झाँसी की रानी Class 9 Notes and Solutions

झाँसी की रानी

सुभद्रा कुमारी चौहान · कक्षा 9 हिंदी · वीर-रस प्रधान काव्य

परिचय

सुभद्रा कुमारी चौहान (1904–1948) का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ। वे एक प्रसिद्ध कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी थीं। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, वीरता और स्वाधीनता संग्राम की अलख जगाने वाली भावनाएँ मिलती हैं।

‘झाँसी की रानी’ उनकी अमर कृति है, जो 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर रचित है। इस कविता में रानी लक्ष्मीबाई के जीवन-वृत्त, उनके संघर्ष और अंतिम बलिदान का चित्रण है।

About the Poet: Subhadra Kumari Chauhan (1904–1948) was born in Prayagraj, Uttar Pradesh. She was a renowned poetess and freedom fighter. Jhansi Ki Rani is her immortal creation based on the 1857 First War of Independence. It portrays the life, struggles, and supreme sacrifice of Rani Lakshmibai.
काव्य पाठ

काव्य पाठ — झाँसी की रानी

1. क्रांति का आह्वान

सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी, चमक उठी सन सतावन में वह तलवार पुरानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

2. बचपन और वीरता

कानपुर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी, लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी, नाना के संग पढ़ती थी वह, नाना के संग खेली थी, बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी, वीर शिवाजी की गाथाएँ उसको याद जबानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार, देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार, नकली युद्ध, न्यूँ की रचना और खेलना खूब शिकार, सैन्य वेशना, दुर्ग तोड़ना, ये थे उसके प्रिय खिलवार, महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

3. विवाह और विपत्ति

हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में, व्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में, राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में, सुभट बुंदेलों की विरदावलि-सी वह आई झाँसी में, चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उज्याली छाई, किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई, तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई, रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई, निःसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

4. अंग्रेज़ी हुकूमत का अत्याचार

बुझा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया, राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया, फौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया, लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया, अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

अनुनय-विनय नहीं सुनता है, विकट फिरंगी की माया, व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया, डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया, राजाओं नवाबों को भी उसने पैरों ठुकराया, रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महारानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

छिनी राजधानी देहली की, लिया लखनऊ बातों-बात, कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर का भी घात, उदयपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक की कौन विसात, जब कि सिंध, पंजाब, ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात, बंगाले, मद्रास आदि की भी तो यही कहानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

5. 1857 की क्रांति

रानी रोई रनिवासों में बेगम गम से थी बेज़ार उनके गहने-कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार, सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अख़बार, ‘नागपुर के जेवर ले लो’ ‘लखनऊ के लो नीलक हार’, यों परदे की इज्ज़त पर- देशी के हाथ बिकानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

कुटियों में थी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान, वीर सैनिकों के मन में था, अपने पुरखों का अभिमान, नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान, बहिन छबीली ने रण-चंडी का कर दिया प्रकट आह्वान, हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी, यह स्वतंत्रता की चिंगारी अंतरतम से आई थी, झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी, मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी, जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम नाना धुंधूपंत, तांतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम, अहमद शाह मौलवी, ठाकुर कुंवरसिंह सैनिक अभिराम, भारत के इतिहास-गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम, लेकिन आज जूम कहलाती उनकी जो कुर्बानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

6. युद्ध और बलिदान

इनकी गाथा छोड़ चले हम झाँसी के मैदानों में, जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में, लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में, रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में, जख्मी होकर वॉकर भागा, उसे अजब हैरानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर, गया स्वर्ग तत्काल सिधार, यमुना-तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार, विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार, अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी, अबके जनरल स्मिथ समुख था, उसने मुँह की खाई थी, काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी, युद्ध क्षेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी, पर, पीछे हु रोज आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

तो भी रानी मार-काटकर चलती बनी सेन्य के पार, किंतु सामने नाला आया, था यह संकट विषम अपार, घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गए सवार, रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार, घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर-गति पानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

7. श्रद्धांजलि

रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी, मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी, अभी उम्र कुल तेईस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी, हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता नारी थी, दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

जाओ रानी याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारतवासी, यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनाशी, होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी, हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी, तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

पद्य व्याख्या

पद्य व्याख्या (Stanza-wise Explanation)

क्रांति का आह्वान

इस पंक्ति में कवयित्री 1857 की क्रांति का वर्णन करती हैं। भारत में पुरानी राजवंशों का अंत हो रहा था, लेकिन इसी बूढ़े भारत में नई जवानी (नया उत्साह और विद्रोह) आया। लोगों ने आज़ादी की कीमत समझी और अंग्रेज़ों (फिरंगियों) को देश से भगाने का संकल्प लिया। 1857 में पुरानी तलवारें भी चमक उठीं।
English: The poet describes the 1857 revolt. Old dynasties were ending, but old India got new energy. People understood the value of freedom and resolved to expel the British. Even old swords shone again in 1857.

बचपन और वीरता

रानी लक्ष्मीबाई का बचपन कानपुर में बीता। वे नाना साहब (धुंधूपंत) की मुँहबोली बहन थीं और ‘छबीली’ कहलाती थीं। वे अकेली संतान थीं। नाना के साथ वे शिक्षा और खेल में भागीदार रहीं। उनकी सहेलियाँ बरछी, ढाल, कृपाण और कटार थीं। वे शिवाजी की वीर गाथाएँ सुनती थीं।
Important Line: "Her toys were not dolls but weapons — spears, shields, swords, and daggers." This tells us she was trained as a warrior from childhood. Unlike other girls, she loved hearing tales of Shivaji's bravery.

विवाह और विपत्ति

लक्ष्मीबाई का विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव से हुआ। झाँसी में खुशियाँ छाईं। लेकिन कालगति (समय) ने काली घटा ला दी। राजा की आकस्मिक मृत्यु हो गई। रानी विधवा हो गईं। उनके कोई संतान नहीं थी, इसलिए राज्य पर संकट आया।
Important Line: "तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई" — A warrior who shoots arrows could never like bangles. It shows Rani was a fighter, not a traditional delicate queen.

अंग्रेज़ी हुकूमत का अत्याचार

राजा की मृत्यु के बाद डलहौजी ने ‘लाप्स’ (Doctrine of Lapse) की नीति के तहत झाँसी पर अधिकार कर लिया। ब्रिटिश राज्य ‘लावारिस का वारिस’ बनकर आया। रानी की गोद में पालक पुत्र दामोदर राव थे, फिर भी अंग्रेज़ों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। अंग्रेज़ों ने दिल्ली, लखनऊ, नागपुर, उदयपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक, सिंध, पंजाब आदि पर भी अधिकार जमा लिया।
Important Line: "बुझा दीप झाँसी का" — The lamp of Jhansi was extinguished. This symbolizes the end of Jhansi's independence and hopes after the king's death and British annexation.

1857 की क्रांति

रानी को रनिवास में बंद कर दिया गया। उनके गहने-कपड़े कलकत्ते में बेचे गए। अंग्रेज़ अखबारों में नीलामी छापते थे। देश की इज्ज़त (परदे की इज्ज़त) बिक रही थी। कुटियों और महलों दोनों में अपमान था। नाना साहब, तांतिया तोपे, अज़ीमुल्ला खाँ, अहमद शाह मौलवी और कुंवर सिंह ने विद्रोह का बिगुल फूँका। रानी ने भी रणचंडी का रूप धारण किया।
Important Line: "महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी" — Palaces and huts alike caught fire. It shows rich and poor fought together for freedom. This unity turned 1857 into a mass movement.

युद्ध और बलिदान

लेफ्टिनेंट वॉकर ने झाँसी पर हमला किया। रानी ने तलवार खींची और वॉकर को घायल कर भगा दिया। रानी कालपी गईं, फिर ग्वालियर पर अधिकार किया। अंग्रेज़ जनरल स्मिथ और ह्यूरोज़ ने रानी को घेर लिया। काला नदी के पास रानी घोड़े पर अपने पुत्र दामोदर राव को बाँधकर युद्ध करती रहीं। घायल होकर वे वीरगति को प्राप्त हुईं।
Important Line: "रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार" — The Rani was alone while enemies were many. It shows her unmatched courage against impossible odds.

श्रद्धांजलि

रानी के बलिदान को कवयित्री नमन करती हैं। वे कहती हैं कि रानी केवल 23 वर्ष की थीं, वे साधारण मनुष्य नहीं बल्कि स्वतंत्रता की अवतार थीं। उन्होंने हमें जीने का पाठ और स्वतंत्रता के लिए लड़ने की सीख दी। भारतवासी उनके बलिदान को सदा याद रखेंगे। झाँसी चाहे मिट जाए, लेकिन रानी की अमिट निशानी रहेगी।
Important Line: "तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी" — You yourself are your own monument. You are an indestructible symbol. True heroes do not need stone statues; their brave deeds are eternal.
प्रश्नोत्तर

प्रश्नोत्तर (Exercise Solutions)

मेरे उत्तर मेरे तर्क — बहुविकल्पीय प्रश्न

1. ‘झाँसी की रानी’ कविता की पंक्ति “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?
(क) देश का स्वाभिमान
(ख) विद्रोह की चिंगारी
(ग) स्वाधीनता का भय
(घ) भारत की युवावस्था
सही उत्तर: (ख) विद्रोह की चिंगारी
‘नई जवानी’ से तात्पर्य 1857 में उठे स्वतंत्रता संग्राम के नए उत्साह और विद्रोह की भावना से है।
2. लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
(क) विनम्रता
(ख) शोभायुक्त
(ग) सहिष्णुता
(घ) कठोरता
सही उत्तर: (ख) शोभायुक्त
‘छबीली’ शब्द का अर्थ है सुंदर, तेजस्वी और छबिवाली।
3. “बुझा दीप झाँसी का” पंक्ति का भावार्थ है —
(क) अंग्रेज़ों का झाँसी पर अधिकार हो जाना
(ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना
(ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना
(घ) रानी के जीवन में उदासी होना
सही उत्तर: (ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना
यहाँ झाँसी राज्य की स्वतंत्रता और उम्मीदों के समाप्त होने का संकेत है।
4. “इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम” पंक्ति में स्वतंत्रता आंदोलन की किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?
(क) असहयोग आंदोलन
(ख) भारत छोड़ो आंदोलन
(ग) 1857 की क्रांति
(घ) सविनय अवज्ञा आंदोलन
सही उत्तर: (ग) 1857 की क्रांति
यह पंक्ति 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की ओर इंगित करती है।
5. “व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया” पंक्ति में ‘यह’ शब्द किसके लिए कहा गया है?
(क) नवाबों के लिए
(ख) जनरल डलहौजी के लिए
(ग) लेफ्टिनेंट वॉकर के लिए
(घ) ब्रिटिश राज के लिए
सही उत्तर: (घ) ब्रिटिश राज के लिए
यहाँ ‘यह’ से तात्पर्य अंग्रेज़ी हुकूमत (British Rule) से है जो व्यापार के बहाने भारत आई।

मेरी समझ मेरे विचार — लघु उत्तरीय प्रश्न

1. ‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?
उत्तर: उनके प्रिय खेल तलवारबाजी, घुड़सवारी, शिकार और युद्ध-कौशल थे। बचपन से ही वे अन्य लड़कियों से भिन्न थीं — उन्हें खिलौनों में रुचि नहीं, बल्कि बरछी, ढाल, कृपाण और कटार उनकी सहेलियाँ थीं। वे वीर शिवाजी की गाथाएँ सुनना पसंद करती थीं।
2. “किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर: इस पंक्ति से राजा गंगाधर राव की आकस्मिक मृत्यु की ओर संकेत है। सुखद जीवन में अचानक दुःख का आगमन हुआ। रानी विधवा हो गईं और राज्य पर संकट आ गया।
3. “महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को दर्शाती है, इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?
उत्तर: इस पंक्ति में अमीर (महल) और गरीब (झोंपड़ी) दोनों वर्गों द्वारा विद्रोह में भाग लेने का चित्रण है। यह एकता स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण थी क्योंकि इससे यह केवल किसी एक वर्ग का आंदोलन न रहकर जन-आंदोलन बन गया।
4. “सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अख़बार” पंक्ति में ‘नीलाम छापते’ शब्द किसकी ओर संकेत करता है? यह भी बताइए कि किसकी नीलामी की जाती थी और क्यों?
उत्तर: अंग्रेज़ अखबारों में रानी लक्ष्मीबाई के गहनों और झाँसी की संपत्ति की नीलामी छपती थी। क्योंकि डलहौजी की ‘लाप्स’ नीति के अंतर्गत झाँसी को अंग्रेज़ों ने अपने अधिकार में ले लिया था और रानी की संपत्ति को अपना मानकर बेच रहे थे।
5. “अभी उम्र कुल तेईस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी” पंक्ति में ‘अवतारी’ शब्द व्यक्ति के विशेष गुणों की ओर इंगित कर रहा है। कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के किन गुणों के कारण उनको ‘अवतारी’ कहा गया है?
उत्तर: रानी को ‘अवतारी’ इसलिए कहा गया कि वे साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि दुर्गा-लक्ष्मी के समान वीरता और ऊर्जा की प्रतीक थीं। 23 वर्ष की छोटी सी उम्र में उन्होंने असाधारण वीरता, नेतृत्व और देशभक्ति का परिचय दिया, जो दिव्य शक्ति से युक्त लगता था।
Imp Points

Imp Points & Terms

काव्य-सौंदर्य (Poetic Devices)
अलंकार / प्रयोगउदाहरण / विवरण
तुकांतलय (Rhyme)थी/थी — प्रत्येक चरण के अंत में समान तुक का प्रयोग
पुनरुक्ति (Refrain)‘बुंदेले हरबोलों के मुँह…’ पंक्ति की बार-बार पुनरावृत्ति
रूपक (Metaphor)‘बुझा दीप झाँसी का’ — स्वतंत्रता को दीप कहा
उपमा (Simile)‘सुभट बुंदेलों की विरदावलि-सी वह आई’
मुहावरे (Idioms)मुँह की खाना (हार मानना), पैर पसारना (अधिकार बढ़ाना)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Context)
  • 1857 की क्रांति — 10 मई 1857 को मेरठ से प्रारंभ हुआ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम।
  • डलहौजी की लाप्स नीति — बिना प्राकृतिक उत्तराधिकारी के राज्यों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाने की नीति।
  • मुख्य केंद्र — झाँसी, दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, पटना, ग्वालियर।
  • सहयोगी वीर — नाना साहब, तांतिया तोपे, कुंवर सिंह, अहमद शाह मौलवी, अज़ीमुल्ला खाँ।
Important Word Meanings
शब्दअर्थ
फिरंगीअंग्रेज़, विलायती
मर्दानीबहादुर, पुरुषोचित
छबीलीतेजस्वी, सुंदर, छबिवाली
अवतारकिसी देवता का मनुष्य रूप में जन्म
विरदावलिवीरों की कीर्ति-गाथा, प्रशंसा-गीत
विधवापति की मृत्यु के बाद स्त्री
बिरानीपराया, अजनबी
वज्र-निपातविनाशकारी आघात
वीरगतियुद्ध में शहीद होना
अविनाशीनाशरहित, अक्षय, नित्य
स्मारकयादगार, स्मृति-चिह्न
Extra — झलकारी बाई (संदर्भ सामग्री)
कविता में लक्ष्मीबाई की दो सखियों ‘काना’ और ‘मंदरा’ का उल्लेख है। इतिहास में झलकारी बाई भी रानी की एक प्रसिद्ध सहयोगी थीं, जिन्होंने रानी के वेश में अंग्रेज़ों को भ्रमित करने का कार्य किया। वे झाँसी की ‘दुर्गा दल’ नामक महिला सेना की सेनानी थीं और 1857 के संग्राम में अदम्य साहस दिखाया।