Class 6 Chapter 10 परीक्षा

परीक्षा

लेखक — मुंशी प्रेमचंद (1880–1936) | कक्षा 6 — मल्हार

📖 परिचय (Introduction)

‘परीक्षा’ हिंदी के महान लेखक प्रेमचंद की एक प्रेरक कहानी है। यह कहानी बताती है कि किसी योग्य व्यक्ति को चुनने के लिए उसकी डिग्री या पढ़ाई से अधिक ज़रूरी उसके गुण, दया, उदारता और आत्मबल होते हैं।

In English: ‘Pariksha’ (The Test) shows that true worth lies in a person’s character — kindness, courage and generosity — not in degrees or outward show. A wise minister tests candidates secretly to find the right successor.
दीवान नया दीवान परीक्षा से चुनाव

📜 कहानी (The Story)

1. दीवान का सेवानिवृत्त होना

देवगढ़ रियासत के दीवान सरदार सुजानसिंह बूढ़े हो गए। उन्होंने महाराज से प्रार्थना की कि अब उनकी अवस्था ढल गई है और राज-काज संभालने की शक्ति नहीं रही। उन्हें डर था कि कहीं कोई भूल-चूक होने पर उनकी सारी ज़िंदगी की नेकनामी मिट्टी में न मिल जाए। महाराज ने प्रार्थना स्वीकार की, पर शर्त रखी कि नया दीवान सुजानसिंह को ही खोजना पड़ेगा।

2. विज्ञापन और उम्मीदवारों की भीड़

अखबारों में विज्ञापन निकला कि देवगढ़ के लिए एक योग्य दीवान चाहिए। शर्त थी — उम्मीदवार का ग्रेजुएट होना ज़रूरी नहीं, पर हृष्ट-पुष्ट (स्वस्थ) होना आवश्यक है। एक महीने तक उनके रहन-सहन और आचार-विचार की परख की जाएगी। विज्ञापन से पूरे देश में तहलका मच गया और सैकड़ों लोग परीक्षा देने पहुँचे।

In English: The advert stated character mattered more than education. Hundreds of candidates flocked in and each tried to appear good — the lazy suddenly walked in gardens, the rude spoke politely, and book-haters pretended to study.

3. हॉकी का खेल

एक दिन उम्मीदवारों में हॉकी का खेल शुरू हुआ। पढ़े-लिखे लोग शतरंज और ताश जैसे खेल खेलते थे; दौड़-कूद को बच्चों का खेल समझते थे। खेल बड़े उत्साह से चला, पर अँधेरा होने तक हार-जीत का फैसला न हो सका।

4. किसान और गाड़ी की घटना (कहानी का मोड़)

खेल के पास एक नाले पर एक किसान अनाज से भरी गाड़ी लेकर फँस गया। कीचड़ और ऊँची चढ़ाई के कारण बैल गाड़ी ऊपर नहीं खींच पा रहे थे। किसान ने खिलाड़ियों की ओर सहमी हुई आँखों से देखा, पर उनकी आँखों में स्वार्थ और घमंड था, उदारता और वात्सल्य का नाम भी न था।

पर उसी समूह में एक युवक ऐसा था जिसके हृदय में दया और साहस दोनों थे। हॉकी खेलते समय उसके पैर में चोट लगी थी, फिर भी वह कोट उतारकर किसान की मदद के लिए गया और मेहनत करके गाड़ी नाले के ऊपर चढ़ा दी।

“गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।”
— अर्थ: कोशिश और परिश्रम करने पर ही सफलता मिलती है।

5. निर्णय — असली दीवान

चुनाव के दिन दरबार सजाया गया। सुजानसिंह ने घोषणा की कि इस पद के लिए ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत थी जिसके हृदय में दया हो और साथ ही आत्मबल। वह युवक — पंडित जानकीनाथ — जो घायल होकर भी गरीब किसान की मदद के लिए आगे आया, उसे ही दीवानी के लिए चुना गया। बाकी उम्मीदवारों की आँखों में सत्कार नहीं, ईर्ष्या थी।

In English (moral): The young man who selflessly helped a poor farmer — despite his own injury — proved he had a kind heart and inner strength. Real ability is shown through action, not appearance.

⭐ Imp बातें (Imp Points to Remember)

  • सच्ची योग्यता डिग्री में नहीं, गुणों में होती है।
  • दिखावा (show-off) से कोई महान नहीं बनता; असली परख कर्म से होती है।
  • दया + आत्मबल = एक अच्छे नेता के दो सबसे ज़रूरी गुण।
  • सबसे बड़ी परीक्षा वह होती है जो चुपचाप, बिना बताए ली जाती है।

🔑 Imp शब्द (Imp Terms & Meanings)

शब्दअर्थ (Meaning)
दीवानरियासत का प्रधान मंत्री / मुख्य अधिकारी (Chief Minister)
नेकनामीअच्छी प्रतिष्ठा, सम्मान (Good reputation)
नीतिकुशलनीति में निपुण, बुद्धिमान (Skilled in policy)
हृष्ट-पुष्टस्वस्थ और बलवान (Healthy & strong)
आत्मबलमन की शक्ति, आत्मविश्वास (Inner strength)
वात्सल्यस्नेह, ममता (Affection / love)
ईर्ष्याजलन (Jealousy)
उदारतादयालुता, बड़ा दिल (Generosity)

❓ प्रश्न-उत्तर (Questions & Answers)

मेरी समझ से — सही उत्तर

प्र.1 — महाराज ने दीवान को ही उत्तराधिकारी चुनने का कार्य किस गुण के कारण सौंपा?
✔️ उत्तर: नीतिकुशलता — क्योंकि दीवान अनुभवी और नीति में निपुण थे, इसलिए महाराज को उनके निर्णय पर पूरा भरोसा था।
प्र.2 — दीवान साहब द्वारा नौकरी छोड़ने का क्या कारण था?
✔️ उत्तर: राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना — बुढ़ापे के कारण उनमें अब काम संभालने की शक्ति नहीं बची थी।

सोच-विचार के लिए

(क) नौकरी की चाह में आए लोगों ने क्या-क्या प्रयत्न किए?
जो देर तक सोते थे वे सुबह बगीचे में टहलने लगे; जो नौकरों से बदतमीज़ी करते थे वे ‘आप’ और ‘जनाब’ कहकर बात करने लगे; जिसे किताब से नफरत थी वह बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने का दिखावा करने लगा। सब खुद को अच्छा दिखाने की कोशिश कर रहे थे।
(ख) “उसे किसान की सूरत देखते ही सब बातें ज्ञात हो गईं” — खिलाड़ी को कौन-कौन सी बातें पता चलीं?
युवक समझ गया कि किसान की गाड़ी कीचड़ में फँसी है, बैल कमज़ोर हैं, किसान अकेला और परेशान है, और उसे तुरंत मदद की ज़रूरत है।
(ग) किनकी आँखों में सत्कार था और किनकी आँखों में ईर्ष्या? क्यों?
रियासत के कर्मचारियों और रईसों की आँखों में सत्कार (सम्मान) था, क्योंकि वे जानकीनाथ की सच्चाई और अच्छे गुणों की कद्र करते थे। बाकी उम्मीदवारों की आँखों में ईर्ष्या थी, क्योंकि वे चयनित न हो सके और जलन महसूस कर रहे थे।

खोजबीन (वाक्य खोजें)

(क) शायद युवक बूढ़े किसान की असलियत पहचान गया था —
✔️ वाक्य: “किसान ने भी उसकी ओर तीव्र दृष्टि से देखा। शायद उसके दिल के संदेह को भाँप गया।” तथा युवक का सोचना — “क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं?”
(ख) नौकरी के लिए आए लोग किसी तरह बस नौकरी पा लेना चाहते थे —
✔️ वाक्य: “लोग समझते थे कि एक महीने का झंझट है, किसी तरह काट लें, कहीं कार्य सिद्ध हो गया तो कौन पूछता है?”

समस्या और समाधान

किसके सामनेसमस्यासमाधान
महाराजबूढ़े दीवान का काम छोड़ना और नए योग्य दीवान की ज़रूरतदीवान को ही नया योग्य दीवान चुनने का कार्य सौंपा
दीवानबुढ़ापे में शक्ति न होना, नेकनामी मिटने का डरविज्ञापन देकर, गुप्त परीक्षा से सच्चे गुणी व्यक्ति की खोज की
उम्मीदवार लोगनौकरी पाने के लिए खुद को योग्य साबित करनादिखावा करना (जबकि असली परीक्षा उनके स्वाभाविक व्यवहार की थी)

शीर्षक (Title) पर चर्चा

(क) प्रेमचंद ने कहानी का नाम ‘परीक्षा’ क्यों रखा होगा?
क्योंकि पूरी कहानी में उम्मीदवारों की एक गुप्त परीक्षा ली जा रही थी — यह परखने के लिए कि उनमें दया, उदारता और आत्मबल है या नहीं। इसलिए ‘परीक्षा’ नाम पूरी तरह उपयुक्त है।
(ख) कोई अन्य नाम आप क्या देंगे?
जैसे — “सच्चा दीवान” या “गुणों की परख”, क्योंकि कहानी दिखाती है कि असली योग्यता गुणों से पहचानी जाती है, दिखावे से नहीं।

💭 पाठ से आगे — अनुमान/कल्पना से

(क) अखबारों में नौकरी का विज्ञापन किसने निकलवाया होगा?
दीवान सरदार सुजानसिंह ने, क्योंकि महाराज ने उन्हें ही नया दीवान खोजने की ज़िम्मेदारी दी थी। ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि पूरी परीक्षा का प्रबंध वही कर रहे थे।
(ख) विज्ञापन ने पूरे देश में तहलका क्यों मचा दिया होगा?
क्योंकि दीवान का पद बहुत ऊँचा, सम्मानजनक और आरामदायक था, और उसके लिए ग्रेजुएट होना भी ज़रूरी नहीं था। इसलिए हर व्यक्ति को लगा कि यह उसके भाग्य आज़माने का मौका है।

आपकी बात

(क) अगर आप दीवान की जगह होते तो योग्य व्यक्ति कैसे चुनते?
मैं भी लोगों के स्वाभाविक व्यवहार को देखता — कि वे संकट में दूसरों की मदद करते हैं या नहीं, ईमानदार हैं या नहीं, और मुश्किल समय में धैर्य रखते हैं या नहीं। केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि चरित्र देखता।
(ख) कक्षा का मॉनिटर आप कैसे चुनेंगे? किन गुणों को देखेंगे?
मैं ईमानदारी, अनुशासन, नेतृत्व, दूसरों की मदद करने की भावना और निष्पक्षता जैसे गुण देखूँगा। परख के लिए यह देखूँगा कि वह झगड़े को शांति से सुलझाता है या नहीं, और सबके साथ समान व्यवहार करता है या नहीं।
In English: A good leader/monitor should be chosen for honesty, fairness, discipline and willingness to help others — tested through real behaviour, just like Prem­chand’s story teaches us.

✍️ लेखक परिचय (About the Author)

प्रेमचंद (1880–1936) हिंदी के महान लेखक और ‘कथा-सम्राट’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। उनका वास्तविक नाम धनपतराय था। उन्होंने समाज-सुधार और राष्ट्रीय भावना से भरी कई कहानियाँ और उपन्यास लिखे। उनकी प्रसिद्ध कहानियाँ — ईदगाह, बड़े भाई साहब, गुल्ली डंडा, दो बैलों की कथा आदि हैं।