Class 6 Chapter 11 चेतक की वीरता

चेतक की वीरता

— श्यामनारायण पाण्डेय

परिचय (Introduction)

यह ओजपूर्ण वीर रस की कविता कवि श्यामनारायण पाण्डेय की प्रसिद्ध काव्यकृति 'हल्दीघाटी' का एक अंश है। इसमें महाराणा प्रताप के वीर और स्वामिभक्त घोड़े चेतक की अद्भुत फुर्ती, वीरता और साहस का सजीव वर्णन है। हल्दीघाटी के युद्ध में चेतक ने जो शौर्य दिखाया, वह इस कविता का प्राण है।

In English: This is a heroic (Veer Rasa) poem, an extract from Shyamnarayan Pandey's famous work 'Haldighati'. It vividly describes the courage, speed and loyalty of Chetak, the brave warhorse of Maharana Pratap, during the famous Battle of Haldighati.

कवि से परिचय — श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991)

श्यामनारायण पाण्डेय वीर रस की कविताओं के लिए प्रसिद्ध कवि हैं। उनकी सर्वाधिक लोकप्रिय काव्यकृति 'हल्दीघाटी' का प्रकाशन सन 1939 में हुआ था। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम वर्षों में इस काव्यकृति ने स्वतंत्रता सेनानियों में सांस्कृतिक एकता और उत्साह का संचार किया था।

कविता (The Poem)

रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर
चेतक बन गया निराला था।
राणा प्रताप के घोड़े से
पड़ गया हवा को पाला था॥

गिरता न कभी चेतक-तन पर
राणा प्रताप का कोड़ा था।
वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर
या आसमान पर घोड़ा था॥

जो तनिक हवा से बाग हिली
लेकर सवार उड़ जाता था।
राणा की पुतली फिरी नहीं
तब तक चेतक मुड़ जाता था॥

कौशल दिखलाया चालों में
उड़ गया भयानक भालों में।
निर्भीक गया वह ढालों में
सरपट दौड़ा करवालों में॥

है यहीं रहा, अब यहाँ नहीं
वह वहीं रहा है वहाँ नहीं।
थी जगह न कोई जहाँ नहीं
किस अरि-मस्तक पर कहाँ नहीं॥

बढ़ते नद-सा वह लहर गया
वह गया गया फिर ठहर गया।
विकराल बज्र-मय बादल-सा
अरि की सेना पर घहर गया॥

भाला गिर गया, गिरा निषंग,
हय-टापों से खन गया अंग।
वैरी-समाज रह गया दंग
घोड़े का ऐसा देख रंग॥
हवा से भी तेज़ दौड़ता वीर चेतक

भावार्थ / व्याख्या (Explanation)

पद्यांश 1: युद्ध के मैदान में चौकड़ी भरता (छलाँग लगाता) हुआ चेतक अनोखा बन गया था। राणा प्रताप का यह घोड़ा इतना तेज़ था कि हवा को भी पीछे छोड़ देता था।

Meaning: Leaping across the battlefield, Chetak became extraordinary. Rana Pratap's horse ran so fast that it left even the wind behind.

पद्यांश 2: राणा प्रताप को कभी चेतक पर कोड़ा (चाबुक) मारने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। वह शत्रु के सिर पर दौड़ता या आसमान पर उड़ता-सा प्रतीत होता था।

Meaning: Rana never needed to whip Chetak. The horse ran over the enemies' heads, appearing to gallop across the sky itself.

पद्यांश 3: हवा से लगाम ज़रा-सी हिलते ही चेतक सवार को लेकर उड़ जाता था। राणा की आँख की पुतली घूमने से पहले ही चेतक उस दिशा में मुड़ जाता था — अर्थात् वह राणा का इशारा तुरंत समझ लेता था।

Meaning: At the slightest movement of the rein, Chetak flew off. He turned before Rana even glanced that way — he understood his master's intentions instantly.

पद्यांश 4: चेतक ने अपनी चालों में गजब का कौशल दिखाया। वह भयानक भालों, ढालों और करवालों (तलवारों) के बीच निर्भीक होकर सरपट दौड़ता रहा।

Meaning: Chetak showed great skill in his movements, dashing fearlessly through deadly spears, shields and swords.

पद्यांश 5: चेतक की गति इतनी तीव्र थी कि वह पल भर में एक स्थान से दूसरे स्थान पहुँच जाता। "अभी यहाँ था, अभी वहाँ नहीं" — ऐसा कोई स्थान न बचा जहाँ वह न पहुँचा हो।

Meaning: Chetak was so swift that he seemed to be everywhere at once — here one moment, gone the next. No spot on the battlefield was left untouched by him.

पद्यांश 6–7: बढ़ती नदी की लहर की तरह वह शत्रु सेना पर विकराल बादल बनकर टूट पड़ा। इस दृश्य को देखकर भाला और निषंग (तरकश) गिर पड़े, घोड़े की टापों से शत्रुओं के अंग कट गए और वैरी-समाज घोड़े का ऐसा रूप देखकर दंग (हैरान) रह गया।

Meaning: Like a rising river-wave and a fearsome thundercloud, Chetak crashed upon the enemy army. Seeing his ferocity, the enemies were stunned — their weapons fell and they were crushed under his hooves.

प्रश्न-उत्तर (Questions & Answers)

मेरी समझ से — सही उत्तर चुनिए

1. चेतक शत्रुओं की सेना पर किस प्रकार टूट पड़ता था?

✔ सही उत्तर: चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था।

2. 'लेकर सवार उड़ जाता था।' इस पंक्ति में 'सवार' शब्द किसके लिए आया है?

✔ सही उत्तर: महाराणा प्रताप।

पंक्तियों पर चर्चा

(क) "निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में।"

इसका अर्थ है — चेतक बिना किसी भय के शत्रुओं की ढालों और तलवारों के बीच तेज़ी से दौड़ता रहा। यह पंक्ति चेतक की निर्भीकता और वीरता को दर्शाती है।

(ख) "भाला गिर गया, गिरा निषंग, हय-टापों से खन गया अंग।"

इसका अर्थ है — युद्ध की भयंकरता में भाले और तरकश ज़मीन पर गिर पड़े, और चेतक की टापों से शत्रुओं के अंग कट-छिद गए। यह चेतक की प्रचंड शक्ति और युद्ध की विकरालता का चित्रण करती है।

शीर्षक

आप इस कविता को क्या शीर्षक देना चाहेंगे और क्यों?

इस कविता को "वीर चेतक" या "स्वामिभक्त चेतक" शीर्षक दिया जा सकता है, क्योंकि पूरी कविता चेतक की वीरता, फुर्ती और अपने स्वामी राणा प्रताप के प्रति स्वामिभक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है। यह शीर्षक कविता के मूल भाव को स्पष्ट करता है।

आपकी बात

(ख) कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए। इस पर अपने विचार लिखिए।

युद्ध से केवल विनाश, मृत्यु और पीड़ा होती है। इससे मनुष्य, पशु और प्रकृति सभी को हानि पहुँचती है। आपसी मतभेदों को बातचीत और शांति से सुलझाना चाहिए। शांति ही प्रगति और खुशहाली का मार्ग है, इसलिए युद्ध से बचना ही श्रेष्ठ है।

पंक्तियाँ और भावार्थ (Lines & Meanings)

पंक्तिभावार्थ
राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था।चेतक हवा से भी तेज़ दौड़ता था, मानो हवा और चेतक में दौड़ की प्रतियोगिता हो।
वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था।शत्रुओं के सिर के ऊपर से होता हुआ वह ऐसे दौड़ता जैसे आसमान में उड़ रहा हो।
जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था।चेतक की फुर्ती ऐसी थी कि लगाम ज़रा-सा हिलते ही सरपट हवा में उड़ने लगता।
राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था।राणा की निगाह मुड़ने से पहले ही वह उस ओर मुड़ जाता — उनका भाव समझ जाता था।
विकराल बज्र-मय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया।शत्रु सेना पर भयानक वज्रमय बादल बनकर टूट पड़ता और शत्रुओं का नाश करता।

Imp बिंदु (Imp Points)

  • यह कविता श्यामनारायण पाण्डेय रचित 'हल्दीघाटी' काव्यकृति का अंश है।
  • कविता में वीर रस की प्रधानता है।
  • चेतक महाराणा प्रताप का वीर, तेज़ और स्वामिभक्त घोड़ा था।
  • चेतक की सबसे बड़ी विशेषता उसकी अद्भुत गति (फुर्ती) और स्वामी के इशारे को तुरंत समझ लेना है।
  • कवि ने चेतक की तुलना हवा, नदी की लहर और वज्रमय बादल से की है।
  • कविता में तुकांत शैली (rhyme) का सुंदर प्रयोग है — जैसे निराला/पाला, कोड़ा/घोड़ा।
चेतक के गुण चेतक तीव्र गति निर्भीकता स्वामिभक्ति कौशल
Imp Literary Terms (English):
Veer Rasa — the heroic sentiment; the main emotion of this poem celebrating bravery.
Chetak — the legendary loyal warhorse of Maharana Pratap in the Battle of Haldighati.
Tukant Shaili (Rhyme Scheme) — the matching end-sounds of lines that make the poem musical and powerful.
Upama / Simile — comparing Chetak to the wind, a river-wave, and a thundercloud to show his speed and force.