रीढ़ की हड्डी Reedh Ki Haddi (The Backbone)
✦ लेखक परिचय — Jagdish Chandra Mathur
Imp: जगदीशचंद्र माथुर का जन्म सन् 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और Indian Civil Service (ICS) में चयनित हुए।
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Toggleइन्होंने बिहार राज्य के शिक्षा सचिव, आकाशवाणी के महानिदेशक, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव जैसे प्रशासनिक पदों पर कार्य किया। He was a top-level government officer who still found time for literature.
प्रयाग में अध्ययन के दौरान ही लेखन आरंभ किया। चाँद, रूपभ आदि पत्रिकाओं में नाटक-एकांकी छपने लगे। हिंदी नाटक और रंगमंच के विकास में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
Imp Works: भोर का तारा, कोणार्क, ओ मेरे सपने, शारदीय, पहला राजा, दस तस्वीरें, जिन्होंने जीना जाना। These works show his grip on both historical and social themes.
कोणार्क इनका सर्वाधिक चर्चित और मंचित नाटक है। सन् 1978 में इनका निधन हो गया।
✦ एकांकी परिचय — About the Play
Imp: ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी भारतीय समाज में परंपरागत विवाह व्यवस्था और स्त्रियों की शिक्षा को लेकर रूढ़िगत सोच पर चोट करती है। This play attacks the orthodox thinking about arranged marriage and women's education.
इस एकांकी की रचना 1939 में की गई। उस समय भारतीय समाज में शिक्षा और अन्य कार्यक्षेत्रों में स्त्रियों को समान अवसर नहीं मिलते थे।
इस एकांकी के माध्यम से विवाह के लिए कम पढ़ी-लिखी लड़की की माँग, विवाह में लेन-देन जैसी सामाजिक कुरीतियों को उजागर किया गया है।
मुख्य पात्र उमा पढ़ी-लिखी, सशक्त महिला का प्रतिनिधित्व करती है। Uma represents the educated, empowered woman who refuses to bow down.
✦ पात्र परिचय — Character List
| पात्र | परिचय | Character Note |
|---|---|---|
| उमा | लड़की | BA Graduate; represents self-respect and moral courage |
| रामस्वरूप (बाबू) | लड़की का पिता | Shows off as modern but is deeply orthodox; victim of pretence |
| प्रेमा | लड़की की माँ | Traditional mindset; believes too much education ruins girls |
| शंकर | लड़का | Groom; weak character; lacks moral backbone despite being a medical student |
| गोपालप्रसाद | लड़के का पिता | Lawyer; talks of business in marriage; wants a beautiful but less-educated daughter-in-law |
| रतन | रामस्वरूप का घरेलू सहायक | Simple, honest servant; comic relief; symbol of innocence |
✦ महत्वपूर्ण दृश्य एवं संवाद — Key Scenes & Dialogues
दृश्य 1: तैयारी (The Preparation)
“अरे धीरे-धीरे चला… अब तख्त को उधर मोड़ दे… उधर… बस, बसा”
Babu orders Ratan to arrange the cot, showing his bossy nature.
“मैं कहती हूँ तुम्हें इस वक्त धोती की क्या ज़रूरत पड़ गई! एक तो वैसे ही जल्दी-जल्दी में…”
Prema is worried about petty things when a big event (groom's family visit) is happening.
“मुँह फुलाए?… और तुम उसकी माँ, किस मर्ज़ की दवा हो? जैसे-तैसे करके तो वे लोग पकड़ में आए हैं। अब तुम्हारी बेवकूफी से सारी मेहनत बेकार जाए तो मुझे दोष मत देना।”
Ramswarup only cares about 'trapping' the groom's family, not his daughter's happiness.
दृश्य 2: वर-पक्ष का आगमन (The Groom's Family Arrives)
“हाँ-हाँ-हाँ! यह तो आपकी बड़ी मेहरबानी है। मैंने आपको तकलीफ़ तो दी…”
False humility — Ramswarup is actually desperate to impress them.
“अरे नहीं साहब! जैसा मेरा काम, वैसा आपका काम। आखिर लड़के की शादी तो करनी ही है।”
Gopalprasad treats marriage like a business deal.
दृश्य 3: शंकर की परीक्षा (Testing Shankar)
“झुककर क्यों बैठते हो? ब्याह तय करने आए हो, कमर सीधी करके बैठो।”
Irony: He tells his son to sit straight, but the son lacks 'straightness' of character.
“हमें ज़्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए। मेम साहब तो रखनी नहीं, कौन भुगतेगा उसके नखरों को। बस हद से हद मैट्रिक-पास होनी चाहिए… क्यों, शंकर?”
They want an uneducated bride who will be easy to control.
दृश्य 4: उमा का प्रवेश — The Climax
उमा पान की तश्तरी लेकर आती है। उसके चेहरे पर सोने की रिम वाला चश्मा दिखता है।
Uma enters with a paan tray wearing gold-rimmed glasses — a symbol of her education and confidence.
“चश्मा!!!”
Shock! They expected a traditional, uneducated girl.
“क्या जवाब दूँ, बाबू जी! जब कुर्सी-मेज़ बिकती है तब दुकानदार कुर्सी-मेज़ से कुछ नहीं पूछता, सिर्फ़ खरीदार को दिखला देता है। पसंद आ गई तो अच्छा है, वरना…”
Powerful line: Uma compares herself to furniture being sold — the seller doesn't ask the furniture, only the buyer matters. This shows how women were treated as objects.
“अब मुझे कह लेने दीजिए, बाबूजी… ये जो महाशय मेरे खरीदार बनकर आए हैं, इनसे ज़रा पूछिए कि क्या लड़कियों के दिल नहीं होते? क्या उनके चोट नहीं लगती? क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देख-भालकर खरीदते हैं?”
Uma directly attacks the system where women are inspected like animals before purchase.
“जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है। कोई पाप नहीं किया, कोई चोरी नहीं की, और न आपके पुत्र की तरह ताक-झाँककर कायरता दिखाई है।”
Uma reveals her BA degree and exposes Shankar's cowardly act of peeping into the girls' hostel.
दृश्य 5: अंत — The Ending
“जी हाँ, जाइए, ज़रूर चले जाइए! लेकिन घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं — यानी बैकबोन, बैकबोन!”
The title hits home: Uma asks if Shankar has a moral backbone at all.
“बाबूजी, मक्खन!”
Comic ending: While everyone is shocked, Ratan only remembers the butter that was never brought. This highlights the hollowness of the 'big drama'.
✦ मेरे उत्तर मेरे तर्क — MCQ Exercises with Answers
प्रश्न 1. एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?
Answer: शीर्षक आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है। The title symbolizes self-respect and moral courage, not physical strength.
प्रश्न 2. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?
Answer: समाज की अनुचित मान्यताओं पर व्यंग्य किया गया है — जैसे लड़की को कम पढ़ा-लिखा रखना, विवाह को सौदा बनाना आदि। The play satirizes wrong social beliefs, not just illiteracy.
प्रश्न 3. “घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं” — यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?
Answer: यह वाक्य शंकर की नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता को दर्शाता है। It exposes Shankar's lack of moral courage and weak character.
प्रश्न 4. “जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ मैंने बी.ए. पास किया है” — उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?
Answer: उमा के लिए शिक्षा का अर्थ आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना है। For Uma, education means self-confidence and independent thinking, not just degrees.
प्रश्न 5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?
Answer: दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं। रामस्वरूप आधुनिक होने का दिखावा करता है परंतु रूढ़िवादी है; गोपालप्रसाद भी पुराने विचारों को ही महत्व देता है। Both are victims of show-off and tradition.
प्रश्न 6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?
Answer: संवाद स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण हैं। The dialogues are natural and full of satire.
✦ मेरी समझ मेरे विचार — Short Answer Questions
Note: नीचे दिए गए उत्तर मॉडल उत्तर हैं। छात्र इन्हें अपनी भाषा में लिख सकते हैं। These are model answers; students can write in their own words.
प्रश्न 1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।
उत्तर:
- रामस्वरूप अपनी बेटी को बी.ए. पास करवाता है, परंतु विवाह के समय झूठ बोलता है कि वह केवल मैट्रिक-पास है। He gets his daughter educated but lies about it to the groom's family.
- वह पाउडर, सितार, हारमोनियम जैसी आधुनिक वस्तुएँ रखता है परंतु यह सब वर-पक्ष को प्रभावित करने के लिए है, न कि वास्तविक रुचि के लिए।
- वह उमा को गाना-बजाना सिखाता है परंतु वर-पक्ष के सामने उसे चुप रहने की सलाह देता है।
- उसका आधुनिकता का चेहरा केवल दिखावा है; भीतर से वह पूरी तरह रूढ़िवादी पिता है जो बेटी को बोझ मानता है।
प्रश्न 2. ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
उत्तर:
| पात्र | रीढ़ की हड्डी का अर्थ |
|---|---|
| उमा | उमा के लिए यह आत्म-सम्मान, साहस और स्वतंत्र विचार है। वह पढ़ी-लिखी है और किसी के सामने झुकना नहीं चाहती। For Uma, it means self-respect and courage. |
| शंकर | शंकर के लिए यह नैतिक दुर्बलता का प्रतीक है। वह कायर है, लड़कियों के हॉस्टल में झाँकता है और सच्चाई सामने आने पर चुप रहता है। For Shankar, the phrase exposes his lack of moral backbone. |
प्रश्न 3. “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
उत्तर:
प्रेमा की यह सोच उस समय की सामान्य मानसिकता को दर्शाती है। Prema's thinking reflects the common mindset of that era.
- स्त्रियों को ‘स्त्री-सुबोधिनी’ जैसी पुस्तकें पढ़ाई जाती थीं जो उन्हें घरेलू कामों तक सीमित रखती थीं।
- समाज मानता था कि ज़्यादा पढ़ी-लिखी लड़की अकड़ू बन जाती है और विवाह में मुश्किलें पैदा करती है।
- स्त्री-शिक्षा को ‘जंजाल’ मानना उस युग की पिछड़ी सोच को उजागर करता है जहाँ लड़कियों को केवल घर संभालने की मशीन समझा जाता था।
प्रश्न 4. लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, तो वह क्या होगा और क्यों?
उत्तर:
Why this title:
- रीढ़ की हड्डी शरीर का वह अंग है जो सीधा खड़ा रखती है। The spine keeps the body upright.
- एकांकी में इसका प्रयोग नैतिक सीधेपन के लिए किया गया है — क्या इंसान अपनी बात पर अडिग रह सकता है?
- उमा में यह गुण है; शंकर में अभाव है। इसीलिए यह शीर्षक सर्वाधिक उपयुक्त है।
Alternative Title: “आत्म-सम्मान” या “दहेज़ का दंश” रखा जा सकता है, क्योंकि एकांकी मुख्य रूप से आत्मसम्मान युक्त स्त्री और विवाह-व्यवस्था की कुरीतियों पर केंद्रित है।
✦ एकांकी की पड़ताल — Elements of One-Act Play
| अवयव | विवरण | English Note |
|---|---|---|
| 1. एकांकी का नाम | रीढ़ की हड्डी | Symbolizes moral strength |
| 2. लेखक का नाम | जगदीशचंद्र माथुर | ICS officer, renowned playwright |
| 3. पात्र | उमा, रामस्वरूप, प्रेमा, शंकर, गोपालप्रसाद, रतन | Six characters; compact cast |
| 4. परिवेश/देश-काल | उत्तर प्रदेश; लगभग 1939 का समय | Pre-independence orthodox society |
| 5. रंग-निर्देश/मंच-निर्देश | मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा; तख्त; अंदर का दरवाज़ा | Simple setting — middle-class home |
| 6. संवाद-निर्देश | हल्की आवाज़, तेज़ आवाज़, खाँसना, चुप रहना | Dialogue directions create mood |
| 7. समस्या | पढ़ी-लिखी लड़की का विवाह; रूढ़िवादी सोच | Conflict: tradition vs. education |
| 8. संवाद | स्वाभाविक, व्यंग्यपूर्ण, हास्य से भरपूर | Natural, satirical, humorous |
| 9. मुख्य विचार | स्त्री-शिक्षा और आत्म-सम्मान का महत्व | Women's education & self-respect |
| 10. समाधान/परिणाम | उमा अपनी बात रखकर वर-पक्ष को लज्जित कर देती है | Uma wins by speaking the truth |
रंग-निर्देश (Stage Directions)
इस एकांकी की शुरुआत इस प्रकार होती है:
“मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाज़े से आते हुए जिन महाशय की पीठ नज़र आ रही है, वे अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं। एक तख्त को पकड़े हुए पीछे की ओर चलते-चलते कमरे में आते हैं। तख्त का दूसरा सिरा रतन ने पकड़ रखा है।”
The stage directions set the scene: a modest room, an elderly man (Ramswarup), and his servant Ratan carrying a cot. This simple opening establishes the middle-class setting.
✦ मेरी टिप्पणी — Critical Comment
Imp Quote: “जी हाँ, जाइए, ज़रूर चले जाइए लेकिन घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं — यानी बैकबोन, बैकबोन!”
This is Uma's final sarcastic blow to Shankar and his father.
टिप्पणी (Comment):
यह वाक्य उमा द्वारा शंकर पर की गई एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी है। It is a satirical comment on Shankar.
- टिप्पणी किसी विषय पर व्यक्त की गई संक्षिप्त राय होती है।
- उमा यहाँ शंकर की कायरता और चारित्रिक दुर्बलता पर प्रहार कर रही है।
- वह कहती है कि शिक्षा और डिग्री से कोई मतलब नहीं अगर इंसान में नैतिक साहस न हो।
- ‘बैकबोन’ शब्द का दोहराव इस बात पर ज़ोर देता है कि शंकर शारीरिक रूप से तो सीधा बैठ सकता है, परंतु नैतिक रूप से वह कुबड़ा है।
✦ तुलना और विचार — Comparison & Analysis
प्रश्न 1. “गोपालप्रसाद: भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।”
विश्लेषण:
इस पंक्ति में गोपालप्रसाद लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शिक्षा-मानदंड स्थापित करता है। He sets different education standards for boys and girls.
- उसके अनुसार लड़कों को बी.ए., एम.ए. तक पढ़ना चाहिए क्योंकि उन्हें नौकरी करनी है।
- लड़कियों के लिए वह ‘मैट्रिक-पास’ को भी ज़्यादा मानता है; उसे डर है कि ज़्यादा पढ़ी लड़की ‘मेम साहब’ बन जाएगी।
- यह लैंगिक भेदभाव का स्पष्ट उदाहरण है — समाज लड़कियों को केवल गृहस्थी तक सीमित रखना चाहता था।
प्रश्न 2. “मुझे अपनी इज़्ज़त, अपने मान का ख़याल तो है लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
विश्लेषण:
यहाँ उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। Uma openly expresses her rights and thoughts.
- वह कहती है कि उसे अपनी इज़्ज़त और मान का पूरा ख़याल है; इसलिए वह किसी के सामने झुकने को तैयार नहीं।
- वह शंकर की कायरता उजागर करती है — कि वह लड़कियों के हॉस्टल के इर्द-गिर्द घूमता था और पकड़े जाने पर मुँह छिपाकर भागा।
- इससे उमा के व्यक्तित्व की ये विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं: साहसी, सत्यनिष्ठ, आत्मविश्वासी और स्वाभिमानी।
✦ भाषा से संवाद — Grammar & Language
भाषा में मुहावरे — Idioms from the Play
| मुहावरा | अर्थ | Example Sentence |
|---|---|---|
| पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह | दबे पाँव, डरते-डरते चलना | रतन भीगी बिल्ली की तरह खाली हाथ बाबू के पीछे-पीछे आ रहा था। |
| मुँह फुलाए पड़ी है | रूठकर बैठी है, नाराज़ है | बच्चा खिलौना न मिलने पर मुँह फुलाए बैठा था। |
| किस मर्ज़ की दवा हो | किस काम की हो | तुम्हारी यह सलाह किस मर्ज़ की दवा है, जो कुछ हुआ सो हुआ। |
| सिर चढ़ा रखा है | बहुत लाड़-प्यार करना, अकड़ू बना देना | दादी ने पोते को सिर चढ़ा रखा है, इसलिए वह सुनता नहीं। |
| सब-कुछ उगल देती हो | रहस्य खोल देना, सब कुछ बता देना | वह तो सब-कुछ उगल देती है, कोई बात छिपा नहीं पाती। |
| काँटों में घसीटने लगे | अपमानित करना, कष्ट देना | बॉस ने कर्मचारी को काँटों में घसीटा। |
| इज़्ज़त उतारने के लिए बुलाया | अपमान करने के लिए बुलाना | क्या तुमने मुझे यहाँ इज़्ज़त उतारने के लिए बुलाया है? |
| मुँह छिपाकर भागे | शर्मिंदा होकर भागना | चोर पुलिस को देख मुँह छिपाकर भागा। |
संदर्भ में शब्द — Word in Context
“बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।”
If the father is one ser, the son is one and a quarter ser.
- संदर्भ: रामस्वरूप इस कहावत का प्रयोग गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए करता है।
- अर्थ: पिता जैसा, पुत्र उससे भी बढ़कर। यहाँ व्यंग्यात्मक अर्थ में प्रयुक्त हुआ है — दोनों ही दिखावटी और पाखंडी हैं।
- सकारात्मक प्रयोग: “बाप सेर है तो लड़का सवा सेर — डॉक्टर के बेटे ने IAS परीक्षा पास की।”
✦ शब्द-संपदा — Vocabulary (Word Meanings)
| शब्द | अर्थ | English |
|---|---|---|
| अधेड़ | आधी उम्र का, ढलती उम्र का | Middle-aged |
| तख्त | लकड़ी की बड़ी चौकी, सिंहासन | Wooden cot / seat |
| गंदुमी | गेहूँए रंग का | Wheatish complexion |
| डाँट | ठेक, अटकाव | Obstruction, scolding |
| जंजाल | झंझट, झमेला, संसार का बखेड़ा | Complication, mess |
| ठठोली | हँसी, परिहास | Joke, jest |
| करीने/करीना | ढंग, क्रम, मेल, समानता | Manner, order |
| दकियानूसी | पुराने विचार का, पुराना | Orthodox, outdated |
| तालीम | शिक्षा | Education |
| चौपट | नष्ट, चारों ओर से खुला हुआ | Ruined, open |
| दस्तक | खटखटाना, हाथ का हल्का आघात | Knock |
| फितरती | चालबाज़, प्रकृतिगत | Cunning, natural |
| खींस निपोरना/निकालना | दाँत दिखाई दे, बेढंगी हँसी | To grin foolishly |
| खासियत/खासियत | विशेषता, गुण, प्रकृति | Specialty, nature |
| तशरीफ़ | आदर, सम्मान, महत्व | Respect, honour |
| मार्जिन | सीमा, किनारा | Margin, limit |
| बालाई | ऊपर का हिस्सा | Upper part |
| तकल्लुफ़ | बनावट, शिष्टाचार | Formality, pretence |
| माफ़िक | अनुकूल, अनुसार | According to, suitable |
| मुखातिब | संबोधन करने वाला | Addressing, speaker |
| निहायत | अत्यधिक, अत्यंत | Extremely, very much |
| जायचा | जन्मपत्री | Horoscope |
| अर्ज़ | निवेदन, प्रार्थना, चौड़ाई | Application, request |
| अधीर | धैर्य रहित, उतावला | Restless, impatient |
Imp: यह एकांकी आज भी प्रासंगिक है क्योंकि शिक्षा और आत्म-सम्मान किसी भी युग में स्त्री की सबसे बड़ी ताकत होती है।
This play remains relevant because education and self-respect are a woman's greatest strength in any era.
