न खलु वयस्तेजसो हेतुः
A biographical lesson based on Khudiram Bose, focusing on courage, determination, discipline and participation in India's freedom struggle at a young age.
Table of Contents
Toggle1. पाठ का परिचय
यह पाठ भारत के स्वतन्त्रता-संग्राम से जुड़े खुदीराम के जीवन का संक्षिप्त वर्णन प्रस्तुत करता है। पाठ विशेष रूप से उनके अल्पायु में राष्ट्रीय आन्दोलन से जुड़ने, प्रशिक्षण प्राप्त करने और अन्ततः मृत्युदण्ड पाने तक की घटनाओं को बताता है।
पाठ के अनुसार खुदीराम का जन्म 3 दिसम्बर 1889 को बंगाल के मेदिनीपुर जनपद के मोहोबनी ग्राम में हुआ। उनके पिता का नाम त्रैलोक्यनाथ और माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी बताया गया है।
बाल्यावस्था में ही माता-पिता की मृत्यु हो जाने के बाद उनकी बड़ी बहन अपरूपा देवी ने उनका पालन-पोषण किया।
2. शीर्षक का अर्थ
इसका सरल अर्थ है— तेज, साहस और दृढ़ निश्चय का कारण केवल आयु नहीं होती।
पाठ में खुदीराम के उदाहरण से यह दिखाया गया है कि किशोरावस्था में भी कोई व्यक्ति अपने विचारों और संकल्प के प्रति अत्यन्त दृढ़ हो सकता है।
3. खुदीराम की जीवन-कथा
1 असाधारण बालक
पाठ के अनुसार खुदीराम सामान्य बालकों की तरह खेल-कूद में अधिक रुचि नहीं लेते थे। अपने आसपास लोगों पर होने वाले अत्याचारों को देखकर वे व्यथित होते थे।
धीरे-धीरे उनके मन में देश की स्वतन्त्रता के लिए कार्य करने की भावना प्रबल हुई।
2 1905 का बंग-भंग आन्दोलन
पाठ में बताया गया है कि तत्कालीन वायसराय कर्जन के शासनकाल में 1905 में बंगाल का विभाजन हुआ। इसके विरोध में व्यापक जन-आन्दोलन प्रारम्भ हुआ, जिसे बंग-भंग आन्दोलन कहा गया।
उस समय खुदीराम लगभग पन्द्रह वर्ष के थे। वे भी इस आन्दोलन की गतिविधियों में सम्मिलित हुए।
3 छात्र जीवन और जनजागरण
पाठ के अनुसार उनका मन राष्ट्रीय गतिविधियों में इतना लग गया कि वे नवमी कक्षा भी पूर्ण नहीं कर सके।
उन्होंने बालकों का संगठन किया, पदयात्राएँ आयोजित कीं और देशभक्ति से सम्बन्धित गीत तथा घोषणाएँ कीं।
वे लोक-जागरण से सम्बन्धित पत्रक भी लोगों में वितरित करते थे।
4 सत्येन्द्रनाथ से भेंट
खुदीराम अपने मित्र प्रफुल्ल के साथ एक गुप्त क्रान्तिकारी संगठन से जुड़े सत्येन्द्रनाथ से मिले।
बुद्धिः असिधारा इव तीक्ष्णा,
मनः गङ्गाजलमिव निर्मलं च भवेत्।
सत्येन्द्रनाथ ने उन्हें समझाया कि किसी कठिन कार्य के लिए शरीर दृढ़, बुद्धि तीक्ष्ण और मन निर्मल होना चाहिए।
5 प्रशिक्षण और प्रतिज्ञा
पाठ के अनुसार खुदीराम और प्रफुल्ल ने लगभग आठ महीने तक प्रशिक्षण प्राप्त किया और शस्त्र-संचालन में दक्ष हुए।
राणा प्रताप के चरित्र से प्रेरित होकर खुदीराम ने प्रतिज्ञा की कि जब तक भारत विदेशी शासन से मुक्त नहीं होगा, वे पादत्राण धारण नहीं करेंगे।
6 किङ्ग्ज़फोर्ड से सम्बन्धित योजना
पाठ में किङ्ग्ज़फोर्ड को ऐसा ब्रिटिश न्यायिक अधिकारी बताया गया है जो राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं को कठोर दण्ड देता था।
उसके मुज़फ्फरपुर स्थानान्तरण के बाद एक सशस्त्र क्रान्तिकारी समूह ने उस पर आक्रमण की योजना बनाई और इसका कार्य खुदीराम तथा प्रफुल्ल को दिया गया।
7 28 अप्रैल 1908 की घटना
पाठ के अनुसार 28 अप्रैल 1908 को दोनों ने किङ्ग्ज़फोर्ड से सम्बन्धित समझे गए एक रथ पर विस्फोटक फेंका।
परन्तु किङ्ग्ज़फोर्ड उस रथ में नहीं था। उस घटना में कैनेडी नामक अधिकारी की पत्नी और पुत्री की मृत्यु हुई।
8 गिरफ्तारी और प्रफुल्ल
घटना के बाद दोनों वहाँ से चले गए। पाठ के अनुसार ब्रिटिश पुलिस ने उनका पीछा किया।
प्रफुल्ल ने पकड़े जाने की स्थिति में स्वयं को गोली मार ली। खुदीराम को गिरफ्तार करके न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
9 न्यायालय और मृत्युदण्ड
पाठ में बताया गया है कि न्यायालय में खुदीराम बार-बार “वन्दे मातरम्” कहते रहे।
उन्हें मृत्युदण्ड सुनाया गया। पाठ के अनुसार 11 अगस्त 1908 को अल्पायु में ही उन्हें फाँसी दी गई।
4. घटनाक्रम
जन्म
3 दिसम्बर को मेदिनीपुर जनपद के मोहोबनी ग्राम में जन्म।
बंग-भंग आन्दोलन
लगभग पन्द्रह वर्ष की आयु में आन्दोलन से जुड़ना।
संगठन एवं प्रशिक्षण
पदयात्राएँ, पत्रक-वितरण और गुप्त प्रशिक्षण।
मुज़फ्फरपुर की घटना
किङ्ग्ज़फोर्ड को लक्ष्य मानकर रथ पर विस्फोटक फेंका गया।
गिरफ्तारी और मुकदमा
खुदीराम को गिरफ्तार करके न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
मृत्युदण्ड
पाठ के अनुसार इसी दिन उन्हें फाँसी दी गई।
5. पाठ की मुख्य विचारधारा
पाठ का शीर्षक विशेष रूप से इस विचार को उभारता है कि दृढ़ता और साहस को केवल व्यक्ति की आयु से नहीं आँका जा सकता।
6. व्याकरण — सन्धि
7. व्याकरण — समस्तपदानि
| विग्रहः | समस्तपदम् |
|---|---|
| देशस्य भक्ताः | देशभक्ताः |
| बालः च क्रान्तिवीरः च | बालक्रान्तिवीरः |
| वज्रेण सदृशम् | वज्रसदृशम् |
| असेः धारा | असिधारा |
| मृत्युः एव दण्डः | मृत्युदण्डः |
| न साधारणः | असाधारणः |
| निर्गता दया यस्मात् सः | निर्दयः |
8. व्याकरण — भूतकाल के विभिन्न रूप
पाठ में भूतकाल व्यक्त करने के लिए लङ्-लकार, क्तवतु-प्रत्यय, स्म और क्त-प्रत्यय जैसे रूपों का प्रयोग हुआ है।
खदीरामः हुतात्मा अजायत।
सत्येन्द्रनाथः खदीरामम् उपदिष्टवान्।
क्रान्तिवीराः आङ्ग्लानां मनसि आतङ्कं जनयन्ति स्म।
9. व्याकरण — “चित्” प्रत्यय
चित् के योग से अनिश्चितता का भाव प्रकट होता है।
| मूल पद | चित् सहित | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| कदा | कदाचित् | कभी |
| कस्य | कस्यचित् | किसी का |
| केन | केनचित् | किसी के द्वारा |
| कुत्र | कुत्रचित् | कहीं |
| कति | कतिचित् | कुछ |
| कः | कश्चित् | कोई पुरुष |
| का | काचित् | कोई स्त्री |
| किम् | किञ्चित् | कुछ |
10. अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर
अभ्यास 1 — पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत
अभ्यास 2 — सत्यम् / असत्यम्
| कथनम् | उत्तरम् |
|---|---|
| देशभक्तानां जीवनं राष्ट्राय समर्पितं भवति। | सत्यम् |
| निर्दयः किङ्ग्ज़फोर्ड् बालान् अपि दण्डयति स्म। | सत्यम् |
| खदीरामस्य आक्रमणेन किङ्ग्ज़फोर्ड् मृतः। | असत्यम् |
| खदीरामः किङ्ग्ज़फोर्ड् महोदयस्य रथस्य उपरि विस्फोटकं क्षिप्तवान्। | सत्यम् |
| खदीरामः बालानां सङ्घटनं कृत्वा पदयात्राम् आयोजयति स्म। | सत्यम् |
अभ्यास 3 — संवत्सराणां मेलनं कुरुत
| संस्कृत संख्या | वर्ष |
|---|---|
| सप्तचत्वारिंशदधिक-नवदशशततमं वर्षम् | 1947 |
| अष्टाधिक-नवदशशततमं वर्षम् | 1908 |
| पञ्चाशदुत्तर-नवदशशततमं वर्षम् | 1950 |
| पञ्चाधिक-नवदशशततमं वर्षम् | 1905 |
| नवाशीत्यधिक-अष्टादशशततमं वर्षम् | 1889 |
अभ्यास 4 — चित्राधारित पञ्च वाक्यानि
- चित्रे सुन्दरम् उद्यानं दृश्यते।
- उद्याने बहवः वृक्षाः पुष्पाणि च सन्ति।
- आकाशे सूर्यः मेघाः पक्षिणश्च दृश्यन्ते।
- एकः बालकः द्विचक्रिकां चालयति।
- दूरे पर्वताः गृहाणि च दृश्यन्ते तथा उद्यानं स्वच्छम् अस्ति।
अभ्यास 5 — सन्धिच्छेदं कुरुत
| पदम् | सन्धिच्छेदः |
|---|---|
| इत्यादयः | इति + आदयः |
| सर्वेऽपि | सर्वे + अपि |
| कश्चित् | कः + चित् |
| प्रत्येकम् | प्रति + एकम् |
| वयस्तेजसः | वयः + तेजसः |
| अचिरादेव | अचिरात् + एव |
अभ्यास 6 — विग्रहवाक्यस्य समस्तपदम्
| विग्रहः | उत्तरम् |
|---|---|
| देशस्य भक्ताः | देशभक्ताः |
| बालः च क्रान्तिवीरः च | बालक्रान्तिवीरः |
| वज्रेण सदृशम् | वज्रसदृशम् |
| असेः धारा | असिधारा |
| मृत्युः एव दण्डः | मृत्युदण्डः |
| न साधारणः | असाधारणः |
| निर्गता दया यस्मात् सः | निर्दयः |
अभ्यास 7 — भूतकालरूपे परिवर्तनम्
अभ्यास 8 — चित्-प्रत्यययुक्त पदों का प्रयोग
11. युगल अव्यय — अभ्यास एवं उत्तर
पाठ में निम्न युगल अव्ययों का प्रयोग दिया गया है:
