Class 6 Chapter 5 रहीम के दोहे

रहीम के दोहे
— अब्दुर्रहीम खानखाना | (नीति और प्रेम से भरे कालजयी दोहे)

कवि से परिचय (Introduction)

रहीम भक्तिकाल के एक प्रसिद्ध कवि थे। माना जाता है कि उनका जन्म 16वीं शताब्दी में हुआ था। उन्होंने नीति, भक्ति और प्रेम से जुड़ी रचनाएँ कीं। उन्होंने अवधी और ब्रजभाषा दोनों में कविताएँ लिखीं। रहीम रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों के अच्छे जानकार थे। उनकी मृत्यु 17वीं शताब्दी में हुई। आज भी उनके दोहे आम जन-जीवन में बहुत लोकप्रिय हैं।

In English: Rahim (Abdur Rahim Khan-i-Khanan) was a famous poet of the Bhakti period, born in the 16th century. He wrote about morals, devotion and love in both the Awadhi and Braj languages. His couplets (dohe) are still loved by common people today.

दोहे और उनका भावार्थ (The Couplets Explained)

दोहा 1

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि॥

भावार्थ: बड़ों को देखकर छोटों को नहीं छोड़ना चाहिए। हर एक का अपना महत्व है। जहाँ सुई का काम है वहाँ तलवार बेकार है — तलवार वहाँ सुई की तरह सिलाई नहीं कर सकती।

Meaning: Don't ignore the small ones just because you see the big. Everything has its own importance. A tiny needle can stitch where a big sword is useless.

दोहा 2

तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥

भावार्थ: पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और तालाब अपना पानी स्वयं नहीं पीते। इसी तरह सज्जन लोग अपनी संपत्ति दूसरों की भलाई (परोपकार) के लिए इकट्ठा करते हैं।

Meaning: Trees don't eat their own fruit and lakes don't drink their own water. In the same way, good people gather wealth to help others — this couplet teaches the value of selflessness.

दोहा 3

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥

भावार्थ: प्रेम का धागा झटके से नहीं तोड़ना चाहिए। एक बार टूट जाने पर वह फिर से नहीं जुड़ता, और यदि जुड़ भी जाए तो उसमें गाँठ पड़ जाती है (यानी रिश्ते में दरार रह जाती है)।

Meaning: The thread of love should not be snapped carelessly. Once broken, it cannot rejoin; even if it does, a knot (a rift) remains. Relationships must be kept with care.

दोहा 4

रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥

भावार्थ: यहाँ 'पानी' शब्द के तीन अर्थ हैं — मोती के लिए चमक, मनुष्य के लिए सम्मान/इज़्ज़त, और आटे (चून) के लिए जल। पानी चला जाए तो तीनों बेकार हो जाते हैं। इसलिए पानी (सम्मान) बनाए रखना चाहिए।

Meaning: The word 'paani' has three meanings here — shine (for a pearl), honour (for a person), and water (for flour). Lose it, and all three become worthless. So always protect your honour.

दोहा 5

रहिमन बिपदा हू भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥

भावार्थ: थोड़े दिनों की विपत्ति (मुसीबत) भी अच्छी होती है, क्योंकि इससे यह पता चल जाता है कि इस संसार में कौन अपना (हितैषी) है और कौन पराया।

Meaning: A little hardship is actually good — it reveals who your true well-wishers are and who is not.

दोहा 6

रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥

भावार्थ: यह बावली जीभ बिना सोचे-समझे कुछ भी बोल जाती है (स्वर्ग से पाताल तक की बातें कह जाती है)। जीभ तो मुँह के भीतर छिप जाती है, पर उसके कहे शब्दों का दंड सिर (कपाल) को भुगतना पड़ता है। इसलिए सोच-समझकर बोलना चाहिए।

Meaning: The reckless tongue speaks anything without thinking. The tongue hides inside the mouth, but the head suffers the punishment for its words. Always speak thoughtfully.

दोहा 7

कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥

भावार्थ: संपत्ति (सुख) के समय तो बहुत से लोग कई तरह से अपने बन जाते हैं। पर जो विपत्ति की कसौटी पर खरे उतरते हैं, वही सच्चे मित्र होते हैं।

Meaning: In good times, many become your friends. But the one who stands by you in hard times (the true test) is your real friend.
पानी (Paani) मोती चमक (Shine) मानुष सम्मान (Honour) चून (आटा) जल (Water)

Imp बिंदु (Important Points)

याद रखने योग्य बातें

  • हर छोटी-बड़ी वस्तु का अपना महत्व होता है (सुई और तलवार वाला दोहा)।
  • सज्जन लोग अपनी संपत्ति परोपकार के लिए जमा करते हैं।
  • प्रेम का धागा एक बार टूटने पर उसमें गाँठ रह जाती है — रिश्तों को सँभालकर रखें।
  • मनुष्य का सबसे बड़ा धन उसका 'पानी' यानी सम्मान है।
  • हमेशा सोच-समझकर बोलना चाहिए।
  • सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति में साथ दे।

प्रश्न-उत्तर (Questions & Answers)

मेरी समझ से — सही उत्तर चुनिए

"रहिमन जिह्वा बावरी..." दोहे का भाव है—

  • सोच-समझकर बोलना चाहिए। ✔ (सही उत्तर)
  • मधुर वाणी में बोलना चाहिए।
  • धीरे-धीरे बोलना चाहिए।
  • सदा सच बोलना चाहिए।

कारण: जीभ जो बोलती है उसका दंड सिर को भुगतना पड़ता है, इसलिए बिना सोचे नहीं बोलना चाहिए।

"रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि..." दोहे का भाव क्या है?

  • तलवार सुई से बड़ी होती है।
  • सुई का काम तलवार नहीं कर सकती।
  • तलवार का महत्व सुई से ज्यादा है।
  • हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है। ✔ (सही उत्तर)

कारण: यह दोहा सिखाता है कि आकार से नहीं, उपयोगिता से महत्व तय होता है।

मिलकर करें मिलान (Match the Following)

स्तंभ 1 (दोहा)स्तंभ 2 (सही भाव)
रहिमन धागा प्रेम का... मिले गाँठ परि जाय॥प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए।
कहि रहीम संपति सगे... ते ही साँचे मीत॥सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं।
तरुवर फल नहिं खात हैं... संपति सँचहि सुजान॥सज्जन परहित (दूसरों की भलाई) के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा — भावार्थ

(क) "रहिमन बिपदा हू भली, जो थोरे दिन होय..."

थोड़े दिन की मुसीबत अच्छी होती है क्योंकि इससे अपने और पराए की पहचान हो जाती है।

(ख) "रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल..."

बिना सोचे बोली गई बात का दंड बाद में भुगतना पड़ता है, इसलिए हमेशा सोच-समझकर बोलना चाहिए।

सोच-विचार / खोजबीन के प्रश्न

प्रेम के उदाहरण में 'धागे' का प्रयोग ही क्यों किया गया है?

धागा नाज़ुक और कोमल होता है — ठीक प्रेम की तरह। जिस तरह धागा टूटने पर गाँठ पड़ जाती है, उसी तरह रिश्ता टूटने पर उसमें दरार आ जाती है। इसीलिए प्रेम को धागे से जोड़ा गया है। (अन्य उदाहरण: शीशा या दर्पण — जो टूटकर फिर पूरा नहीं जुड़ता।)

"डारि/डार", "तलवारि/तरवार", "मानुष/मानस" — एक ही शब्द के अलग-अलग रूप क्यों?

क्योंकि दोहे मौखिक रूप से (सुनकर) बहुत लोकप्रिय हुए। अलग-अलग क्षेत्रों और बोलियों में लोगों ने इन्हें अपने उच्चारण के अनुसार बोला, जिससे एक ही शब्द के कई रूप प्रचलित हो गए।

"तरुवर फल नहिं खात..." दोहे में प्रकृति किस मानवीय गुण की बात करती है? प्रकृति से हम और क्या सीख सकते हैं?

यह दोहा परोपकार (दूसरों की भलाई) के गुण की बात करता है। प्रकृति से हम त्याग, निःस्वार्थ सेवा, धैर्य और बिना भेदभाव के सबको देना सीख सकते हैं — जैसे सूरज सबको रोशनी और नदी सबको पानी देती है।

आज की पहेली (Riddles) — उत्तर सहित

दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ खाने के काम, उल्टा होकर नाच दिखाऊँ...

चना / राम? — सही उत्तर: "थाली" नहीं, यह है "रस"… असल उत्तर: "चना" उल्टा "नाच" 👉 उत्तर: "नाच" वाला — चना

एक किले के दो ही द्वार, उनमें सैनिक लकड़ीदार, टकराएँ जब दीवारों से, जल उठे सारा संसार।

उत्तर: दाँत / माचिस — यहाँ संकेत "माचिस की तीली" की ओर है (लकड़ीदार सैनिक = तीलियाँ, टकराने पर आग)।