समासः (Compound Formation in Sanskrit)
दो या अधिक अर्थपूर्ण पदों को संक्षिप्त करके एक अर्थपूर्ण समस्तपद बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। इस पाठ में समास की रचना, विग्रह, पद-प्रधानता तथा मुख्य समास-भेदों को सरल रूप में समझाया गया है।
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Toggleपरिचय — समासः क्या है?
“समसनं समासः” — समसन का अर्थ है संक्षेप करना।
जब दो, तीन या अनेक अर्थयुक्त पद मिलकर एक नया पद बनाते हैं, तब उस प्रक्रिया को समास कहते हैं।
उदाहरण— महा + पुरुषः → महापुरुषः
Concept Story — दो पदों से एक पद तक
1. पहले सम्बन्ध समझें
मान लीजिए हमारे पास दो पद हैं— सीतायाः और पतिः।
दोनों पदों में स्पष्ट सम्बन्ध है: सीता का पति।
2. विभक्ति हटती है
समास बनने पर पूर्वपद और उत्तरपद अपने प्रातिपदिक रूप में आते हैं।
इसके बाद बने हुए समस्तपद पर आवश्यकता के अनुसार नई विभक्ति लगती है।
3. नया पद बनता है
इस प्रकार कई शब्दों में कही गयी बात एक ही संक्षिप्त पद में आ जाती है।
समास और अन्वय का सम्बन्ध
समास सामान्यतः उन्हीं पदों के बीच बनता है जिनका आपस में अर्थपूर्ण सम्बन्ध हो।
सीतायाः पतिः → सीतापतिः
यदि दो शब्द वाक्य में पास हों लेकिन उनका परस्पर सम्बन्ध न हो, तो केवल समीपता के कारण उनका समास नहीं बनाया जा सकता।
अन्वयः नास्ति → समासः न भवति
पूर्वपदम् और उत्तरपदम्
किसी समस्तपद के घटक पदों में जो पद पहले आता है उसे पूर्वपदम् और जो बाद में आता है उसे उत्तरपदम् कहते हैं।
सीता = पूर्वपदम् पतिः = उत्तरपदम्
विग्रहवाक्यम्
समस्तपद में छिपे हुए अर्थ को स्पष्ट करने वाला वाक्य विग्रहवाक्यम् कहलाता है।
विग्रहवाक्यम्: राष्ट्रस्य नायकः
विग्रह के दो प्रकार हैं—
| प्रकार | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्वपदविग्रहः | समस्तपद के अपने ही घटक पदों से अर्थ स्पष्ट किया जाए। | कृष्णसखा = कृष्णस्य सखा |
| अस्वपदविग्रहः | अर्थ बताने के लिए ऐसा अतिरिक्त पद प्रयोग हो जो समस्तपद में सीधे उपस्थित न हो। | यथामति = मतिम् अनतिक्रम्य |
समास के मुख्य भेद
पाठ में समास को मुख्यतः दो व्यापक श्रेणियों में रखा गया है—
समास का निर्णय — कौन-सा पद प्रधान है?
समास पहचानने के लिए यह देखना बहुत उपयोगी है कि क्रियापद का सीधा सम्बन्ध किस पद के अर्थ से है।
| समासः | प्रधान अर्थ | सरल संकेत |
|---|---|---|
| तत्पुरुषः | उत्तरपदार्थः | दूसरा पद मुख्य |
| द्वन्द्वः | उभयपदार्थः | दोनों पद मुख्य |
| बहुव्रीहिः | अन्यपदार्थः | समस्तपद किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु को बताता है |
| अव्ययीभावः | पूर्वपदार्थः | पहले पद का अर्थ मुख्य |
तत्पुरुषसमासः
तत्पुरुषसमास में सामान्यतः उत्तरपद का अर्थ प्रधान होता है।
1. विभक्तितत्पुरुषः — षड्विधः
| प्रकार | विग्रहवाक्यम् | समस्तपदम् |
|---|---|---|
| द्वितीयातत्पुरुषः | गृहं गतः | गृहगतः |
| तृतीयातत्पुरुषः | नखैः भिन्नः | नखभिन्नः |
| चतुर्थीतत्पुरुषः | गवे हितम् | गोहितम् |
| पञ्चमीतत्पुरुषः | चोरात् भयम् | चोरभयम् |
| षष्ठीतत्पुरुषः | वृक्षस्य मूलम् | वृक्षमूलम् |
| सप्तमीतत्पुरुषः | कार्ये कुशलः | कार्यकुशलः |
कर्मधारयसमासः
कर्मधारयसमास भी तत्पुरुष का ही एक भेद है। पाठ में इसके नौ प्रकार दिये गये हैं।
| प्रकार | विग्रहः | समस्तपदम् |
|---|---|---|
| विशेषणपूर्वपदः | नीलो मेघः | नीलमेघः |
| विशेषणोत्तरपदः | वैयाकरणः खसूचिः | वैयाकरणखसूचिः |
| विशेषणोभयपदः | शीतम् उष्णम् | शीतोष्णम् |
| उपमानपूर्वपदः | मेघ इव श्यामः | मेघश्यामः |
| उपमानोत्तरपदः | नरः व्याघ्रः इव | नरव्याघ्रः |
| अवधारणापूर्वपदः | विद्या एव धनम् | विद्याधनम् |
| सम्भावनापूर्वपदः | आम्रः इति वृक्षः | आम्रवृक्षः |
| मध्यमपदलोपः | शाकप्रियः पार्थिवः | शाकपार्थिवः |
| मयूरव्यंसकादिः | अन्यो देशः | देशान्तरम् |
द्विगुसमासः
द्विगुसमास भी तत्पुरुष का एक भेद है। पाठ में इसके तीन प्रकार दिये गये हैं।
| प्रकार | विग्रहः | समस्तपदम् |
|---|---|---|
| समाहारद्विगुः | त्रयाणां लोकानां समाहारः | त्रिलोकी |
| तद्धितार्थद्विगुः | षण्णां मातॄणाम् अपत्यम् | षाण्मातुरः |
| उत्तरपदद्विगुः | पञ्च गावः धनं यस्य सः | पञ्चगवधनः |
नञ्-प्रभृति तत्पुरुषसमासः
यह भी तत्पुरुष के अन्तर्गत आता है। पाठ में इसके छह प्रकार दिये गये हैं।
| प्रकार | विग्रहः | समस्तपदम् |
|---|---|---|
| नञ्-तत्पुरुषः | न धर्मः | अधर्मः |
| कुतत्पुरुषः | कुत्सितः पुत्रः | कुपुत्रः |
| गतितत्पुरुषः | अशुक्लं शुक्लं कृत्वा | शुक्लीकृत्य |
| प्रादितत्पुरुषः | प्रगतः आचार्यः | प्राचार्यः |
| अतिक्रान्तः देवम् | अतिदेवः | |
| निष्क्रान्तः वाराणस्याः | निर्वाराणसिः | |
| उपपदतत्पुरुषः | कुम्भं करोति इति | कुम्भकारः |
| एकदेशीतत्पुरुषः | अर्धं ग्रामस्य | अर्धग्रामः |
| अह्नः पूर्वम् | पूर्वाह्णः |
द्वन्द्वसमासः
द्वन्द्वसमास में सामान्यतः दोनों या सभी घटक पदों का अर्थ प्रधान होता है।
1. इतरेतरद्वन्द्वसमासः
| प्रकार | विग्रहः | समस्तपदम् |
|---|---|---|
| द्विपदद्वन्द्वः | रामश्च कृष्णश्च | रामकृष्णौ |
| बहुपदद्वन्द्वः | रामश्च कृष्णश्च सुरेशश्च गिरीशश्च | रामकृष्णसुरेशगिरीशाः |
2. समाहारद्वन्द्वसमासः
| प्रकार | विग्रहः | समस्तपदम् |
|---|---|---|
| समाहारद्वन्द्वः | संज्ञा च परिभाषा च | संज्ञापरिभाषम् |
| नित्यसमाहारद्वन्द्वः | पाणी च पादौ च | पाणिपादम् |
बहुव्रीहिसमासः
बहुव्रीहिसमास में पूर्वपद और उत्तरपद में से कोई भी मुख्य नहीं होता। समस्तपद का अर्थ किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु की ओर जाता है।
पीतम् अम्बरं यस्य सः → पीताम्बरः
यहाँ “पीतम्” और “अम्बरम्” मुख्य नहीं हैं। समस्तपद विष्णु को बताता है।
1. सामान्यबहुव्रीहिः — षड्विधः
| प्रकार | विग्रहः | समस्तपदम् | जिसके लिए प्रयुक्त |
|---|---|---|---|
| द्वितीयार्थबहुव्रीहिः | प्राप्तम् उदकं यं सः | प्राप्तोदकः | ग्रामः |
| तृतीयार्थबहुव्रीहिः | पीतं क्षीरं येन सः | पीतक्षीरः | शिशुः |
| चतुर्थ्यर्थबहुव्रीहिः | दत्तः पशुः यस्मै सः | दत्तपशुः | शिवः |
| पञ्चम्यर्थबहुव्रीहिः | उद्धृतं जलं यस्मात् सः | उद्धृतजलः | कूपः |
| षष्ठ्यर्थबहुव्रीहिः | पीतम् अम्बरं यस्य सः | पीताम्बरः | विष्णुः |
| सप्तम्यर्थबहुव्रीहिः | बहूनि फलानि यस्मिन् सः | बहुफलः | वृक्षः |
2. विशेषबहुव्रीहिसमासः — नवधा
| प्रकार | विग्रहः | समस्तपदम् |
|---|---|---|
| व्यधिकरणबहुव्रीहिः | चक्रं पाणौ यस्य सः | चक्रपाणिः |
| सङ्ख्योत्तरपदबहुव्रीहिः | विंशतेः समीपे ये सन्ति ते | उपविंशाः |
| सङ्ख्योभयपदबहुव्रीहिः | द्वौ वा त्रयो वा | द्वित्राः |
| सहपूर्वपदबहुव्रीहिः | शिष्येण सह वर्तते इति | सशिष्यः |
| व्यतिहारलक्षणबहुव्रीहिः | केशेषु केशेषु गृहीत्वा इदं युद्धं प्रवृत्तम् | केशाकेशि |
| दिगन्तराललक्षणबहुव्रीहिः | दक्षिणस्याः पूर्वस्याः दिशोः यदन्तरालम् | दक्षिणपूर्वा |
| नञर्थबहुव्रीहिः | अविद्यमानः पुत्रः यस्य सः | अपुत्रः |
| प्रादिबहुव्रीहिः | निर्गता कृपा यस्मात् सः | निष्कृपः |
| उपमानपूर्वपदबहुव्रीहिः | गजस्य आननमिव आननं यस्य सः | गजाननः |
अव्ययीभावसमासः
अव्ययीभावसमास में सामान्यतः पूर्वपद का अर्थ प्रधान होता है।
पाठ में कहा गया है— “अनव्ययम् अव्ययं भवति” — अर्थात् समास के कारण पूरा समस्तपद अव्ययरूप में प्रयुक्त होता है।
अव्ययीभाव के अनेक भेद हैं। पाठ में प्रसिद्ध भेदों में से निम्न उदाहरण दिये गये हैं—
| क्रम | प्रकार | विग्रहः | समस्तपदम् |
|---|---|---|---|
| 1 | समीपार्थे | ग्रामस्य समीपे | उपग्रामम् |
| 2 | अभावार्थे | मशकानाम् अभावः | निर्मशकम् |
| 3 | योग्यतार्थे | रूपस्य योग्यम् | अनुरूपम् |
| 4 | वीप्सार्थे | दिने दिने | प्रतिदिनम् |
| 5 | पदार्थ-अनतिवृत्त्यर्थे | शक्तिम् अनतिक्रम्य | यथाशक्ति |
| 6 | मर्यादार्थे | आ मुक्तेः | आमुक्ति |
| 7 | अभिविध्यर्थे | आ बालेभ्यः | आबालम् |
| 8 | आभिमुख्यार्थे | अग्निम् अभि | अभ्यग्नि |
| 9 | मात्रार्थे | शाकस्य लेशः | शाकप्रति |
| 10 | अवधारणार्थे | यावन्तः श्लोकाः | यावच्छ्लोकम् |
| 11 | पारेशब्दयुक्तः | पारे समुद्रस्य | पारेसमुद्रम् |
| 12 | मध्येशब्दयुक्तः | मध्ये गङ्गायाः | मध्येगङ्गम् |
| 13 | सादृश्यार्थे | सख्या सदृशः | ससखि |
| 14 | सम्पत्त्यर्थे | क्षत्राणां सम्पत्तिः | सक्षत्रम् |
| 15 | साकल्यार्थे | तृणमपि अपरित्यज्य | सतृणम् |
| 16 | पश्चादर्थे | रामस्य पश्चात् | अनुरामम् |
| 17 | विभक्त्यर्थे | विद्यालये इति | अधिविद्यालयम् |
| 18 | समृद्ध्यर्थे | धान्यानां समृद्धिः | सुधान्यम् |
| 19 | असम्प्रत्यर्थे | निद्रा सम्प्रति न युज्यते | अतिनिद्रम् |
| 20 | आनुपूर्व्यार्थे | ज्येष्ठस्य आनुपूर्व्येण | अनुज्येष्ठम् |
समास कैसे पहचानें?
देखें कि दोनों पदों का सम्बन्ध किस विभक्ति या अर्थ से है।
पूर्वपद, उत्तरपद, दोनों पद या किसी अन्य पद में से किसका अर्थ प्रधान है?
| यदि... | तो सामान्यतः... |
|---|---|
| उत्तरपद मुख्य है | तत्पुरुषः |
| दोनों पद मुख्य हैं | द्वन्द्वः |
| किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का अर्थ निकलता है | बहुव्रीहिः |
| पूर्वपद का अर्थ मुख्य है | अव्ययीभावः |
चार मुख्य समासों का अन्तर
| समास | प्रधानता | उदाहरण | विग्रह |
|---|---|---|---|
| तत्पुरुष | उत्तरपद | रामदूतः | रामस्य दूतः |
| द्वन्द्व | दोनों पद | रामकृष्णौ | रामश्च कृष्णश्च |
| बहुव्रीहि | अन्य पद | पीताम्बरः | पीतम् अम्बरं यस्य सः |
| अव्ययीभाव | पूर्वपद | उपग्रामम् | ग्रामस्य समीपे |
Imp Concepts
समसनम्
समसनम् का अर्थ है संक्षेपण। कई सम्बन्धित पदों को एक पद में संक्षिप्त करना ही समास की मूल प्रक्रिया है।
समस्तपदम्
समास द्वारा निर्मित नया संयुक्त पद समस्तपदम् कहलाता है।
विग्रहवाक्यम्
समस्तपद का पूरा सम्बन्ध और अर्थ स्पष्ट करने वाला वाक्य विग्रहवाक्यम् है।
प्रधानता
समास का प्रकार पहचानने में यह जानना आवश्यक है कि पूर्वपद, उत्तरपद, दोनों पद या किसी अन्य पद में से किसका अर्थ मुख्य है।
Questions and Answers
इस परिशिष्ट में पृथक् क्रमांकित अभ्यास-प्रश्न नहीं दिये गये हैं। नीचे पाठ की सभी मुख्य अवधारणाओं पर आधारित अध्ययन-प्रश्नोत्तर दिये गये हैं।
Important Lines — English Explanation
“समसनं समासः”
Meaning: A compound is formed by shortening and combining related words into a single meaningful expression.
Relation is Essential
Words can form a compound only when they are meaningfully connected. Mere physical proximity of two words in a sentence does not create a compound.
Vigraha Reveals the Hidden Grammar
A compound may hide case relations such as “of”, “for”, “from” or “in”. The vigraha sentence restores these relations and makes classification easier.
Meaning Determines the Type
The most useful question is: “Which element is semantically dominant?” The answer helps distinguish Tatpurusha, Dvandva, Bahuvrihi and Avyayibhava.
