मनःपूतं समाचरेत् Class 9 Notes and Answers

शारदा • कक्षा 9 • षष्ठः पाठः

मनःपूतं समाचरेत्

Eight Sanskrit subhāṣitas teaching pure intention, discipline, practice, perseverance, self-effort and thoughtful action.

मनःपूतम् Pure Intention विचारः Thought कर्म Action फलम् Result शुद्धं मनः → उचितं कर्म → श्रेष्ठं फलम्
Imp: सही काम करना पर्याप्त नहीं है। काम के पीछे का उद्देश्य और मन भी शुद्ध होना चाहिए।

1. पाठ का परिचय

पाठ की शुरुआत कक्षा में एक सरल प्रश्न से होती है— कोई कार्य करने से पहले क्या आवश्यक है?

विद्यार्थी अलग-अलग उत्तर देते हैं— सोचकर काम करना, उचित विधि से करना और पूरे मन से करना।

अध्यापिका आगे प्रश्न करती हैं कि यदि मन ही मलिन हो और उद्देश्य अनुचित हो, तो सही दिखाई देने वाला कार्य भी वास्तव में अच्छा कैसे हो सकता है?

In simple English: A good action needs more than correct technique. The intention behind the action should also be honest and pure.

2. Classroom Flow

कार्य से पहले विचार → उचित विधि → शुद्ध उद्देश्य → सदाचार

इसके बाद अध्यापिका विभिन्न ग्रन्थों से लिए गए सुभाषित पढ़ाती हैं। विद्यार्थी समझते हैं कि ये केवल याद करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में लागू करने के लिए हैं।

3. सुभाषितों की सरल व्याख्या

1
दृष्टिपूतं न्यसेत् पादं वस्त्रपूतं जलं पिबेत्।
सत्यपूतां वदेत् वाचं मनःपूतं समाचरेत्॥

चलने से पहले देखकर पाँव रखना चाहिए, छानकर शुद्ध किया हुआ जल पीना चाहिए, सत्य से शुद्ध वाणी बोलनी चाहिए और किसी भी कार्य को शुद्ध मन से करना चाहिए।

English idea: Be careful in action, pure in speech and sincere in intention.
Imp: यहाँ “मनःपूतम्” का अर्थ है— ऐसा कार्य जिसमें मन, उद्देश्य और भावना दूषित न हों।
2
धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः।
धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्॥

इस श्लोक में धर्म के दस लक्षण बताए गए हैं:

धृति क्षमा दम अस्तेय शौच इन्द्रियनिग्रह धी विद्या सत्य अक्रोध

अर्थात् धैर्य, क्षमा, आत्मसंयम, चोरी न करना, पवित्रता, इन्द्रियों का नियन्त्रण, बुद्धि, ज्ञान, सत्य और क्रोध से बचना अच्छे जीवन के गुण हैं।

English idea: Good character is built from self-control, truth, patience, knowledge and freedom from unnecessary anger.
3
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥

समाज में श्रेष्ठ और प्रभावशाली लोगों का व्यवहार अन्य लोग भी अपनाते हैं। जो व्यक्ति उदाहरण प्रस्तुत करता है, समाज प्रायः उसी का अनुसरण करता है।

English idea: Leadership is powerful because people often imitate the conduct of those they respect.
4
अभ्यासेन क्रियाः सर्वाः अभ्यासात् सकलाः कलाः।
अभ्यासाद् ध्यानमौनादि किमभ्यासस्य दुष्करम्॥

निरन्तर अभ्यास से अनेक कार्य, कलाएँ और कठिन साधनाएँ भी सम्भव हो जाती हैं।

प्रारम्भ → अभ्यास → सुधार → कौशल
English idea: Skill is developed through repeated practice, not through one attempt.
5
प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः
प्रारभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः।
विघ्नैः पुनः पुनरपि प्रतिहन्यमानाः
प्रारभ्य चोत्तमजनाः न परित्यजन्ति॥

निम्न मनोबल वाले लोग बाधा के डर से कार्य शुरू ही नहीं करते। सामान्य लोग कार्य शुरू करते हैं, पर बाधा आने पर छोड़ देते हैं।

श्रेष्ठ लोग बार-बार बाधाएँ आने पर भी अपने अच्छे उद्देश्य को नहीं छोड़ते।

English idea: Perseverance means continuing a worthwhile task even when difficulties repeatedly appear.
Imp: महानता केवल कार्य शुरू करने में नहीं, बल्कि कठिनाइयों के बीच उसे पूरा करने में है।
6
उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः
दैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति।
दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या
यत्ने कृते यदि न सिध्यति कोऽत्र दोषः॥

सफलता प्रयत्नशील और पराक्रमी व्यक्ति के पास आती है। केवल भाग्य के भरोसे बैठना उचित नहीं है।

मनुष्य को अपनी क्षमता के अनुसार पूर्ण प्रयत्न करना चाहिए। पूरा प्रयास करने पर भी कार्य सफल न हो, तो व्यक्ति ने अपना कर्तव्य कर दिया।

English idea: Do not use luck as an excuse for inaction. First make an honest and complete effort.
7
पुराणमित्येव न साधु सर्वं
न चापि काव्यं नवमित्यवद्यम्।
सन्तः परीक्ष्यान्यतरद्भजन्ते
मूढः परप्रत्ययनेयबुद्धिः॥

केवल इसलिए कि कोई वस्तु या विचार पुराना है, वह स्वतः अच्छा नहीं हो जाता। इसी प्रकार केवल नया होने के कारण कोई विचार खराब भी नहीं होता।

विवेकी व्यक्ति परीक्षा और विचार के बाद अच्छा विकल्प स्वीकार करता है। मूर्ख व्यक्ति दूसरों की राय से बिना विचार किए प्रभावित हो जाता है।

English idea: Do not judge something merely because it is old or new. Examine it carefully and decide for yourself.
8
सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्।
वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः॥

बिना सोचे अचानक कोई बड़ा कार्य नहीं करना चाहिए। अविवेक अनेक समस्याओं का कारण बन सकता है।

जो व्यक्ति विचारपूर्वक कार्य करता है, उसके गुणों से प्रभावित होकर सफलता और समृद्धि स्वयं उसकी ओर आकर्षित होती हैं।

English idea: Thoughtful action reduces avoidable mistakes. Pause, examine and then act.

4. पाठ में बताए गए जीवन-मूल्य

सदाचार Right Conduct शुद्ध मन सत्य अभ्यास धैर्य विवेक पुरुषार्थ

5. सुभाषितों के स्रोत ग्रन्थ

ग्रन्थभारतीय ज्ञान-परम्परा में स्थानग्रन्थकर्ता
रामायणम्ऐतिहासिक काव्यम्महर्षिः वाल्मीकिः
मनुस्मृतिःधर्मशास्त्रीयग्रन्थःमनुः
श्रीमद्भगवद्गीताज्ञानोपदेशःमहर्षिः व्यासः
हठयोगप्रदीपिकायोग-दर्शनम्स्वात्मारामः
नीतिशतकम्नीति-साहित्यम्भर्तृहरिः
पञ्चतन्त्रम्कथा-साहित्यम्विष्णुशर्मा
मालविकाग्निमित्रम्रूपकम्कालिदासः
किरातार्जुनीयम्महाकाव्यम्भारविः

6. अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर

अभ्यास 1 — पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत

(क) लोकः कस्य आचरणम् अनुकरोति?
उत्तर: लोकः श्रेष्ठजनस्य आचरणम् अनुकरोति।
(ख) कीदृशी वाणी वक्तव्या?
उत्तर: सत्यपूता वाणी वक्तव्या।
(ग) लक्ष्मीः कम् उपैति?
उत्तर: लक्ष्मीः उद्योगिनं पुरुषसिंहम् उपैति।
(घ) उत्तमजनाः कार्यं प्रारभ्य किं न कुर्वन्ति?
उत्तर: उत्तमजनाः कार्यं प्रारभ्य तत् न परित्यजन्ति।
(ङ) धर्मस्य लक्षणानि कानि?
उत्तर: धृतिः, क्षमा, दमः, अस्तेयम्, शौचम्, इन्द्रियनिग्रहः, धीः, विद्या, सत्यम् तथा अक्रोधः धर्मस्य दश लक्षणानि सन्ति।
(च) सकलाः कलाः कस्मात् सिध्यन्ति?
उत्तर: सकलाः कलाः अभ्यासात् सिध्यन्ति।
(छ) सम्पदः कं वृणते?
उत्तर: सम्पदः विमृश्यकारिणं वृणते।

अभ्यास 2 — श्लोकांशेषु रिक्तस्थानानि पूरयत

(क) ______ परमापदां पदम्।
उत्तर: अविवेकः परमापदां पदम्।
(ख) सन्तः ______ अन्यतरद् भजन्ते।
उत्तर: सन्तः परीक्ष्य अन्यतरद् भजन्ते।
(ग) दैवं निहत्य कुरु ______ आत्मशक्त्या।
उत्तर: दैवं निहत्य कुरु पौरुषम् आत्मशक्त्या।
(घ) स यत् ______ कुरुते।
उत्तर: स यत् प्रमाणम् कुरुते।
(ङ) धीर्विद्या सत्यमक्रोधो ______ धर्मलक्षणम्।
उत्तर: धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्।

अभ्यास 3 — रेखाङ्कितपदाधारित प्रश्ननिर्माणम्

(क) नीचैः विघ्नभयेन कार्यं न प्रारभ्यते।
उत्तर: नीचैः केन कार्यं न प्रारभ्यते?
(ख) सकलाः कलाः अभ्यासात् सिध्यन्ति।
उत्तर: सकलाः कलाः कस्मात् सिध्यन्ति?
(ग) वस्त्रपूतं जलं पिबेत्।
उत्तर: कीदृशं जलं पिबेत्?
(घ) लक्ष्मीः पुरुषसिंहम् उपैति।
उत्तर: लक्ष्मीः कम् उपैति?
(ङ) सन्तः परीक्ष्य अन्यतरद् भजन्ते।
उत्तर: के परीक्ष्य अन्यतरद् भजन्ते?
(च) क्रियां सहसा न विदधीत।
उत्तर: क्रियां कथं न विदधीत?

अभ्यास 4 — श्लोकाधारित प्रश्नोत्तर

श्लोक — दृष्टिपूतं न्यसेत् पादं वस्त्रपूतं जलं पिबेत्। सत्यपूतां वदेत् वाचं मनःपूतं समाचरेत्॥
(क) अस्मिन् श्लोके प्रथमं क्रियापदं किम्?
उत्तर: न्यसेत्।
(ख) कं न्यसेत्?
उत्तर: पादं न्यसेत्।
(ग) कीदृशं पादं न्यसेत्?
उत्तर: दृष्टिपूतं पादं न्यसेत्।
(घ) द्वितीयं किं क्रियापदम् अस्ति?
उत्तर: पिबेत्।
(ङ) किं पिबेत्?
उत्तर: जलं पिबेत्।
(च) कीदृशं जलं पिबेत्?
उत्तर: वस्त्रपूतं जलं पिबेत्।
(छ) तृतीयं किं क्रियापदम् अस्ति?
उत्तर: वदेत्।
(ज) कां वदेत्?
उत्तर: वाचं वदेत्।
(झ) कीदृशीं वाणीं वदेत्?
उत्तर: सत्यपूतां वाणीं वदेत्।
(ञ) चतुर्थं किं क्रियापदम् अस्ति?
उत्तर: समाचरेत्।
(ट) कथं समाचरेत्?
उत्तर: मनःपूतं समाचरेत्।

अभ्यास 5 — भावार्थेषु रिक्तस्थानानि पूरयत

मञ्जूषा — बुद्धिः, लक्ष्यं, पुरुषस्य, अभिप्रायं, धीराः, नूतनम्
(क) लक्ष्मीः प्रयत्नशीलस्य पराक्रमिणः ______ समीपं स्वयम् आगच्छति।
उत्तर: पुरुषस्य
ये पौरुषेण परिस्थितिम् अतिक्रम्य कार्याणि साधयन्ति ते एव ______।
उत्तर: धीराः
प्रयत्नं कृत्वा अपि यदि ______ न प्राप्तं तर्हि तत्र दोषः नास्ति।
उत्तर: लक्ष्यं
(ख) तथैव ______ अस्ति इति कारणेन दोषरहितं भवेत् इत्यपि नियमः नास्ति।
उत्तर: नूतनम्
येषां ______ पक्वा अस्ति ते परीक्षण-निरीक्षणानन्तरम् उत्तमं स्वीकुर्वन्ति।
उत्तर: बुद्धिः
अज्ञानाः अन्येषाम् ______ श्रुत्वा तदनुसारेण प्रवर्तन्ते।
उत्तर: अभिप्रायं

अभ्यास 6 — श्लोकानाम् अन्वयेषु रिक्तस्थानानि

(क) सर्वाः ______ अभ्यासेन सिध्यन्ति।
उत्तर: क्रियाः
______ कलाः अभ्यासात् सिध्यन्ति।
उत्तर: सकलाः
ध्यानमौनादि अपि ______ सिध्यति।
उत्तर: अभ्यासात्
अभ्यासस्य ______ किम् अस्ति?
उत्तर: दुष्करम्
(ख) श्रेष्ठः यत् यत् ______ इतरः जनः तत्तत् एव आचरति।
उत्तर: आचरति
सः यत् ______ कुरुते।
उत्तर: प्रमाणम्
लोकः तत् ______।
उत्तर: अनुवर्तते

अभ्यास 7 — श्लोकांशस्य स्रोतोग्रन्थेन मेलनम्

श्लोकांशःस्रोतोग्रन्थः
पुराणमित्येव न साधु सर्वम्मालविकाग्निमित्रम्
प्रारभ्य चोत्तमजनाः न परित्यजन्तिनीतिशतकम्
यद्यदाचरति श्रेष्ठःश्रीमद्भगवद्गीता
धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयम्मनुस्मृतिः
उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीःपञ्चतन्त्रम्

अभ्यास 8 — सन्धिविच्छेदः

पदम्सन्धिविच्छेदः
दमोऽस्तेयम्दमः + अस्तेयम्
पुराणमित्येवपुराणम् + इति + एव
पुनरपिपुनः + अपि
चोत्तमजनाःच + उत्तमजनाः
विघ्नविहताःविघ्न + विहताः
लोकस्तदनुवर्ततेलोकः + तत् + अनुवर्तते
परीक्ष्यान्यतरद्भजन्तेपरीक्ष्य + अन्यतरत् + भजन्ते

अभ्यास 9 — विग्रहवाक्येभ्यः समस्तपदानि

विग्रहवाक्यम्समस्तपदम्
मनसा पूतं समाचरेत्मनःपूतम्
विघ्नैः विहताःविघ्नविहताः
वस्त्रेण पूतं जलम्वस्त्रपूतम्
पुरुषः सिंहः इवपुरुषसिंहम्
उत्तमाः जनाःउत्तमजनाः
न विवेकःअविवेकः

7. Important Questions and Answers

प्रश्न 1. “मनःपूतं समाचरेत्” का क्या अर्थ है?
उत्तर: प्रत्येक कार्य शुद्ध मन, उचित भावना और अच्छे उद्देश्य से करना चाहिए।
प्रश्न 2. केवल सही तरीके से कार्य करना पर्याप्त क्यों नहीं है?
उत्तर: यदि कार्य का उद्देश्य गलत हो या मन दूषित हो, तो बाहरी रूप से सही दिखाई देने वाला कार्य भी श्रेष्ठ नहीं माना जा सकता।
प्रश्न 3. धर्म के दस लक्षण कौन-से हैं?
उत्तर: धृति, क्षमा, दम, अस्तेय, शौच, इन्द्रियनिग्रह, धी, विद्या, सत्य और अक्रोध।
प्रश्न 4. श्रेष्ठ लोगों के आचरण का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: समाज के लोग प्रायः प्रभावशाली और श्रेष्ठ व्यक्तियों के व्यवहार का अनुसरण करते हैं। इसलिए नेतृत्व करने वाले व्यक्ति का आचरण जिम्मेदार होना चाहिए।
प्रश्न 5. अभ्यास का क्या महत्व है?
उत्तर: निरन्तर अभ्यास से कठिन कार्य सरल होते हैं, कौशल विकसित होता है और व्यक्ति धीरे-धीरे दक्ष बनता है।
प्रश्न 6. उत्तम व्यक्ति और मध्यम व्यक्ति में क्या अन्तर बताया गया है?
उत्तर: मध्यम व्यक्ति बाधा आने पर काम छोड़ सकता है, जबकि उत्तम व्यक्ति बार-बार कठिनाई आने पर भी उचित कार्य को नहीं छोड़ता।
प्रश्न 7. भाग्य और पुरुषार्थ के विषय में पाठ क्या सिखाता है?
उत्तर: केवल भाग्य की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार पूरा प्रयास करना चाहिए।
प्रश्न 8. पुराने और नए विचारों के विषय में सुभाषित क्या सिखाता है?
उत्तर: केवल पुराना होने से कोई विचार अच्छा नहीं हो जाता और केवल नया होने से वह खराब नहीं हो जाता। विचारपूर्वक परीक्षण के बाद उचित बात स्वीकार करनी चाहिए।
प्रश्न 9. अविवेक को “परमापदां पदम्” क्यों कहा गया है?
उत्तर: बिना सोचे किया गया कार्य बड़ी समस्याओं और हानि का कारण बन सकता है। इसलिए कार्य से पहले विचार आवश्यक है।
प्रश्न 10. इस पाठ में आदर्श जीवन के कौन-से गुण प्रमुख हैं?
उत्तर: शुद्ध मन, सत्य वाणी, आत्मसंयम, अभ्यास, धैर्य, परिश्रम, विवेक और कठिनाइयों में भी दृढ़ बने रहना इस पाठ के प्रमुख जीवन-मूल्य हैं।