हार की जीत
लेखक: सुदर्शन (मूल नाम — बदरीनाथ भट्ट) | NCERT मल्हार — पाठ 4
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Toggle📖 भूमिका (Introduction)
‘हार की जीत’ हिंदी की एक प्रसिद्ध कहानी है। इसे प्रसिद्ध लेखक सुदर्शन ने लिखा है। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा प्रेम और भलाई किसी भी बुराई को जीत सकते हैं। इसमें एक साधु (बाबा भारती), उसके प्रिय घोड़े (सुलतान) और एक डाकू (खड्गसिंह) की कथा है।
🎭 मुख्य पात्र (Main Characters)
बाबा भारती का प्रिय घोड़ा सुलतान — जिसे पाने के लिए डाकू खड्गसिंह छल करता है।
📜 कहानी (The Story)
1. बाबा भारती और सुलतान का प्रेम
बाबा भारती को अपने घोड़े सुलतान से बहुत प्रेम था। जैसे माँ को अपना बेटा और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर आनंद आता है, वैसे ही बाबा भारती को घोड़ा देखकर आनंद आता था। वे भगवान के भजन से बचा समय घोड़े को देते, स्वयं उसे खरहरा (साफ़) करते और दाना खिलाते थे। उन्होंने रुपया, माल, ज़मीन — सब कुछ छोड़ दिया था और गाँव के बाहर एक छोटे मंदिर में रहते थे। हर शाम सुलतान पर चढ़कर आठ-दस मील घूमे बिना उन्हें चैन न आता था।
2. डाकू खड्गसिंह का लालच
उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू खड्गसिंह सुलतान की प्रशंसा सुनकर बाबा भारती के पास आया। बाबा ने गर्व से घोड़ा दिखाया और उसकी चाल दिखाने के लिए स्वयं भी अधीर हो गए। जब खड्गसिंह ने घोड़े की तेज़ चाल देखी, तो उसके हृदय पर साँप लोट गया — उसने ठान लिया कि यह घोड़ा वह किसी भी तरह छीन लेगा। जाते-जाते उसने कहा कि यह घोड़ा वह बाबा के पास नहीं रहने देगा।
3. अपाहिज का छल
कई महीने बीत गए और बाबा भारती निश्चिंत हो गए। एक शाम घूमते समय उन्हें एक अपाहिज (विकलांग) व्यक्ति दिखा जो कराह रहा था। दयालु बाबा ने उसे घोड़े पर बैठाया और स्वयं लगाम पकड़कर पैदल चलने लगे। तभी अचानक अपाहिज बना वह व्यक्ति — जो असल में डाकू खड्गसिंह ही था — घोड़ा दौड़ाकर भाग गया।
4. बाबा भारती की अनोखी प्रार्थना
बाबा भारती ने खड्गसिंह को रुकने को कहा। उन्होंने घोड़ा वापस नहीं माँगा, बल्कि केवल एक प्रार्थना की — “इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना।” क्योंकि उन्हें डर था कि यदि लोगों को यह पता चला तो वे किसी गरीब या ज़रूरतमंद पर फिर कभी विश्वास नहीं करेंगे, और दुनिया से विश्वास ही उठ जाएगा।
5. खड्गसिंह का हृदय-परिवर्तन
बाबा भारती के इन ऊँचे और पवित्र विचारों ने खड्गसिंह के हृदय को झकझोर दिया। रात के अँधेरे में वह चुपचाप घोड़ा वापस बाबा के अस्तबल में बाँध गया — उस समय उसकी आँखों में पश्चाताप के आँसू थे। सुबह घोड़े की पहचानी हुई आहट सुनकर बाबा दौड़े और घोड़े से लिपटकर रो पड़े। उनकी और खड्गसिंह की आँखों के आँसू उसी भूमि की मिट्टी पर एक हो गए।
💡 शीर्षक का अर्थ (Imp: Why "हार की जीत"?)
देखने में बाबा भारती अपना प्रिय घोड़ा खो चुके थे — यह उनकी हार थी। परंतु उनके पवित्र विचारों और भलाई ने डाकू का हृदय बदल दिया और घोड़ा भी वापस मिल गया — यही उनकी असली जीत थी। इसलिए कहानी का नाम ‘हार की जीत’ रखा गया — हार में छिपी हुई जीत।
📌 Imp मुहावरे (Idioms from the Story)
| मुहावरा | अर्थ | Meaning (English) |
|---|---|---|
| लट्टू होना | मोहित हो जाना / बहुत प्रेम करना | To be deeply fond of |
| हृदय पर साँप लोटना | ईर्ष्या / लालच से जल उठना | To burn with jealousy/greed |
| फूले न समाना | बहुत अधिक खुश होना | Overjoyed |
| मुँह मोड़ लेना | ध्यान हटा लेना / उपेक्षा करना | To turn away/ignore |
| मुख खिल जाना | प्रसन्न हो जाना | To brighten with joy |
| न्योछावर कर देना | समर्पित कर देना | To devote/sacrifice |
📝 Imp शब्द-अर्थ (Imp Word Meanings)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| लहलहाते | हरे-भरे, फलते-फूलते |
| अर्पण | समर्पित करना, देना |
| बलवान | ताकतवर |
| खरहरा करना | घोड़े को साफ़/मालिश करना |
| भ्रांति | भ्रम, गलतफहमी |
| कीर्ति | प्रसिद्धि, यश |
| अधीर | बेचैन, व्याकुल |
| बाँका | सुंदर, तेज़-तर्रार |
| बाहुबल | भुजाओं की शक्ति |
| अपाहिज | विकलांग, लाचार |
| पश्चाताप | पछतावा |
| अस्तबल | घोड़े रखने का स्थान |
❓ प्रश्न-उत्तर : मेरी समझ से
(क)(1) सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ?
✔ बाबा भारती असावधान हो गए। — घोड़ा छिन जाने के डर से रातों को नींद नहीं आती थी; बाद में सतर्कता से पश्चाताप-भरे विचार आए। (सही विकल्प: बाबा भारती असावधान हो गए।)
(क)(2) “बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।” इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है?
✔ बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे। — साधु होते हुए भी अपनी प्रिय वस्तु की तारीफ़ सुनने की इच्छा एक स्वाभाविक मानवीय भाव है, जिससे सिद्ध होता है कि वे भी मनुष्य ही थे।
❓ प्रश्न-उत्तर : शीर्षक
(क) लेखक ने इस कहानी का नाम ‘हार की जीत’ क्यों रखा होगा?
बाबा भारती ने अपना प्रिय घोड़ा खोकर भी अपने पवित्र और उदार विचारों से डाकू का हृदय जीत लिया और घोड़ा भी वापस पा लिया। इस प्रकार हार में ही उनकी सच्ची जीत छिपी थी, इसलिए यह शीर्षक बिलकुल सटीक है।
(ख) यदि आपको इस कहानी का कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे?
इस कहानी को “भलाई की शक्ति” या “विश्वास की जीत” नाम दिया जा सकता है — क्योंकि पूरी कहानी का मूल संदेश यही है कि भलाई और विश्वास बुराई पर विजय पाते हैं। (छात्र अपने अनुसार भी नाम सोच सकते हैं।)
(ग) बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?
बाबा भारती ने यह वचन लिया कि खड्गसिंह इस घटना (घोड़ा छल से लेने की बात) को किसी के सामने प्रकट नहीं करेगा, ताकि लोग गरीबों और ज़रूरतमंदों पर विश्वास करना न छोड़ दें।
❓ प्रश्न-उत्तर : सोच-विचार के लिए
पंक्ति — “दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।”
(क) किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था?
बाबा भारती और डाकू खड्गसिंह — दोनों के आँसुओं का मेल उसी भूमि की मिट्टी पर हुआ था।
(ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था?
बाबा भारती के आँसू अपने प्रिय घोड़े को वापस पाने की खुशी और प्रेम के थे, जबकि खड्गसिंह के आँसू अपने बुरे कर्म पर पश्चाताप (पछतावे) के थे। भाव अलग थे, पर दोनों की भावनाएँ सच्ची थीं।
❓ प्रश्न-उत्तर : पंक्तियों पर चर्चा
“भगवत-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।”
बाबा भारती भजन के बाद बचा हुआ सारा समय अपने घोड़े की देखभाल में लगा देते थे। इससे घोड़े के प्रति उनका गहरा प्रेम प्रकट होता है।
“बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से।”
बाबा को अपने सुंदर घोड़े पर गर्व था, इसलिए उन्होंने गर्व से दिखाया; खड्गसिंह ने ऐसा बेजोड़ घोड़ा पहले कभी नहीं देखा था, इसलिए वह आश्चर्यचकित रह गया।
“वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।”
डाकू होने के कारण खड्गसिंह मनमानी करता था — जो चीज़ उसे भा जाती, उसे वह छीनकर अपनी बना लेता था। यह उसके लालची और बलपूर्वक स्वभाव को दिखाता है।
“बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।”
जैसे असहाय बकरा कसाई के सामने बेबस होता है, वैसे ही बाबा भारती खड्गसिंह के सामने विवश थे। उन्होंने बिना लड़े स्वीकार कर लिया कि घोड़ा अब खड्गसिंह का है — यह उनकी विवशता व सादगी दिखाता है।
“उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।”
आदतवश बाबा के पैर सुबह घोड़े के अस्तबल की ओर बढ़ गए, पर फाटक पर पहुँचकर उन्हें याद आया कि घोड़ा तो अब वहाँ है ही नहीं — इससे उनकी गहरी उदासी झलकती है।
😊 मन के भाव (Feelings in the Story)
कहानी में विभिन्न पात्रों ने कब-कब कौन-से भाव अनुभव किए:
| भाव | कौन / कब |
|---|---|
| चकित (आश्चर्य) | खड्गसिंह — जब उसने पहली बार सुलतान की चाल देखी। |
| प्रसन्नता | बाबा भारती — जब वे सुलतान पर सवार होकर घूमने जाते थे। |
| अधीर | खड्गसिंह — घोड़े की चाल देखने के लिए बेचैन; बाबा — प्रशंसा सुनने को। |
| करुणा | बाबा भारती — जब उन्होंने कराहते अपाहिज को घोड़े पर बैठाया। |
| डर | बाबा भारती — जब खड्गसिंह ने घोड़ा छीनने की धमकी दी। |
| निराशा | बाबा भारती — जब अपाहिज (खड्गसिंह) घोड़ा दौड़ाकर भाग गया। |
🌟 कहानी का संदेश (Imp Message)
यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची भलाई और प्रेम में इतनी शक्ति होती है कि वह एक कठोर डाकू का हृदय तक बदल सकती है। बाबा भारती को अपने घोड़े से अधिक इस बात की चिंता थी कि लोगों का एक-दूसरे पर, विशेषकर गरीबों पर, विश्वास बना रहे। यही मानवता की सबसे बड़ी जीत है।
