धेवहिवर्धेमहि

लभ्

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमलभेतलभेयाताम्लभेरन्
मध्यमलभेथाःलभेयाथाम्लभेध्वम्
उत्तमलभेयलभेवहिलभेमहि

परस्मैपद और आत्मनेपद — रूपों का अन्तर

आधारपरस्मैपदम्आत्मनेपदम्
लट् प्रथम एकवचनपठतिवर्धते / लभते
लट् मध्यम एकवचनपठसिवर्धसे / लभसे
लट् उत्तम एकवचनपठामिवर्धे / लभे
बहुवचन संकेत-न्ति, -थ, -मः-न्ते, -ध्वे, -महे
English Explanation: Parasmaipada and Atmanepada use different personal endings. Compare पठति with वर्धते, पठसि with वर्धसे, and पठामि with वर्धे.

विशिष्ट आत्मनेपदी धातु — शीङ्

शीङ् धातु का अर्थ सोना / लेटना है। इसके रूप सामान्य वृध्-लभ् pattern से कुछ अलग दिखाई देते हैं।

लट्-लकार

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमशेतेशयातेशेरते
मध्यमशेषेशयाथेशेध्वे
उत्तमशयेशेवहेशेमहे

लृट्-लकार

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमशयिष्यतेशयिष्येतेशयिष्यन्ते
मध्यमशयिष्यसेशयिष्येथेशयिष्यध्वे
उत्तमशयिष्येशयिष्यावहेशयिष्यामहे

लङ्-लकार

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमअशेतअशयाताम्अशेरत
मध्यमअशेथाःअशयाथाम्अशेध्वम्
उत्तमअशयिअशेवहिअशेमहि

लोट्-लकार

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमशेताम्शयाताम्शेरताम्
मध्यमशेष्वशयाथाम्शेध्वम्
उत्तमशयैशयावहैशयामहै

विधिलिङ्

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमशयीतशयीयाताम्शयीरन्
मध्यमशयीथाःशयीयाथाम्शयीध्वम्
उत्तमशयीयशयीवहिशयीमहि
Imp for Exams: शीङ् धातु में शे- और शय- दोनों प्रकार के रूप दिखाई देते हैं। इसलिए इसे सामान्य आत्मनेपदी धातु की तरह mechanically न लिखें।

विशिष्ट आत्मनेपदी धातु — भुज्

भुज् धातु के रूपों में ध्वनि-परिवर्तन विशेष रूप से दिखाई देता है— भुङ्क्ते, भुञ्जाते, भोक्ष्यते आदि।

लट्-लकार

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमभुङ्क्तेभुञ्जातेभुञ्जते
मध्यमभुङ्क्षेभुञ्जाथेभुङ्ग्ध्वे
उत्तमभुञ्जेभुञ्ज्वहेभुञ्ज्महे

लृट्-लकार

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमभोक्ष्यतेभोक्ष्येतेभोक्ष्यन्ते
मध्यमभोक्ष्यसेभोक्ष्येथेभोक्ष्यध्वे
उत्तमभोक्ष्येभोक्ष्यावहेभोक्ष्यामहे

लङ्-लकार

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमअभुङ्क्तअभुञ्जाताम्अभुञ्जत
मध्यमअभुङ्क्थाःअभुञ्जाथाम्अभुङ्ग्ध्वम्
उत्तमअभुञ्जिअभुञ्ज्वहिअभुञ्ज्महि

लोट्-लकार

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमभुङ्क्ताम्भुञ्जाताम्भुञ्जताम्
मध्यमभुङ्क्ष्वभुञ्जाथाम्भुङ्ग्ध्वम्
उत्तमभुञ्जैभुञ्जावहैभुञ्जामहै

विधिलिङ्

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमभुञ्जीतभुञ्जीयाताम्भुञ्जीरन्
मध्यमभुञ्जीथाःभुञ्जीयाथाम्भुञ्जीध्वम्
उत्तमभुञ्जीयभुञ्जीवहिभुञ्जीमहि

रूप पहचानने के Imp Patterns

1. लट् परस्मैपद

प्रथमपुरुष में -ति, -तः, -न्ति का pattern पठ् धातु में स्पष्ट है।

2. लट् आत्मनेपद

प्रथमपुरुष में सामान्यतः -ते, -ेते, -न्ते जैसे रूप दिखाई देते हैं— वर्धते, वर्धेते, वर्धन्ते।

3. भविष्यत्काल

पठ् में पठिष्य-, वृध् में वर्धिष्य-, शीङ् में शयिष्य- तथा भुज् में भोक्ष्य- आधार दिखाई देता है।

4. लङ्-लकार

भूतकाल के अनेक रूपों में आरम्भ में अ- जुड़ता है— अपठत्, अवर्धत, अलभत, अशेत, अभुङ्क्त।

धातुरूप प्रश्न कैसे हल करें?

Step 1: धातु पहचानें — पठ्, वृध्, लभ्, शीङ् या भुज्।
Step 2: देखें कि धातु परस्मैपदी है या आत्मनेपदी।
Step 3: लकार पहचानें— लट्, लृट्, लङ्, लोट् या विधिलिङ्।
Step 4: पुरुष और वचन की सही row-column चुनें।
धातुः → पदम् → लकारः → पुरुषः → वचनम् → सही रूप

Questions and Detailed Answers

इस परिशिष्ट में पृथक् क्रमांकित अभ्यास-प्रश्न नहीं दिये गये हैं। इसलिए नीचे उसी पाठ की रूप-सारिणियों पर आधारित विस्तृत अध्ययन-प्रश्नोत्तर दिये गये हैं।

1. धातुः किम्?
क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं। जैसे “पठ्” पढ़ने की क्रिया का मूल है। इसी धातु से पठति, पठतः, पठन्ति, पठिष्यति, अपठत् आदि अनेक रूप बनते हैं।
2. धातुरूप किन आधारों पर बदलता है?
धातुरूप मुख्यतः धातु, पद, लकार, पुरुष और वचन के अनुसार बदलता है। इसलिए किसी रूप को बनाने से पहले इन सभी को पहचानना आवश्यक है।
3. पठ् धातु का लट् प्रथमपुरुष एकवचन क्या है?
पठति। द्विवचन में पठतः तथा बहुवचन में पठन्ति होता है।
4. णिच्-प्रत्यय का क्या अर्थ है?
णिच् का प्रयोग यहाँ प्रेरणार्थक अर्थ में किया गया है। इससे किसी दूसरे से कार्य करवाने का भाव आता है। जैसे पठति = पढ़ता है, जबकि पाठयति = पढ़वाता / पढ़ाता है।
5. पठ् + णिच् का प्रथमपुरुष बहुवचन क्या है?
पाठयन्ति। इसी paradigm में एकवचन पाठयति और द्विवचन पाठयतः है।
6. पठ् धातु का लृट् प्रथमपुरुष एकवचन क्या है?
पठिष्यति। यह भविष्यत्काल का रूप है।
7. “अपठत्” किस लकार का रूप है?
“अपठत्” पठ् धातु का लङ्-लकार, प्रथमपुरुष, एकवचन रूप है। इसका सामान्य अर्थ “उसने पढ़ा / वह पढ़ता था” होता है।
8. “पठन्तु” का व्याकरणिक परिचय क्या है?
“पठन्तु” पठ् धातु का लोट्-लकार, प्रथमपुरुष, बहुवचन रूप है। इसमें आज्ञा या प्रेरणा का अर्थ होता है।
9. “पठेत्” किस अर्थ में प्रयुक्त होता है?
“पठेत्” विधिलिङ् का प्रथमपुरुष एकवचन रूप है। प्रसंग के अनुसार इसका अर्थ “पढ़ना चाहिए”, “पढ़े” या सम्भावना का भाव हो सकता है।
10. आत्मनेपदी वृध् धातु का लट् प्रथमपुरुष एकवचन क्या है?
वर्धते। द्विवचन वर्धेते और बहुवचन वर्धन्ते है।
11. वृध् धातु का वाक्य में प्रयोग कैसे होता है?
एकवचन में “वृक्षः वर्धते”, द्विवचन में “वृक्षौ वर्धेते” तथा बहुवचन में “वृक्षाः वर्धन्ते”। इससे क्रिया और कर्ता के वचन का सम्बन्ध स्पष्ट होता है।
12. लभ् धातु का भविष्यत्काल प्रथमपुरुष एकवचन क्या है?
लप्स्यते। यह विशेष रूप ध्यान रखने योग्य है।
13. वृध् धातु का लोट् मध्यमपुरुष एकवचन क्या है?
वर्धस्व। इसका प्रयोग सामने वाले व्यक्ति के लिए आज्ञा अथवा प्रेरणा के अर्थ में हो सकता है।
14. लभ् धातु का विधिलिङ् प्रथमपुरुष बहुवचन क्या है?
लभेरन्। एकवचन लभेत और द्विवचन लभेयाताम् है।
15. शीङ् धातु का वर्तमानकाल प्रथमपुरुष एकवचन क्या है?
शेते। इसका द्विवचन शयाते और बहुवचन शेरते है।
16. शीङ् धातु का भविष्यत्काल रूप कैसे पहचाने?
भविष्यत्काल में इसका आधार शयिष्य- दिखाई देता है— शयिष्यते, शयिष्येते, शयिष्यन्ते आदि।
17. भुज् धातु का लट् प्रथमपुरुष एकवचन क्या है?
भुङ्क्ते। द्विवचन भुञ्जाते और बहुवचन भुञ्जते है।
18. भुज् धातु का भविष्यत्काल प्रथमपुरुष एकवचन क्या है?
भोक्ष्यते। यहाँ मूल भुज् से भविष्यत्कालीन आधार “भोक्ष्य-” बनता है।
19. “अभुङ्क्त” किस रूप का उदाहरण है?
यह भुज् धातु का लङ्-लकार, प्रथमपुरुष, एकवचन रूप है।
20. “भुञ्जीत” का परिचय क्या है?
“भुञ्जीत” भुज् धातु का विधिलिङ्, प्रथमपुरुष, एकवचन रूप है।
21. परस्मैपद और आत्मनेपद में सबसे सरल पहचान क्या है?
वर्तमानकाल के रूप देखकर अन्तर आसानी से समझा जा सकता है। परस्मैपद में पठति, पठसि, पठामि जैसे endings मिलते हैं, जबकि आत्मनेपद में वर्धते, वर्धसे, वर्धे जैसे endings मिलते हैं।
22. लङ्-लकार की एक सामान्य पहचान क्या है?
पाठ में दिये गये अनेक लङ् रूपों के आरम्भ में “अ-” दिखाई देता है— अपठत्, अवर्धत, अलभत, अशेत तथा अभुङ्क्त।

Imp for Exams

1. पठ् लट् याद रखें— पठति, पठतः, पठन्ति / पठसि, पठथः, पठथ / पठामि, पठावः, पठामः।
2. णिच् प्रेरणार्थक रूप— पठति → पाठयति।
3. लकार पहचानें— पठति = लट्, पठिष्यति = लृट्, अपठत् = लङ्, पठतु = लोट्, पठेत् = विधिलिङ्।
4. आत्मनेपद के लट् endings में -ते, -से, -े जैसे रूपों को पहचानें।
5. विशेष धातुओं को अलग याद करें— शीङ् → शेते, भुज् → भुङ्क्ते, लभ् → लप्स्यते।
6. केवल ending देखकर रूप न लिखें। पहले धातु और उसका विशेष रूप देखें, विशेषकर शीङ्, भुज् और लभ् जैसे शब्दों में।

Important Concepts — English Explanation

Dhātu

A dhātu is the basic verbal root from which conjugated forms are created. For example, पठ् gives forms such as पठति, पठिष्यति and अपठत्.

Lakāra

A lakāra expresses tense or mood. In this appendix the important forms are present, future, past, imperative and potential.

Causative

The causative changes the meaning from doing an action to causing another person to do it. Thus पठति means “reads”, while पाठयति means “causes to read / teaches”.

Special Verb Patterns

Not every Sanskrit verb can be produced by attaching endings mechanically. Special roots such as शीङ् and भुज् show important stem changes, so their complete patterns should be learned carefully.

Imp for Exams: Identify the root, pada, lakāra, person and number first. Only then choose the correct verb form.