समासः Class 9 Notes and Answers

शारदा • कक्षा 9 • परिशिष्टम् 2

समासः (Compound Formation in Sanskrit)

दो या अधिक अर्थपूर्ण पदों को संक्षिप्त करके एक अर्थपूर्ण समस्तपद बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। इस पाठ में समास की रचना, विग्रह, पद-प्रधानता तथा मुख्य समास-भेदों को सरल रूप में समझाया गया है।

महा पूर्वपदम्+ पुरुषः उत्तरपदम् महापुरुषः समस्तपदम् अनेक पद एक संक्षिप्त पद समसनम् = सङ्क्षेपणम्

परिचय — समासः क्या है?

“समसनं समासः” — समसन का अर्थ है संक्षेप करना।

जब दो, तीन या अनेक अर्थयुक्त पद मिलकर एक नया पद बनाते हैं, तब उस प्रक्रिया को समास कहते हैं।

अर्थयुक्त पद + अर्थयुक्त पद → एक समस्तपदम्

उदाहरण— महा + पुरुषः → महापुरुषः

English Explanation: A Sanskrit compound combines two or more meaningful words into a shorter single expression. The compound preserves a meaningful relation between its component words.
Imp: केवल पास-पास लिखे गये दो शब्दों का समास नहीं होता। उनके बीच अर्थपूर्ण सम्बन्ध या अन्वय होना आवश्यक है।

Concept Story — दो पदों से एक पद तक

1. पहले सम्बन्ध समझें

मान लीजिए हमारे पास दो पद हैं— सीतायाः और पतिः।

दोनों पदों में स्पष्ट सम्बन्ध है: सीता का पति।

सीतायाः पतिः → सीतापतिः

2. विभक्ति हटती है

समास बनने पर पूर्वपद और उत्तरपद अपने प्रातिपदिक रूप में आते हैं।

इसके बाद बने हुए समस्तपद पर आवश्यकता के अनुसार नई विभक्ति लगती है।

3. नया पद बनता है

इस प्रकार कई शब्दों में कही गयी बात एक ही संक्षिप्त पद में आ जाती है।

English Explanation: During compound formation, the case endings of the internal members are removed. The resulting compound behaves as one nominal base, and the required case ending is then attached to the compound as a whole.

समास और अन्वय का सम्बन्ध

समास सामान्यतः उन्हीं पदों के बीच बनता है जिनका आपस में अर्थपूर्ण सम्बन्ध हो।

सम्बन्ध होने पर:
सीतायाः पतिः → सीतापतिः

यदि दो शब्द वाक्य में पास हों लेकिन उनका परस्पर सम्बन्ध न हो, तो केवल समीपता के कारण उनका समास नहीं बनाया जा सकता।

Imp: अन्वयः अस्ति → समासः सम्भवः
अन्वयः नास्ति → समासः न भवति

पूर्वपदम् और उत्तरपदम्

किसी समस्तपद के घटक पदों में जो पद पहले आता है उसे पूर्वपदम् और जो बाद में आता है उसे उत्तरपदम् कहते हैं।

सीता + पतिः
सीता = पूर्वपदम् पतिः = उत्तरपदम्
English Explanation: The first member of a compound is called Purvapada and the second member is called Uttarapada. Understanding these two members is very important for identifying the type of compound.

विग्रहवाक्यम्

समस्तपद में छिपे हुए अर्थ को स्पष्ट करने वाला वाक्य विग्रहवाक्यम् कहलाता है।

समस्तपदम्: राष्ट्रनायकः
विग्रहवाक्यम्: राष्ट्रस्य नायकः

विग्रह के दो प्रकार हैं—

प्रकारअर्थउदाहरण
स्वपदविग्रहः समस्तपद के अपने ही घटक पदों से अर्थ स्पष्ट किया जाए। कृष्णसखा = कृष्णस्य सखा
अस्वपदविग्रहः अर्थ बताने के लिए ऐसा अतिरिक्त पद प्रयोग हो जो समस्तपद में सीधे उपस्थित न हो। यथामति = मतिम् अनतिक्रम्य
Imp: नित्यसमास में सामान्यतः अस्वपदविग्रह होता है।

समास के मुख्य भेद

पाठ में समास को मुख्यतः दो व्यापक श्रेणियों में रखा गया है—

1. केवलसमासः — जो तत्पुरुष आदि विशेष संज्ञाओं से रहित होकर केवल “समास” कहलाता है।
2. विशेषसमासः — इसके चार प्रमुख भेद हैं।
विशेषसमासः चार प्रमुख भेद तत्पुरुषः उत्तरपदार्थप्रधानः रामदूतः द्वन्द्वः उभयपदार्थप्रधानः रामकृष्णौ बहुव्रीहिः अन्यपदार्थप्रधानः पीताम्बरः अव्ययीभावः पूर्वपदार्थप्रधानः उपग्रामम्

समास का निर्णय — कौन-सा पद प्रधान है?

समास पहचानने के लिए यह देखना बहुत उपयोगी है कि क्रियापद का सीधा सम्बन्ध किस पद के अर्थ से है।

समासःप्रधान अर्थसरल संकेत
तत्पुरुषःउत्तरपदार्थःदूसरा पद मुख्य
द्वन्द्वःउभयपदार्थःदोनों पद मुख्य
बहुव्रीहिःअन्यपदार्थःसमस्तपद किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु को बताता है
अव्ययीभावःपूर्वपदार्थःपहले पद का अर्थ मुख्य
English Explanation: One of the quickest ways to identify a compound is to ask which meaning is grammatically dominant. Tatpurusha favours the latter member, Dvandva gives equal importance to both, Bahuvrihi points outside the compound, while Avyayibhava generally emphasizes the first member.

तत्पुरुषसमासः

तत्पुरुषसमास में सामान्यतः उत्तरपद का अर्थ प्रधान होता है।

उत्तरपदार्थप्रधानः → तत्पुरुषसमासः

1. विभक्तितत्पुरुषः — षड्विधः

प्रकारविग्रहवाक्यम्समस्तपदम्
द्वितीयातत्पुरुषःगृहं गतःगृहगतः
तृतीयातत्पुरुषःनखैः भिन्नःनखभिन्नः
चतुर्थीतत्पुरुषःगवे हितम्गोहितम्
पञ्चमीतत्पुरुषःचोरात् भयम्चोरभयम्
षष्ठीतत्पुरुषःवृक्षस्य मूलम्वृक्षमूलम्
सप्तमीतत्पुरुषःकार्ये कुशलःकार्यकुशलः

कर्मधारयसमासः

कर्मधारयसमास भी तत्पुरुष का ही एक भेद है। पाठ में इसके नौ प्रकार दिये गये हैं।

प्रकारविग्रहःसमस्तपदम्
विशेषणपूर्वपदःनीलो मेघःनीलमेघः
विशेषणोत्तरपदःवैयाकरणः खसूचिःवैयाकरणखसूचिः
विशेषणोभयपदःशीतम् उष्णम्शीतोष्णम्
उपमानपूर्वपदःमेघ इव श्यामःमेघश्यामः
उपमानोत्तरपदःनरः व्याघ्रः इवनरव्याघ्रः
अवधारणापूर्वपदःविद्या एव धनम्विद्याधनम्
सम्भावनापूर्वपदःआम्रः इति वृक्षःआम्रवृक्षः
मध्यमपदलोपःशाकप्रियः पार्थिवःशाकपार्थिवः
मयूरव्यंसकादिःअन्यो देशःदेशान्तरम्

द्विगुसमासः

द्विगुसमास भी तत्पुरुष का एक भेद है। पाठ में इसके तीन प्रकार दिये गये हैं।

प्रकारविग्रहःसमस्तपदम्
समाहारद्विगुःत्रयाणां लोकानां समाहारःत्रिलोकी
तद्धितार्थद्विगुःषण्णां मातॄणाम् अपत्यम्षाण्मातुरः
उत्तरपदद्विगुःपञ्च गावः धनं यस्य सःपञ्चगवधनः

नञ्-प्रभृति तत्पुरुषसमासः

यह भी तत्पुरुष के अन्तर्गत आता है। पाठ में इसके छह प्रकार दिये गये हैं।

प्रकारविग्रहःसमस्तपदम्
नञ्-तत्पुरुषःन धर्मःअधर्मः
कुतत्पुरुषःकुत्सितः पुत्रःकुपुत्रः
गतितत्पुरुषःअशुक्लं शुक्लं कृत्वाशुक्लीकृत्य
प्रादितत्पुरुषःप्रगतः आचार्यःप्राचार्यः
अतिक्रान्तः देवम्अतिदेवः
निष्क्रान्तः वाराणस्याःनिर्वाराणसिः
उपपदतत्पुरुषःकुम्भं करोति इतिकुम्भकारः
एकदेशीतत्पुरुषःअर्धं ग्रामस्यअर्धग्रामः
अह्नः पूर्वम्पूर्वाह्णः

द्वन्द्वसमासः

द्वन्द्वसमास में सामान्यतः दोनों या सभी घटक पदों का अर्थ प्रधान होता है।

उभयपदार्थप्रधानः → द्वन्द्वसमासः

1. इतरेतरद्वन्द्वसमासः

प्रकारविग्रहःसमस्तपदम्
द्विपदद्वन्द्वःरामश्च कृष्णश्चरामकृष्णौ
बहुपदद्वन्द्वःरामश्च कृष्णश्च सुरेशश्च गिरीशश्चरामकृष्णसुरेशगिरीशाः

2. समाहारद्वन्द्वसमासः

प्रकारविग्रहःसमस्तपदम्
समाहारद्वन्द्वःसंज्ञा च परिभाषा चसंज्ञापरिभाषम्
नित्यसमाहारद्वन्द्वःपाणी च पादौ चपाणिपादम्
English Explanation: In Dvandva compounds, neither member is subordinate. Both members contribute directly to the meaning of the compound.

बहुव्रीहिसमासः

बहुव्रीहिसमास में पूर्वपद और उत्तरपद में से कोई भी मुख्य नहीं होता। समस्तपद का अर्थ किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु की ओर जाता है।

अन्यपदार्थप्रधानः → बहुव्रीहिसमासः
उदाहरण:
पीतम् अम्बरं यस्य सः → पीताम्बरः
यहाँ “पीतम्” और “अम्बरम्” मुख्य नहीं हैं। समस्तपद विष्णु को बताता है।

1. सामान्यबहुव्रीहिः — षड्विधः

प्रकारविग्रहःसमस्तपदम्जिसके लिए प्रयुक्त
द्वितीयार्थबहुव्रीहिःप्राप्तम् उदकं यं सःप्राप्तोदकःग्रामः
तृतीयार्थबहुव्रीहिःपीतं क्षीरं येन सःपीतक्षीरःशिशुः
चतुर्थ्यर्थबहुव्रीहिःदत्तः पशुः यस्मै सःदत्तपशुःशिवः
पञ्चम्यर्थबहुव्रीहिःउद्धृतं जलं यस्मात् सःउद्धृतजलःकूपः
षष्ठ्यर्थबहुव्रीहिःपीतम् अम्बरं यस्य सःपीताम्बरःविष्णुः
सप्तम्यर्थबहुव्रीहिःबहूनि फलानि यस्मिन् सःबहुफलःवृक्षः

2. विशेषबहुव्रीहिसमासः — नवधा

प्रकारविग्रहःसमस्तपदम्
व्यधिकरणबहुव्रीहिःचक्रं पाणौ यस्य सःचक्रपाणिः
सङ्ख्योत्तरपदबहुव्रीहिःविंशतेः समीपे ये सन्ति तेउपविंशाः
सङ्ख्योभयपदबहुव्रीहिःद्वौ वा त्रयो वाद्वित्राः
सहपूर्वपदबहुव्रीहिःशिष्येण सह वर्तते इतिसशिष्यः
व्यतिहारलक्षणबहुव्रीहिःकेशेषु केशेषु गृहीत्वा इदं युद्धं प्रवृत्तम्केशाकेशि
दिगन्तराललक्षणबहुव्रीहिःदक्षिणस्याः पूर्वस्याः दिशोः यदन्तरालम्दक्षिणपूर्वा
नञर्थबहुव्रीहिःअविद्यमानः पुत्रः यस्य सःअपुत्रः
प्रादिबहुव्रीहिःनिर्गता कृपा यस्मात् सःनिष्कृपः
उपमानपूर्वपदबहुव्रीहिःगजस्य आननमिव आननं यस्य सःगजाननः

अव्ययीभावसमासः

अव्ययीभावसमास में सामान्यतः पूर्वपद का अर्थ प्रधान होता है।

पाठ में कहा गया है— “अनव्ययम् अव्ययं भवति” — अर्थात् समास के कारण पूरा समस्तपद अव्ययरूप में प्रयुक्त होता है।

पूर्वपदार्थप्रधानः → अव्ययीभावसमासः

अव्ययीभाव के अनेक भेद हैं। पाठ में प्रसिद्ध भेदों में से निम्न उदाहरण दिये गये हैं—

क्रमप्रकारविग्रहःसमस्तपदम्
1समीपार्थेग्रामस्य समीपेउपग्रामम्
2अभावार्थेमशकानाम् अभावःनिर्मशकम्
3योग्यतार्थेरूपस्य योग्यम्अनुरूपम्
4वीप्सार्थेदिने दिनेप्रतिदिनम्
5पदार्थ-अनतिवृत्त्यर्थेशक्तिम् अनतिक्रम्ययथाशक्ति
6मर्यादार्थेआ मुक्तेःआमुक्ति
7अभिविध्यर्थेआ बालेभ्यःआबालम्
8आभिमुख्यार्थेअग्निम् अभिअभ्यग्नि
9मात्रार्थेशाकस्य लेशःशाकप्रति
10अवधारणार्थेयावन्तः श्लोकाःयावच्छ्लोकम्
11पारेशब्दयुक्तःपारे समुद्रस्यपारेसमुद्रम्
12मध्येशब्दयुक्तःमध्ये गङ्गायाःमध्येगङ्गम्
13सादृश्यार्थेसख्या सदृशःससखि
14सम्पत्त्यर्थेक्षत्राणां सम्पत्तिःसक्षत्रम्
15साकल्यार्थेतृणमपि अपरित्यज्यसतृणम्
16पश्चादर्थेरामस्य पश्चात्अनुरामम्
17विभक्त्यर्थेविद्यालये इतिअधिविद्यालयम्
18समृद्ध्यर्थेधान्यानां समृद्धिःसुधान्यम्
19असम्प्रत्यर्थेनिद्रा सम्प्रति न युज्यतेअतिनिद्रम्
20आनुपूर्व्यार्थेज्येष्ठस्य आनुपूर्व्येणअनुज्येष्ठम्

समास कैसे पहचानें?

1
समस्तपद को दो या अधिक घटक पदों में समझें।
2
विग्रहवाक्य बनाएँ।

देखें कि दोनों पदों का सम्बन्ध किस विभक्ति या अर्थ से है।

3
प्रधान पद पहचानें।

पूर्वपद, उत्तरपद, दोनों पद या किसी अन्य पद में से किसका अर्थ प्रधान है?

4
उसके अनुसार समास का प्रकार निश्चित करें।
यदि...तो सामान्यतः...
उत्तरपद मुख्य हैतत्पुरुषः
दोनों पद मुख्य हैंद्वन्द्वः
किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का अर्थ निकलता हैबहुव्रीहिः
पूर्वपद का अर्थ मुख्य हैअव्ययीभावः

चार मुख्य समासों का अन्तर

समासप्रधानताउदाहरणविग्रह
तत्पुरुषउत्तरपदरामदूतःरामस्य दूतः
द्वन्द्वदोनों पदरामकृष्णौरामश्च कृष्णश्च
बहुव्रीहिअन्य पदपीताम्बरःपीतम् अम्बरं यस्य सः
अव्ययीभावपूर्वपदउपग्रामम्ग्रामस्य समीपे
English Explanation: The central difference among the four major compounds lies in semantic dominance. Identifying which part carries the main meaning usually makes classification much easier.

Imp Concepts

समसनम्

समसनम् का अर्थ है संक्षेपण। कई सम्बन्धित पदों को एक पद में संक्षिप्त करना ही समास की मूल प्रक्रिया है।

समस्तपदम्

समास द्वारा निर्मित नया संयुक्त पद समस्तपदम् कहलाता है।

विग्रहवाक्यम्

समस्तपद का पूरा सम्बन्ध और अर्थ स्पष्ट करने वाला वाक्य विग्रहवाक्यम् है।

प्रधानता

समास का प्रकार पहचानने में यह जानना आवश्यक है कि पूर्वपद, उत्तरपद, दोनों पद या किसी अन्य पद में से किसका अर्थ मुख्य है।

Imp: समास पहचानते समय केवल शब्द का रूप न देखें। विग्रह + अर्थ + पदप्रधानता तीनों का विचार करें।

Questions and Answers

इस परिशिष्ट में पृथक् क्रमांकित अभ्यास-प्रश्न नहीं दिये गये हैं। नीचे पाठ की सभी मुख्य अवधारणाओं पर आधारित अध्ययन-प्रश्नोत्तर दिये गये हैं।

1. समासः कः?
अर्थयुक्तानां परस्परसम्बद्धानां पदानाम् एकीभवनं समासः उच्यते।
2. समसनम् इत्यस्य अर्थः कः?
समसनम् इत्यस्य अर्थः सङ्क्षेपणम् अस्ति।
3. समासः केषां पदानां मध्ये भवति?
परस्परम् अन्वितानां अर्थात् परस्परसम्बद्धानां पदानां मध्ये समासः भवति।
4. पूर्वपदम् किम्?
समासे प्रथमं प्रयुक्तं पदं पूर्वपदम् उच्यते।
5. उत्तरपदम् किम्?
पूर्वपदस्य अनन्तरं प्रयुक्तं पदम् उत्तरपदम् उच्यते।
6. विग्रहवाक्यम् किम्?
समासस्य अर्थं स्पष्टतया बोधयितुं प्रयुक्तं वाक्यं विग्रहवाक्यम् उच्यते।
7. विग्रहस्य कति भेदौ स्तः?
विग्रहस्य द्वौ भेदौ स्तः—स्वपदविग्रहः तथा अस्वपदविग्रहः।
8. विशेषसमासस्य मुख्याः भेदाः के?
तत्पुरुषः, द्वन्द्वः, बहुव्रीहिः तथा अव्ययीभावः— एते विशेषसमासस्य चत्वारः मुख्याः भेदाः सन्ति।
9. तत्पुरुषसमासे कस्य प्राधान्यम् अस्ति?
तत्पुरुषसमासे सामान्यतः उत्तरपदार्थस्य प्राधान्यम् अस्ति।
10. द्वन्द्वसमासे कस्य प्राधान्यम् अस्ति?
द्वन्द्वसमासे उभयपदार्थयोः प्राधान्यम् अस्ति।
11. बहुव्रीहिसमासे कस्य प्राधान्यम् अस्ति?
बहुव्रीहिसमासे अन्यपदार्थस्य प्राधान्यम् अस्ति।
12. अव्ययीभावसमासे कस्य प्राधान्यम् अस्ति?
अव्ययीभावसमासे सामान्यतः पूर्वपदार्थस्य प्राधान्यम् अस्ति।
13. विभक्तितत्पुरुषः कतिविधः?
विभक्तितत्पुरुषः षड्विधः अस्ति।
14. कर्मधारयसमासः कस्य भेदः?
कर्मधारयसमासः तत्पुरुषसमासस्य भेदः अस्ति।
15. द्विगुसमासः कतिविधः?
द्विगुसमासः त्रिविधः अस्ति।
16. द्वन्द्वसमासस्य मुख्यौ भेदौ कौ?
इतरेतरद्वन्द्वः तथा समाहारद्वन्द्वः द्वन्द्वसमासस्य मुख्यौ भेदौ स्तः।
17. बहुव्रीहिसमासस्य मुख्यौ भेदौ कौ?
सामान्यबहुव्रीहिः तथा विशेषबहुव्रीहिः मुख्यौ भेदौ स्तः।
18. “पीताम्बरः” कः समासः?
“पीतम् अम्बरं यस्य सः” इति विग्रहः। अतः “पीताम्बरः” षष्ठ्यर्थबहुव्रीहिसमासः अस्ति।
19. “रामकृष्णौ” कः समासः?
“रामश्च कृष्णश्च” इति विग्रहः। अतः अयं द्विपद-इतरेतरद्वन्द्वसमासः अस्ति।
20. “प्रतिदिनम्” कः समासः?
“दिने दिने” इति विग्रहः। अतः अयं वीप्सार्थ-अव्ययीभावसमासः अस्ति।

Important Lines — English Explanation

“समसनं समासः”

Meaning: A compound is formed by shortening and combining related words into a single meaningful expression.

Relation is Essential

Words can form a compound only when they are meaningfully connected. Mere physical proximity of two words in a sentence does not create a compound.

Vigraha Reveals the Hidden Grammar

A compound may hide case relations such as “of”, “for”, “from” or “in”. The vigraha sentence restores these relations and makes classification easier.

Meaning Determines the Type

The most useful question is: “Which element is semantically dominant?” The answer helps distinguish Tatpurusha, Dvandva, Bahuvrihi and Avyayibhava.

Imp: For school-level questions, use this order: समस्तपदम् → विग्रहः → प्रधानपदम् → समासभेदः.