न खलु वयस्तेजसो हेतुः Class 9 Notes and Answers

शारदा • कक्षा 9 • चतुर्थः पाठः

न खलु वयस्तेजसो हेतुः

A biographical lesson based on Khudiram Bose, focusing on courage, determination, discipline and participation in India's freedom struggle at a young age.

तेजः Courage & Inner Strength वयः Age संकल्पः Determination महान् उत्साहः केवलं वयसा न निर्धारितः
Imp: “न खलु वयस्तेजसो हेतुः” का भाव है कि साहस, दृढ़ता और तेज केवल बड़ी आयु पर निर्भर नहीं करते।

1. पाठ का परिचय

यह पाठ भारत के स्वतन्त्रता-संग्राम से जुड़े खुदीराम के जीवन का संक्षिप्त वर्णन प्रस्तुत करता है। पाठ विशेष रूप से उनके अल्पायु में राष्ट्रीय आन्दोलन से जुड़ने, प्रशिक्षण प्राप्त करने और अन्ततः मृत्युदण्ड पाने तक की घटनाओं को बताता है।

पाठ के अनुसार खुदीराम का जन्म 3 दिसम्बर 1889 को बंगाल के मेदिनीपुर जनपद के मोहोबनी ग्राम में हुआ। उनके पिता का नाम त्रैलोक्यनाथ और माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी बताया गया है।

बाल्यावस्था में ही माता-पिता की मृत्यु हो जाने के बाद उनकी बड़ी बहन अपरूपा देवी ने उनका पालन-पोषण किया।

In simple English: The chapter presents Khudiram as a young person whose attention, from an early age, was drawn towards the political conditions around him rather than ordinary childhood interests.

2. शीर्षक का अर्थ

न खलु वयस्तेजसो हेतुः।

इसका सरल अर्थ है— तेज, साहस और दृढ़ निश्चय का कारण केवल आयु नहीं होती।

पाठ में खुदीराम के उदाहरण से यह दिखाया गया है कि किशोरावस्था में भी कोई व्यक्ति अपने विचारों और संकल्प के प्रति अत्यन्त दृढ़ हो सकता है।

English explanation: Courage is not automatically determined by age. A young person can also show exceptional determination and strength of purpose.

3. खुदीराम की जीवन-कथा

1 असाधारण बालक

पाठ के अनुसार खुदीराम सामान्य बालकों की तरह खेल-कूद में अधिक रुचि नहीं लेते थे। अपने आसपास लोगों पर होने वाले अत्याचारों को देखकर वे व्यथित होते थे।

धीरे-धीरे उनके मन में देश की स्वतन्त्रता के लिए कार्य करने की भावना प्रबल हुई।

2 1905 का बंग-भंग आन्दोलन

पाठ में बताया गया है कि तत्कालीन वायसराय कर्जन के शासनकाल में 1905 में बंगाल का विभाजन हुआ। इसके विरोध में व्यापक जन-आन्दोलन प्रारम्भ हुआ, जिसे बंग-भंग आन्दोलन कहा गया।

उस समय खुदीराम लगभग पन्द्रह वर्ष के थे। वे भी इस आन्दोलन की गतिविधियों में सम्मिलित हुए।

3 छात्र जीवन और जनजागरण

पाठ के अनुसार उनका मन राष्ट्रीय गतिविधियों में इतना लग गया कि वे नवमी कक्षा भी पूर्ण नहीं कर सके।

उन्होंने बालकों का संगठन किया, पदयात्राएँ आयोजित कीं और देशभक्ति से सम्बन्धित गीत तथा घोषणाएँ कीं।

वे लोक-जागरण से सम्बन्धित पत्रक भी लोगों में वितरित करते थे।

4 सत्येन्द्रनाथ से भेंट

खुदीराम अपने मित्र प्रफुल्ल के साथ एक गुप्त क्रान्तिकारी संगठन से जुड़े सत्येन्द्रनाथ से मिले।

शरीरं वज्रसदृशं दृढम्,
बुद्धिः असिधारा इव तीक्ष्णा,
मनः गङ्गाजलमिव निर्मलं च भवेत्।

सत्येन्द्रनाथ ने उन्हें समझाया कि किसी कठिन कार्य के लिए शरीर दृढ़, बुद्धि तीक्ष्ण और मन निर्मल होना चाहिए।

English idea: Physical strength alone is not enough. Discipline requires a sharp mind and a clear conscience as well.

5 प्रशिक्षण और प्रतिज्ञा

पाठ के अनुसार खुदीराम और प्रफुल्ल ने लगभग आठ महीने तक प्रशिक्षण प्राप्त किया और शस्त्र-संचालन में दक्ष हुए।

राणा प्रताप के चरित्र से प्रेरित होकर खुदीराम ने प्रतिज्ञा की कि जब तक भारत विदेशी शासन से मुक्त नहीं होगा, वे पादत्राण धारण नहीं करेंगे।

6 किङ्ग्ज़फोर्ड से सम्बन्धित योजना

पाठ में किङ्ग्ज़फोर्ड को ऐसा ब्रिटिश न्यायिक अधिकारी बताया गया है जो राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं को कठोर दण्ड देता था।

उसके मुज़फ्फरपुर स्थानान्तरण के बाद एक सशस्त्र क्रान्तिकारी समूह ने उस पर आक्रमण की योजना बनाई और इसका कार्य खुदीराम तथा प्रफुल्ल को दिया गया।

7 28 अप्रैल 1908 की घटना

पाठ के अनुसार 28 अप्रैल 1908 को दोनों ने किङ्ग्ज़फोर्ड से सम्बन्धित समझे गए एक रथ पर विस्फोटक फेंका।

परन्तु किङ्ग्ज़फोर्ड उस रथ में नहीं था। उस घटना में कैनेडी नामक अधिकारी की पत्नी और पुत्री की मृत्यु हुई।

Imp: पाठ स्वयं स्पष्ट करता है कि लक्ष्य किङ्ग्ज़फोर्ड था, लेकिन वह उस रथ में उपस्थित नहीं था।

8 गिरफ्तारी और प्रफुल्ल

घटना के बाद दोनों वहाँ से चले गए। पाठ के अनुसार ब्रिटिश पुलिस ने उनका पीछा किया।

प्रफुल्ल ने पकड़े जाने की स्थिति में स्वयं को गोली मार ली। खुदीराम को गिरफ्तार करके न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

9 न्यायालय और मृत्युदण्ड

पाठ में बताया गया है कि न्यायालय में खुदीराम बार-बार “वन्दे मातरम्” कहते रहे।

उन्हें मृत्युदण्ड सुनाया गया। पाठ के अनुसार 11 अगस्त 1908 को अल्पायु में ही उन्हें फाँसी दी गई।

4. घटनाक्रम

1889

जन्म

3 दिसम्बर को मेदिनीपुर जनपद के मोहोबनी ग्राम में जन्म।

1905

बंग-भंग आन्दोलन

लगभग पन्द्रह वर्ष की आयु में आन्दोलन से जुड़ना।

इसके बाद

संगठन एवं प्रशिक्षण

पदयात्राएँ, पत्रक-वितरण और गुप्त प्रशिक्षण।

28 April 1908

मुज़फ्फरपुर की घटना

किङ्ग्ज़फोर्ड को लक्ष्य मानकर रथ पर विस्फोटक फेंका गया।

1908

गिरफ्तारी और मुकदमा

खुदीराम को गिरफ्तार करके न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

11 August 1908

मृत्युदण्ड

पाठ के अनुसार इसी दिन उन्हें फाँसी दी गई।

5. पाठ की मुख्य विचारधारा

अन्याय का अनुभव → देश के प्रति चिन्ता → संगठन → प्रशिक्षण → दृढ़ संकल्प

पाठ का शीर्षक विशेष रूप से इस विचार को उभारता है कि दृढ़ता और साहस को केवल व्यक्ति की आयु से नहीं आँका जा सकता।

English explanation: The lesson uses Khudiram's youth to explore the idea that commitment and courage may appear even at a very young age.

6. व्याकरण — सन्धि

इत्यादयः = इति + आदयः
सर्वेऽपि = सर्वे + अपि
कश्चित् = कः + चित्
प्रत्येकम् = प्रति + एकम्
वयस्तेजसः = वयः + तेजसः
अचिरादेव = अचिरात् + एव

7. व्याकरण — समस्तपदानि

विग्रहःसमस्तपदम्
देशस्य भक्ताःदेशभक्ताः
बालः च क्रान्तिवीरः चबालक्रान्तिवीरः
वज्रेण सदृशम्वज्रसदृशम्
असेः धाराअसिधारा
मृत्युः एव दण्डःमृत्युदण्डः
न साधारणःअसाधारणः
निर्गता दया यस्मात् सःनिर्दयः

8. व्याकरण — भूतकाल के विभिन्न रूप

पाठ में भूतकाल व्यक्त करने के लिए लङ्-लकार, क्तवतु-प्रत्यय, स्म और क्त-प्रत्यय जैसे रूपों का प्रयोग हुआ है।

लङ्-लकार:
खदीरामः हुतात्मा अजायत।
क्तवतु:
सत्येन्द्रनाथः खदीरामम् उपदिष्टवान्।
स्म:
क्रान्तिवीराः आङ्ग्लानां मनसि आतङ्कं जनयन्ति स्म।

9. व्याकरण — “चित्” प्रत्यय

चित् के योग से अनिश्चितता का भाव प्रकट होता है।

मूल पदचित् सहितसरल अर्थ
कदाकदाचित्कभी
कस्यकस्यचित्किसी का
केनकेनचित्किसी के द्वारा
कुत्रकुत्रचित्कहीं
कतिकतिचित्कुछ
कःकश्चित्कोई पुरुष
काकाचित्कोई स्त्री
किम्किञ्चित्कुछ

10. अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर

अभ्यास 1 — पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत

(क) खदीरामस्य जन्म कुत्र अभवत्?
उत्तर: खदीरामस्य जन्म बङ्गप्रान्तस्य मेदिनीपुरजनपदे मोहोबनीग्रामे अभवत्।
(ख) खदीरामः किमर्थं व्यथितः भवति स्म?
उत्तर: देशवासिषु जायमानान् अत्याचारान् दृष्ट्वा खदीरामः व्यथितः भवति स्म।
(ग) सत्येन्द्रनाथः किम् उपदिष्टवान्?
उत्तर: सत्येन्द्रनाथः उपदिष्टवान् यत् क्रान्तिकार्यं कर्तुं शरीरं वज्रसदृशं दृढं, बुद्धिः असिधारा इव तीक्ष्णा, मनः गङ्गाजलमिव निर्मलं च भवेत्।
(घ) खदीरामः कदा पर्यन्तं पादत्राणं न धरिष्यामि इति प्रतिज्ञातवान्?
उत्तर: यावत् भारतम् आङ्ग्लशासनात् मुक्तं न भविष्यति तावत् पादत्राणं न धरिष्यामि इति खदीरामः प्रतिज्ञातवान्।
(ङ) किमर्थं न्यायाधीशः आङ्ग्लाः अधिकारिणः च चकिताः?
उत्तर: मृत्युदण्डस्य उद्घोषणानन्तरम् अपि खदीरामस्य मुखे भयं दुःखं वा नासीत्, प्रत्युत प्रसन्नता, शान्तिः, तृप्तिः तेजश्च आसीत्। अतः ते चकिताः अभवन्।

अभ्यास 2 — सत्यम् / असत्यम्

कथनम्उत्तरम्
देशभक्तानां जीवनं राष्ट्राय समर्पितं भवति।सत्यम्
निर्दयः किङ्ग्ज़फोर्ड् बालान् अपि दण्डयति स्म।सत्यम्
खदीरामस्य आक्रमणेन किङ्ग्ज़फोर्ड् मृतः।असत्यम्
खदीरामः किङ्ग्ज़फोर्ड् महोदयस्य रथस्य उपरि विस्फोटकं क्षिप्तवान्।सत्यम्
खदीरामः बालानां सङ्घटनं कृत्वा पदयात्राम् आयोजयति स्म।सत्यम्

अभ्यास 3 — संवत्सराणां मेलनं कुरुत

संस्कृत संख्यावर्ष
सप्तचत्वारिंशदधिक-नवदशशततमं वर्षम्1947
अष्टाधिक-नवदशशततमं वर्षम्1908
पञ्चाशदुत्तर-नवदशशततमं वर्षम्1950
पञ्चाधिक-नवदशशततमं वर्षम्1905
नवाशीत्यधिक-अष्टादशशततमं वर्षम्1889

अभ्यास 4 — चित्राधारित पञ्च वाक्यानि

चित्र के आधार पर सरल सम्भावित उत्तर:
  1. चित्रे सुन्दरम् उद्यानं दृश्यते।
  2. उद्याने बहवः वृक्षाः पुष्पाणि च सन्ति।
  3. आकाशे सूर्यः मेघाः पक्षिणश्च दृश्यन्ते।
  4. एकः बालकः द्विचक्रिकां चालयति।
  5. दूरे पर्वताः गृहाणि च दृश्यन्ते तथा उद्यानं स्वच्छम् अस्ति।

अभ्यास 5 — सन्धिच्छेदं कुरुत

पदम्सन्धिच्छेदः
इत्यादयःइति + आदयः
सर्वेऽपिसर्वे + अपि
कश्चित्कः + चित्
प्रत्येकम्प्रति + एकम्
वयस्तेजसःवयः + तेजसः
अचिरादेवअचिरात् + एव

अभ्यास 6 — विग्रहवाक्यस्य समस्तपदम्

विग्रहःउत्तरम्
देशस्य भक्ताःदेशभक्ताः
बालः च क्रान्तिवीरः चबालक्रान्तिवीरः
वज्रेण सदृशम्वज्रसदृशम्
असेः धाराअसिधारा
मृत्युः एव दण्डःमृत्युदण्डः
न साधारणःअसाधारणः
निर्गता दया यस्मात् सःनिर्दयः

अभ्यास 7 — भूतकालरूपे परिवर्तनम्

(क) वन्दे मातरम् इत्यादयः घोषणाः भवन्ति स्म। (लङ्-लकारः)
उत्तर: वन्दे मातरम् इत्यादयः घोषणाः अभवन्।
(ख) सत्येन्द्रनाथः खदीरामम् उपादिशत्। (क्तवतु-प्रत्ययः)
उत्तर: सत्येन्द्रनाथः खदीरामम् उपदिष्टवान्।
(ग) सः नवमीं कक्षां पूर्णां कर्तुं न शक्तवान्। (लङ्-लकारः)
उत्तर: सः नवमीं कक्षां पूर्णां कर्तुं न अशक्नोत्।
(घ) क्रान्तिवीराः आङ्ग्लानां मनसि आतङ्कम् अजनयन्। (स्म)
उत्तर: क्रान्तिवीराः आङ्ग्लानां मनसि आतङ्कं जनयन्ति स्म।
(ङ) प्रफुल्लः भुशुण्ड्या गोलिकाप्रहारं कृतवान्। (लङ्-लकारः)
उत्तर: प्रफुल्लः भुशुण्ड्या गोलिकाप्रहारम् अकरोत्।

अभ्यास 8 — चित्-प्रत्यययुक्त पदों का प्रयोग

(क) बालकः गच्छति।
उत्तर: कश्चित् बालकः गच्छति।
(ख) बालिका गच्छति।
उत्तर: काचित् बालिका गच्छति।
(ग) फलं खादतु।
उत्तर: किञ्चित् फलं खादतु।
(घ) लेखनी लुप्ता।
उत्तर: लेखनी कुत्रचित् लुप्ता।
(ङ) सः आगच्छेत्।
उत्तर: सः कदाचित् आगच्छेत्।

11. युगल अव्यय — अभ्यास एवं उत्तर

पाठ में निम्न युगल अव्ययों का प्रयोग दिया गया है:

यत् — इति यदा — तदा यावत् — तावत् यद्यपि — तथापि यः — सः
(क) सुभाषचन्द्रः वदति ___ भवन्तः मह्यं रुधिरं यच्छन्तु अहं भवद्भ्यः स्वातन्त्र्यं प्रयच्छामि ___।
उत्तर: सुभाषचन्द्रः वदति यत् भवन्तः मह्यं रुधिरं यच्छन्तु अहं भवद्भ्यः स्वातन्त्र्यं प्रयच्छामि इति।
(ख) ___ अर्जुनः भीष्मद्रोणादीन् अपश्यत् ___ शोकं प्राप्नोत्।
उत्तर: यदा अर्जुनः भीष्मद्रोणादीन् अपश्यत् तदा शोकं प्राप्नोत्।
(ग) श्रीरामः भरतम् उक्तवान् ___ जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ___।
उत्तर: श्रीरामः भरतम् उक्तवान् यत् जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी इति।
(घ) ___ भरतः अयोध्यां प्राप्तवान् ___ श्रीरामः तत्र नासीत्।
उत्तर: यदा भरतः अयोध्यां प्राप्तवान् तदा श्रीरामः तत्र नासीत्।
(ङ) ___ खदीरामाय मृत्युदण्डः उद्घोषितः ___ सः प्रसन्नवदनः आसीत्।
उत्तर: यद्यपि खदीरामाय मृत्युदण्डः उद्घोषितः तथापि सः प्रसन्नवदनः आसीत्।
(च) ___ वृष्टिः भवति ___ कृषकाः सन्तुष्टाः भवन्ति।
उत्तर: यदा वृष्टिः भवति तदा कृषकाः सन्तुष्टाः भवन्ति।
(छ) ___ खदीरामः बालः ___ सः देशकार्यं कृतवान्।
उत्तर: यद्यपि खदीरामः बालः तथापि सः देशकार्यं कृतवान्।
(ज) ___ कार्यं करोति ___ फलं प्राप्नोति।
उत्तर: यः कार्यं करोति सः फलं प्राप्नोति।
(झ) प्रफुल्ल-खदीरामाभ्यां ___ विस्फोटकं प्रक्षिप्तम् ___ किङ्ग्ज़फोर्डः न मृतः।
उत्तर: प्रफुल्ल-खदीरामाभ्यां यद्यपि विस्फोटकं प्रक्षिप्तम् तथापि किङ्ग्ज़फोर्डः न मृतः।
(ञ) ___ अध्ययनं सुदृढं भवति ___ ज्ञानं विकसितं भवति।
उत्तर: यावत् अध्ययनं सुदृढं भवति तावत् ज्ञानं विकसितं भवति।
(ट) ___ खदीरामः आङ्ग्लानां हस्तगतः ___ सः ततः बहिरागतः।
उत्तर: यदा खदीरामः आङ्ग्लानां हस्तगतः तदा सः ततः बहिरागतः।

12. Important Questions and Answers

प्रश्न 1. “न खलु वयस्तेजसो हेतुः” शीर्षक का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि साहस, दृढ़ निश्चय और आन्तरिक तेज केवल अधिक आयु से नहीं आते। कम आयु का व्यक्ति भी दृढ़ विचार और संकल्प रख सकता है।
प्रश्न 2. खुदीराम के बाल्यकाल की कौन-सी विशेषता पाठ में बताई गई है?
उत्तर: पाठ के अनुसार वे सामान्य खेल-कूद की अपेक्षा समाज और देश की परिस्थितियों की ओर अधिक ध्यान देते थे तथा लोगों पर होने वाले अत्याचारों से व्यथित होते थे।
प्रश्न 3. बंग-भंग आन्दोलन का खुदीराम पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: 1905 के बंगाल-विभाजन के विरोध में हुए आन्दोलन ने उनकी देश-सम्बन्धी सक्रियता को बढ़ाया और वे जन-आन्दोलन से जुड़ गए।
प्रश्न 4. खुदीराम जनजागरण के लिए क्या करते थे?
उत्तर: वे बालकों का संगठन करते, पदयात्राएँ आयोजित करते, देशभक्ति के गीत और घोषणाएँ करते तथा लोगों में पत्रक वितरित करते थे।
प्रश्न 5. सत्येन्द्रनाथ की शिक्षा का क्या आशय था?
उत्तर: उनका आशय था कि कठिन उद्देश्य के लिए केवल शारीरिक शक्ति पर्याप्त नहीं है। शरीर दृढ़, बुद्धि तीक्ष्ण और मन निर्मल होना चाहिए।
प्रश्न 6. खुदीराम ने कौन-सी प्रतिज्ञा की थी?
उत्तर: पाठ के अनुसार उन्होंने प्रतिज्ञा की कि भारत के विदेशी शासन से मुक्त होने तक वे पादत्राण धारण नहीं करेंगे।
प्रश्न 7. 28 अप्रैल 1908 की घटना में क्या हुआ?
उत्तर: पाठ के अनुसार खुदीराम और प्रफुल्ल ने किङ्ग्ज़फोर्ड को लक्ष्य मानकर एक रथ पर विस्फोटक फेंका, लेकिन किङ्ग्ज़फोर्ड उस रथ में नहीं था।
प्रश्न 8. किङ्ग्ज़फोर्ड उस घटना में क्यों नहीं मरा?
उत्तर: क्योंकि जिस रथ को लक्ष्य बनाया गया था उसमें उस समय किङ्ग्ज़फोर्ड उपस्थित नहीं था।
प्रश्न 9. मृत्युदण्ड सुनाए जाने पर पाठ में खुदीराम की स्थिति कैसी बताई गई है?
उत्तर: पाठ में कहा गया है कि उनके चेहरे पर भय या दुःख नहीं था, बल्कि प्रसन्नता, शान्ति, तृप्ति और तेज दिखाई दे रहा था।
प्रश्न 10. इस पाठ में आयु और संकल्प के बीच क्या सम्बन्ध दिखाया गया है?
उत्तर: पाठ यह दिखाता है कि कम आयु व्यक्ति के दृढ़ संकल्प, साहस या किसी उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता को आवश्यक रूप से सीमित नहीं करती।