उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञःतथापायं च चिन्तयेत् Class 9 Notes and Answers

शारदा • कक्षा 9 • सप्तमः पाठः

उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञः
तथापायं च चिन्तयेत्

A Panchatantra story about wisdom, honesty, foresight, greed and the importance of thinking about both a plan and its possible danger.

प्राज्ञः Wise Person उपायः Plan / Solution अपायः Risk / Danger योजना के साथ सम्भावित परिणाम भी सोचें
Imp: बुद्धिमान व्यक्ति केवल यह नहीं सोचता कि “मेरी योजना कैसे सफल होगी?” वह यह भी सोचता है कि “इस योजना से कौन-सा संकट उत्पन्न हो सकता है?”

1. पाठ का परिचय

पाठ की शुरुआत एक बालक और उसकी माता के संवाद से होती है। बालक को मार्ग में किसी का गिरा हुआ धन मिलता है और वह उससे खिलौने खरीदना चाहता है।

माता उसे समझाती है कि वह धन किसी अन्य व्यक्ति के परिश्रम से अर्जित हुआ है, इसलिए उसे उसके वास्तविक स्वामी को लौटाना चाहिए।

अन्यस्य धनं तृणम् इव गणनीयम्।

अर्थात् दूसरे के धन में लालच नहीं करना चाहिए। इसे अपने लिए मूल्यवान सम्पत्ति न मानकर तृण के समान समझना चाहिए।

इसी बात को समझाने के लिए माता पञ्चतन्त्र की धर्मबुद्धि और पापबुद्धि की कथा सुनाती है।

In simple English: Something belonging to another person should never become an opportunity for personal gain. Honesty begins when nobody is forcing us to be honest.

2. पञ्चतन्त्रम्

पञ्चतन्त्र नीति-शिक्षा देने वाली रोचक कथाओं का प्रसिद्ध संग्रह है। पाठ में इसके रचयिता विष्णुशर्मा बताए गए हैं।

पशु-पक्षियों तथा मनुष्यों की कथाओं के माध्यम से नीति के गहरे सिद्धान्त सरल रूप में समझाए जाते हैं।

पञ्चतन्त्र के पाँच तन्त्र हैं:

मित्रभेदः मित्रसम्प्राप्तिः काकोलूकीयम् लब्धप्रणाशः अपरीक्षितकारकम्
प्रस्तुत धर्मबुद्धि–पापबुद्धि कथा प्रथम तन्त्र मित्रभेदः से ली गई है।

3. धर्मबुद्धि और पापबुद्धि की कथा

1 दो मित्र

किसी देश में धर्मबुद्धि और पापबुद्धि नामक दो मित्र रहते थे। उनके नाम ही उनके स्वभाव का संकेत देते हैं।

पापबुद्धि दरिद्र था और उसके मन में छल की भावना थी। उसने सोचा कि धर्मबुद्धि को साथ लेकर दूसरे देश जाएगा, उसके सहारे धन कमाएगा और अवसर मिलने पर उसे भी धोखा देगा।

Character contrast: Dharmabuddhi represents honesty and right conduct, while Pāpabuddhi represents greed and deceit.

2 देशान्तर जाने की योजना

पापबुद्धि धर्मबुद्धि को यात्रा के लाभ समझाता है। वह कहता है कि जिसने विभिन्न देशों की भाषा, वेशभूषा और संस्कृति नहीं देखी, उसका जीवन-अनुभव अधूरा रहता है।

विद्यां वित्तं शिल्पं तावन्नाप्नोति मानवः सम्यक्।
यावद् व्रजति न भूमौ देशाद्देशान्तरं हृष्टः॥

दोनों गुरुजनों की अनुमति लेकर शुभ दिन में देशान्तर जाते हैं और वहाँ पर्याप्त धन अर्जित करते हैं।

3 अर्जित धन को जंगल में छिपाना

वर्षों बाद दोनों अपने गाँव लौटने का निर्णय करते हैं। गाँव के निकट पहुँचकर पापबुद्धि सुझाव देता है कि पूरा धन घर ले जाना उचित नहीं है।

दोनों गहन वन में भूमि खोदकर अधिकांश धन वहाँ छिपा देते हैं और थोड़ी राशि लेकर अपने घर चले जाते हैं।

4 पापबुद्धि की चोरी

उसी रात पापबुद्धि अकेला वन में जाता है। वह गड्ढे से पूरा धन निकाल लेता है, गड्ढा भर देता है और अपने घर लौट आता है।

Imp: यहाँ कथा दिखाती है कि गलत उद्देश्य से बनाई गई योजना अन्ततः और बड़े छल की ओर ले जाती है।

5 चोरी का आरोप धर्मबुद्धि पर

कुछ दिनों बाद पापबुद्धि धन की आवश्यकता का बहाना बनाकर धर्मबुद्धि को जंगल ले जाता है।

गड्ढा खोदने पर उन्हें खाली पात्र मिलता है। तब पापबुद्धि स्वयं चोरी करने के बाद भी धर्मबुद्धि पर धन चुराने का आरोप लगा देता है।

धर्मबुद्धि उसका आरोप अस्वीकार करता है और कहता है:

मातृवत्परदारेषु परद्रव्येषु लोष्ठवत्।
आत्मवत्सर्वभूतेषु वीक्षन्ते धर्मबुद्धयः॥
English explanation: A person of good character respects others, does not desire another person's wealth, and treats living beings with the same concern as oneself.

6 न्यायाधिकारी के पास विवाद

दोनों न्यायाधिकारी के पास जाते हैं। प्रत्यक्ष मानव-साक्षी उपलब्ध न होने के कारण न्यायाधिकारी कहता है कि वे अगले दिन वन में जाएँगे और वनदेवता से सत्य का निर्णय कराया जाएगा।

7 पापबुद्धि की नई चाल

पापबुद्धि घर लौटकर अपने पिता को सारी योजना बताता है। वह पिता से कहता है कि वन में एक बड़ी शमी के वृक्ष का खोखला भाग है।

पिता को उसमें छिपकर अगले दिन यह कहना है कि धन धर्मबुद्धि ने चुराया है।

पापबुद्धि ने उपाय तो सोच लिया, पर उस उपाय के अपाय को नहीं सोचा।

8 वृक्ष से झूठी साक्षी

अगले दिन धर्मबुद्धि, पापबुद्धि, न्यायाधिकारी और अन्य लोग वृक्ष के पास पहुँचते हैं।

पापबुद्धि वनदेवता से पूछता है कि दोनों में चोर कौन है। वृक्ष के कोटर में छिपा उसका पिता उत्तर देता है— “धर्मबुद्धि ने धन चुराया है।”

उपस्थित लोग इसे दिव्य साक्षी समझकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं।

9 धर्मबुद्धि की बुद्धिमत्ता

धर्मबुद्धि समझ जाता है कि यह सामान्य घटना नहीं है। वह वृक्ष के कोटर के चारों ओर जलने योग्य सामग्री रखकर अग्नि प्रज्वलित करता है।

अग्नि से पीड़ित होकर पापबुद्धि का पिता बाहर निकलता है। वह सबके सामने स्वीकार करता है कि यह पूरी योजना पापबुद्धि की थी।

10 सत्य की विजय

न्यायाधिकारी पापबुद्धि को दोषी घोषित करता है। राजपुरुष उसे नियमानुसार दण्डित करते हैं और धर्मबुद्धि की प्रशंसा करते हैं।

पापबुद्धि की अविवेकी चाल के कारण उसके पिता को भी प्राण गँवाने पड़े। इसलिए कथा के अन्त में कहा गया है—

उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्।

4. कहानी का दृश्यात्मक क्रम

धर्मबुद्धि + पापबुद्धि → विदेश यात्रा पर्याप्त धन अर्जित करते हैं धन जंगल में छिपाते हैं पापबुद्धि अकेले धन चुरा लेता है धर्मबुद्धि पर झूठा आरोप पिता को वृक्ष में छिपाकर झूठी साक्षी धर्मबुद्धि वृक्ष-कोटर में अग्नि लगाता है सत्य प्रकट → पापबुद्धि दण्डित → धर्मबुद्धि प्रशंसित

5. शीर्षक की व्याख्या

उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्।

उपायः का अर्थ है किसी उद्देश्य को पूरा करने की योजना या साधन। अपायः का अर्थ है उस योजना से उत्पन्न होने वाला सम्भावित संकट।

पापबुद्धि ने वृक्ष के भीतर अपने पिता को छिपाकर झूठी साक्षी दिलाने का उपाय तो बनाया, पर यह नहीं सोचा कि यदि उस छल की जाँच की गई तो उसके पिता संकट में पड़ सकते हैं।

Simple English: A clever plan is not necessarily a wise plan. Wisdom requires thinking about consequences, risks and possible failure.
लक्ष्य → उपाय → जोखिम की जाँच → परिणाम

6. महत्वपूर्ण पंक्तियाँ और भाव

मातृवत्परदारेषु परद्रव्येषु लोष्ठवत्।
आत्मवत्सर्वभूतेषु वीक्षन्ते धर्मबुद्धयः॥

सदाचारी व्यक्ति दूसरे की स्त्री को माता के समान सम्मान देता है, दूसरे के धन को मिट्टी या पत्थर के समान समझकर उस पर लालच नहीं करता और सभी प्राणियों को अपने समान देखता है।

English idea: Ethical conduct means respect for others, freedom from greed and empathy towards living beings.
आदित्यचन्द्रावनिलोऽनलश्च द्यौर्भूमिरापो हृदयं यमश्च।
अहश्च रात्रिश्च उभे च संध्ये धर्मो हि जानाति नरस्य वृत्तम्॥

इस श्लोक का भाव यह है कि मनुष्य को यह सोचकर सदाचार करना चाहिए कि उसका व्यवहार संसार से छिपा हुआ नहीं है। दिन-रात, प्रकृति, उसका अपना हृदय और धर्म उसके कर्मों के साक्षी हैं।

7. व्याकरण — नित्यबहुवचनान्त शब्द

संस्कृत में कुछ शब्द सामान्य रूप से बहुवचन में ही प्रयुक्त होते हैं।

शब्दसरल अर्थ
आपःजल
दाराःपत्नी
लाजाःखील
अक्षतानिचावल के अक्षत
प्राणाःजीवन-शक्ति
असवःप्राण
वर्षाःवर्षा
सिकताःरेत
इसी कारण पाठ के श्लोक में सूर्य, चन्द्र, पवन, अग्नि आदि एकवचन में हैं, परन्तु आपः शब्द बहुवचन में प्रयुक्त हुआ है।

8. विशेषण और विशेष्य

विशेषण और विशेष्य के बीच लिङ्ग, विभक्ति और वचन का सम्बन्ध रहता है।

प्रकारउदाहरण
लिङ्ग सम्बन्धनूतनं भवनम् — नूतनः विद्यालयः
वचन सम्बन्धचतुरः बालः — चतुराः बालाः
विभक्ति सम्बन्धबुद्धिमती गृहिणी — बुद्धिमत्या गृहिण्या

सर्वनाम शब्द भी विशेषण की तरह प्रयुक्त हो सकते हैं: एतेन धनेन, एनं धर्मबुद्धिम्, यः चौरः, तस्मिन् वृक्षे आदि।

9. क्तवतु-प्रत्यय

भूतकाल में कर्ता द्वारा पूर्ण की गई क्रिया बताने के लिए क्तवतु प्रत्यय का प्रयोग होता है। इसका रूप कर्ता के लिङ्ग और वचन के अनुसार बदलता है।

धातुपुल्लिङ्गस्त्रीलिङ्गनपुंसकलिङ्ग
पठ्पठितवान्पठितवतीपठितवत्
खाद्खादितवान्खादितवतीखादितवत्
कृकृतवान्कृतवतीकृतवत्

10. तत्पुरुषसमासः

तत्पुरुष समास में सामान्यतः उत्तरपद प्रधान होता है। पूर्वपद की विभक्ति का लोप होकर दोनों पद एक हो जाते हैं।

विग्रहसमस्त पदप्रकार
शरणम् आगतःशरणागतःद्वितीया तत्पुरुषः
सुखेन अन्वितःसुखान्वितःतृतीया तत्पुरुषः
छात्रेभ्यः हितम्छात्रहितम्चतुर्थी तत्पुरुषः
रोगात् भयम्रोगभयम्पञ्चमी तत्पुरुषः
देशस्य भक्तःदेशभक्तःषष्ठी तत्पुरुषः
कार्ये कुशलःकार्यकुशलःसप्तमी तत्पुरुषः

11. अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर

अभ्यास 1 — पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत

(क) नरस्य वृत्तं के जानन्ति?
उत्तर: आदित्यः, चन्द्रः, अनिलः, अनलः, द्यौः, भूमिः, आपः, हृदयम्, यमः, अहः, रात्रिः तथा उभे सन्ध्ये नरस्य वृत्तं जानन्ति।
(ख) धर्मबुद्धयः किं वीक्षन्ते?
उत्तर: धर्मबुद्धयः परदारेषु मातृवत्, परद्रव्येषु लोष्ठवत् तथा सर्वभूतेषु आत्मवत् वीक्षन्ते।
(ग) कस्य जन्मनः फलं व्यर्थम्?
उत्तर: येन देशान्तरेषु बहुविधभाषावेषादिकं न ज्ञातं तस्य जन्मनः फलं व्यर्थम्।
(घ) पापबुद्धिः स्वपितरं किम् उक्तवान्?
उत्तर: पापबुद्धिः स्वपितरम् उक्तवान् यत् सः शमीवृक्षस्य महाकोटरे प्रविश्य धर्मबुद्धिः चौरः इति वदेत्।
(ङ) प्राज्ञः किं-किं चिन्तयेत्?
उत्तर: प्राज्ञः उपायम् अपायं च चिन्तयेत्।
(च) मानवः कदा विद्यां वित्तं शिल्पं च प्राप्नोति?
उत्तर: मानवः यदा हृष्टः सन् देशाद् देशान्तरं व्रजति तदा विद्यां वित्तं शिल्पं च सम्यक् प्राप्नोति।
(छ) पापबुद्धिः किं चिन्तयित्वा देशान्तरं प्रस्थितः?
उत्तर: धर्मबुद्धेः आश्रयणेन धनं सम्पाद्य अनन्तरं तं वञ्चयित्वा सुखी भविष्यामि इति चिन्तयित्वा पापबुद्धिः देशान्तरं प्रस्थितः।

अभ्यास 2 — स्थूलाक्षरपदाधारित प्रश्ननिर्माणम्

(क) एनम् अपि वञ्चयित्वा सुखी भवामि।
उत्तर: कम् अपि वञ्चयित्वा सुखी भवामि?
(ख) सर्वं धनं स्वीकृत्य स्वग्रामम् गच्छावः।
उत्तर: सर्वं धनं स्वीकृत्य कुत्र गच्छावः?
(ग) निशीथे अटव्यां गत्वा तत्सर्वं वित्तम् आनीतवान्।
उत्तर: कदा अटव्यां गत्वा तत्सर्वं वित्तम् आनीतवान्?
(घ) तत् आकर्ण्य सर्वे ते जनाः विस्मयोत्फुल्ललोचनाः सञ्जाताः।
उत्तर: तत् आकर्ण्य सर्वे ते जनाः कीदृशाः सञ्जाताः?
(ङ) अहम् एतत् शमीकोटरं वह्निना प्रज्वालयामि।
उत्तर: अहम् एतत् शमीकोटरं केन प्रज्वालयामि?

अभ्यास 3 — कः कं प्रति कथयति?

कथनम्कः?कं प्रति?
वत्स! द्रुतं वद येन तद्द्रव्यं स्थिरं तिष्ठेत्।पितापापबुद्धिं प्रति
प्रातःकाले युवाम् अस्माभिः सह तत्र वनप्रदेशं गच्छतम्।धर्माधिकारीधर्मबुद्धिं पापबुद्धिं च प्रति
त्वया हृतम् एतद्धनं, नान्येन।पापबुद्धिःधर्मबुद्धिं प्रति
भोः दुरात्मन्! मा माम् एवं वद।धर्मबुद्धिःपापबुद्धिं प्रति
एतत्सर्वमपि पापबुद्धेः चेष्टितम्।पापबुद्धेः पिताउपस्थितजनान् प्रति

अभ्यास 4 — भूतकालिकवाक्यानि वर्तमानकालिकवाक्येषु परिवर्तयत

भूतकालिक वाक्यम्वर्तमानकालिक वाक्यम्
राजपुरुषाः पापबुद्धिं दण्डितवन्तः।राजपुरुषाः पापबुद्धिं दण्डयन्ति।
पापबुद्धिः अत्यधिकं धनं सम्पादितवान्।पापबुद्धिः अत्यधिकं धनं सम्पादयति।
पापबुद्धिः वनदेवतायाः समीपम् आगतवान्।पापबुद्धिः वनदेवतायाः समीपम् आगच्छति।
अत्रान्तरे पापबुद्धिः शिरस्ताडयन् उक्तवान्।अत्रान्तरे पापबुद्धिः शिरस्ताडयन् वदति।
सर्वे जनाः धर्मबुद्धिं प्रशंसितवन्तः।सर्वे जनाः धर्मबुद्धिं प्रशंसन्ति।

अभ्यास 5 — भावार्थानुसारं रिक्तस्थानानि पूरयत

(क) सूर्यः चन्द्रः ______ अग्निः आकाशः भूमिः जलं ______ यमः... मनुष्याणां सर्वविधं ______ जानन्ति।
उत्तर: पवनः, हृदयं, व्यवहारम्।
(ख) यः ______ न अटति, विविधदेशानां संस्कृतीः ______ च न जानाति, पृथिवीपृष्ठे तस्य जन्म ______ भाति।
उत्तर: अन्यदेशेषु, भाषाः, व्यर्थम्।
(ग) सज्जनाः सर्वासु नारीषु ______ इव, अन्येषां ______ मृत्पिण्डम् इव, सर्वेषु प्राणिषु च ______ इव चिन्तयन्ति।
उत्तर: मातरः, द्रव्येषु, स्वयम्।
(घ) बुद्धिमान् मनुष्यः ______ मार्गान् समस्यादूरीकरणस्य ______ च ______।
उत्तर: कार्यसाधनस्य, कौशलानि, जानीयात्।

अभ्यास 6 — विग्रहं मेलनं वा कुरुत

पदम् / विग्रहःउत्तरम्
अर्थोपार्जनम्अर्थस्य उपार्जनम्
गुरुजनाज्ञयागुरुजनानाम् आज्ञया
वनदेवतावनस्य देवता
वित्तस्य अभावात्वित्ताभावात्
बुद्धिप्रभावेणबुद्धेः प्रभावेण
धरण्याः पीठेधरणीपीठे
राजकुलेराज्ञः कुले

अभ्यास 7 — कथाक्रमानुसारं वाक्यानि पुनः लिखत

क्रमःघटना
1 कस्मिंश्चिद् देशे धर्मबुद्धिः पापबुद्धिश्च द्वे मित्रे प्रतिवसतः स्म।
2 ततस्तौ गुरुजनानाम् अनुमतिं प्राप्य शुभेऽहनि देशान्तरं प्रस्थितौ।
3 यथा द्वाभ्यां चिन्तितं तथैव भूमिं खनित्वा तत्रैव धनं निक्षिप्य स्वगृहं गतवन्तौ।
4 द्वावपि गत्वा तत्स्थानं यावत् खनतः तावत् रिक्तं भाण्डं दृष्टवन्तौ।
5 भवान् यदि मदुक्तप्रकारेण वदति तर्हि तद्धनं मयि स्थिरं तिष्ठति।
6 राजपुरुषाः पापबुद्धिं दण्डितवन्तः।

12. Important Questions and Answers

प्रश्न 1. पाठ का शीर्षक क्या सिखाता है?
उत्तर: बुद्धिमान व्यक्ति को किसी योजना के लाभ के साथ उससे उत्पन्न होने वाले सम्भावित संकट और हानि पर भी विचार करना चाहिए।
प्रश्न 2. माता ने दूसरे के धन के विषय में क्या शिक्षा दी?
उत्तर: दूसरे का धन उसके परिश्रम से अर्जित होता है। इसलिए उसे अपने उपयोग में न लेकर उसके वास्तविक स्वामी को लौटाना चाहिए।
प्रश्न 3. पापबुद्धि धर्मबुद्धि को विदेश क्यों ले गया?
उत्तर: उसका वास्तविक उद्देश्य धर्मबुद्धि के सहारे धन कमाना और बाद में उसे धोखा देकर धन स्वयं ले लेना था।
प्रश्न 4. दोनों मित्रों ने धन जंगल में क्यों छिपाया?
उत्तर: पापबुद्धि ने सुझाव दिया कि पूरा धन घर ले जाना उचित नहीं है। इसलिए दोनों ने अधिकांश धन भूमि में छिपाकर थोड़ी राशि अपने साथ ली।
प्रश्न 5. पापबुद्धि ने धर्मबुद्धि को किस प्रकार फँसाने का प्रयास किया?
उत्तर: पहले उसने धन स्वयं चुराया, फिर धर्मबुद्धि पर चोरी का आरोप लगाया और बाद में अपने पिता को वृक्ष के कोटर में छिपाकर झूठी साक्षी दिलाने की योजना बनाई।
प्रश्न 6. धर्मबुद्धि ने सत्य कैसे प्रकट किया?
उत्तर: उसने शमी-वृक्ष के कोटर को जलने योग्य सामग्री से घेरकर अग्नि प्रज्वलित की। भीतर छिपा पापबुद्धि का पिता बाहर आया और उसने पूरी योजना स्वीकार कर ली।
प्रश्न 7. पापबुद्धि की योजना असफल क्यों हुई?
उत्तर: उसने केवल छल की योजना बनाई, पर यह नहीं सोचा कि उसकी झूठी साक्षी की जाँच किस प्रकार हो सकती है। अर्थात् उसने उपाय सोचा, अपाय नहीं।
प्रश्न 8. धर्मबुद्धि के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर: वह ईमानदार, धैर्यवान, विवेकी और न्यायप्रिय है। कठिन परिस्थिति में भी वह सत्य से नहीं हटता और बुद्धिमत्ता से छल का पर्दाफाश करता है।
प्रश्न 9. “परद्रव्येषु लोष्ठवत्” का क्या अर्थ है?
उत्तर: दूसरे व्यक्ति के धन को मिट्टी या पत्थर के टुकड़े के समान समझना, अर्थात् उस पर लालच न करना।
प्रश्न 10. इस कथा में लालच का परिणाम क्या दिखाया गया है?
उत्तर: लालच के कारण पापबुद्धि चोरी, झूठ और षड्यन्त्र की ओर बढ़ता गया। अन्ततः उसका छल प्रकट हुआ, वह दण्डित हुआ और उसकी योजना से उसके पिता का भी विनाश हुआ।