क्या लिखूँ ?
यह पाठ लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के निबंध-लेखन अनुभव, विचार, कठिनाइयों और शैली पर आधारित है। इसमें लेखक बताता है कि अच्छा निबंध लिखना केवल विषय चुन लेने से नहीं होता, बल्कि विचार, अनुभव, रूपरेखा, भाषा और अभिव्यक्ति सबका सही मेल जरूरी होता है.
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Toggleलेखक परिचय
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म 1894 में खैरागढ़ में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार, आलोचक, कवि और व्यंग्यकार थे। उनकी रचनाओं में समाज, अध्यात्म, लोकजीवन और विचार की गहराई मिलती है.
इस पाठ “क्या लिखूँ?” में लेखक ने निबंध लिखने की कठिनाई, सही पद्धति, शैली और विचार प्रक्रिया को बहुत रोचक ढंग से समझाया है। यह पाठ केवल निबंध नहीं सिखाता, बल्कि लेखन के पीछे की मानसिक तैयारी भी बताता है.
पाठ का मुख्य भाव
लेखक कहता है कि हर बार निबंध लिखना आसान नहीं होता। कई बार विषय सामने होता है, पर विचार तुरंत नहीं आते। तब लेखक को सोचना, सामग्री जुटाना, रूपरेखा बनाना और भाषा का चुनाव करना पड़ता है.
पाठ में लेखक को दो विषयों पर निबंध लिखना है — “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” और “समाज-सुधार”। इन दोनों विषयों के माध्यम से वह बताता है कि निबंध-लेखन केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि अनुभव और अभिव्यक्ति की कला भी है.
लेखक ए. जी. गार्डिनर के विचार का उल्लेख करता है कि कभी-कभी लेखन एक विशेष मानसिक अवस्था में अपने-आप आता है। लेकिन लेखक खुद मानता है कि उसे लिखने के लिए अधिक सोच-विचार और मेहनत करनी पड़ती है.
विस्तृत व्याख्या
1) लेखन की कठिनाई
लेखक कहता है कि कुछ लेखकों के लिए लिखना सहज होता है, पर उसके लिए यह मेहनत का काम है। उसे विषय पर सोचने, सामग्री याद करने और सही रूप देने में समय लगता है.
2) विषय से अधिक भाव
“हैट” और “खूँटी” का उदाहरण देकर लेखक बताता है कि असली चीज लेखक के मन के भाव हैं, केवल विषय नहीं। विषय तो एक सहारा है, पर निबंध की जान लेखक की अनुभूति और अभिव्यक्ति में होती है.
3) निबंध के नियम और समस्या
कुछ आचार्य कहते हैं कि निबंध छोटा होना चाहिए, उसमें सामग्री और शैली दोनों अच्छे होने चाहिए, रूपरेखा पहले बननी चाहिए और भाषा प्रवाहपूर्ण होनी चाहिए। लेखक इन नियमों को पढ़ता है, पर महसूस करता है कि व्यवहार में इन्हें लागू करना हमेशा आसान नहीं होता.
4) मॉन्तेन की पद्धति
लेखक अंग्रेजी निबंधकार मॉन्तेन का उदाहरण देता है, जो अपने देखे, सुने और अनुभव किए हुए जीवन को स्वतंत्र रूप से लिखते थे। लेखक को यह तरीका अच्छा लगता है, क्योंकि इसमें कृत्रिमता कम और सच्चाई अधिक होती है.
5) अमीर खुसरो का प्रसंग
लेखक अमीर खुसरो की कहानी याद करता है, जिसमें उन्होंने एक ही रचना में कई अलग विषयों को जोड़ दिया था। इससे लेखक को प्रेरणा मिलती है कि वह भी “दूर के ढोल” और “समाज-सुधार” दोनों विषयों को एक साथ जोड़ सकता है.
6) “दूर के ढोल सुहावने” का अर्थ
दूर से कोई चीज आकर्षक लगती है, क्योंकि उसकी कठिनाई, शोर या सच्चाई पूरी तरह दिखाई नहीं देती। पास आने पर उसकी वास्तविकता समझ में आती है। यही बात भविष्य, अतीत और सामाजिक विचारों पर भी लागू होती है.
7) तरुण और वृद्ध
लेखक कहता है कि तरुणों को भविष्य अच्छा लगता है, जबकि वृद्धों को अतीत सुखद लगता है। दोनों वर्तमान से पूरी तरह संतुष्ट नहीं रहते। तरुण बदलाव चाहते हैं और वृद्ध परंपरा को महत्व देते हैं.
8) समाज-सुधार
मानव इतिहास में हर युग में सुधार की आवश्यकता रही है। समाज में नए दोष आते रहते हैं, इसलिए सुधार भी चलते रहते हैं। बुद्ध, महावीर, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, दयानंद और गांधी जैसे लोगों ने समाज को नई दिशा दी.
निबंध लेखन की कला
पाठ के अनुसार निबंध का अर्थ है — किसी विचार को भली-भाँति बाँधकर प्रस्तुत करना। इसमें अनुभव, विचार, भावना, तर्क और भाषा का संतुलित उपयोग होता है.
- विषय का सही चुनाव करना चाहिए.
- सामग्री और विचार इकट्ठा करने चाहिए.
- मनन करके रूपरेखा बनानी चाहिए.
- शैली सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली होनी चाहिए.
- लेखन में अनुभव और सच्चाई होनी चाहिए.
अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
1. “हैट” और “खूँटी” का उल्लेख किस भाव को उजागर करता है?
उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता.
कारण: लेखक बताता है कि जैसे हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी चल सकती है, वैसे ही मन के भाव व्यक्त करने के लिए कोई भी विषय माध्यम बन सकता है.
2. मॉन्तेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना.
कारण: मॉन्तेन ने अपने देखे, सुने और अनुभव किए हुए जीवन को लिखा, इसलिए लेखक को यह तरीका सच्चा और प्रभावी लगता है.
3. यह तुलना किस पर आधारित है?
उत्तर: (घ) अभिलाषा और अनुभव.
कारण: तरुण भविष्य की आशा में जीते हैं, जबकि वृद्ध अनुभवों के कारण अतीत को सुखद मानते हैं.
4. अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में है?
उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए.
5. समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
उत्तर: (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है.
मेरी समझ, मेरे विचार
1. ए. जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में अंतर
गार्डिनर के अनुसार लेखन एक विशेष मानसिक अवस्था में अपने-आप आता है। लेखक के अनुसार उसे लिखने के लिए मेहनत, चिंता और सोच-विचार करना पड़ता है.
2. वर्तमान से असंतोष के कारण
तरुणों को भविष्य अधिक अच्छा लगता है, इसलिए वे वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं। वृद्धों को अतीत श्रेष्ठ लगता है, इसलिए वे वर्तमान को अधूरा मानते हैं.
3. नहमता और अहमता के विषय तथा कठिनाइयाँ
नहमता “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” पर और अहमता “समाज-सुधार” पर निबंध लिखवाना चाहती हैं। लेखक को सामग्री, समय, रूपरेखा और विषय-विस्तार की कठिनाइयाँ आती हैं.
4. आचार्यों की युक्तियाँ और मेरी तैयारी
आचार्यों ने छोटा, सुंदर, व्यवस्थित, रूपरेखायुक्त और प्रवाहपूर्ण निबंध लिखने की बात कही है। मैं पहले विषय समझता हूँ, फिर बिंदु बनाता हूँ, उदाहरण सोचता हूँ और उसके बाद लेखन करता हूँ.
5. देखना, सुनना और अनुभव करना क्यों जरूरी है?
इनसे लेखन सजीव बनता है। अनुभव से निबंध में सच्चाई आती है और पाठक उससे आसानी से जुड़ पाता है.
भाव-विस्तार
1. “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं...”
जो युवा अभी जीवन की कठिनाइयों से नहीं गुजरे, उन्हें संसार सुंदर और आसान लगता है। उन्हें जिम्मेदारियों का पूरा अनुभव नहीं होता, इसलिए संसार मनमोहक दिखाई देता है.
2. “मनुष्य जाति के इतिहास में...”
हर युग में समाज में कुछ न कुछ कमियाँ रही हैं। इसलिए सुधार की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है. समाज को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी है.
3. “आज जो तरुण हैं...”
समय के साथ व्यक्ति की सोच बदलती है। आज का युवा भविष्य देखता है, पर आगे चलकर वही अपने अतीत को गौरवपूर्ण मानने लगता है.
4. “निबंध छोटा होना चाहिए...”
छोटे निबंध में विचार स्पष्ट और सटीक रहते हैं। बहुत लंबा निबंध कई बार बिखर जाता है, इसलिए छोटा निबंध अधिक प्रभावशाली हो सकता है.
व्याकरण
समास
समास का अर्थ है संक्षेप। दो या अधिक शब्दों के मेल से बनने वाला नया शब्द समास कहलाता है.
| समासिक पद | समास विग्रह | समास का नाम |
|---|---|---|
| निबंधशास्त्र | निबंध का शास्त्र | तत्पुरुष |
| समाज-सुधार | समाज का सुधार | तत्पुरुष |
| जीवन-संग्राम | जीवन का संग्राम | तत्पुरुष |
| अतीत-गौरव | अतीत का गौरव | तत्पुरुष |
| भाई-बहन | भाई और बहन | द्वंद्व |
| धीरे-धीरे | धीरे-धीरे | अव्ययीभाव |
उपसर्ग और प्रत्यय
उपसर्ग शब्द के पहले जुड़ते हैं और प्रत्यय शब्द के बाद। इनसे नए शब्द बनते हैं.
रिक्त स्थान के उत्तर
- निबंध लिखना बड़ी कठिनाई की बात है.
- वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है.
- वाक्यों में कुछ अस्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गांभीर्य ला देती है.
नए शब्द
| मूल शब्द | नए शब्द |
|---|---|
| मधुर | मधुरता, सुमधुर, मधुरमय |
| सुधार | सुधारक, सुधारवादी, सुधारात्मक |
| सुंदर | सुंदरता, असुंदर, सुसज्जित |
| गति | प्रगति, अवगति, गतिशील |
| समाज | सामाजिक, समाजवाद, समाजसेवी |
भाव एक, शब्द अनेक
- विचार – मनन – चिंतन
- सुहावने – मधुर – मनमोहक
- उल्लास – आनंद – प्रमोद
- कठिनाई – समस्या – गुत्थी
रचनात्मक उत्तर
“आम के आम, गुठलियों के दाम” और “जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास”
जैविक खाद बनाना बहुत उपयोगी है। इससे घर का कचरा काम में आ जाता है और पौधों को अच्छी खाद मिलती है। यानी एक काम से दो लाभ होते हैं, इसलिए यह लोकोक्ति इस विषय पर सही बैठती है.
डायरी शैली उत्तर
मैंने एक बड़े स्कूल के बारे में बहुत अच्छी बातें सुनी थीं। दूर से वह बहुत आकर्षक लगता था। लेकिन जब मैं वहाँ गया, तब पता चला कि वहाँ अनुशासन बहुत कड़ा है और पढ़ाई भी कठिन है। तब मुझे समझ में आया कि दूर से हर चीज अच्छी लग सकती है, पर पास जाकर उसकी सच्चाई पता चलती है.
समाज-सुधार पर मेरा विचार
अगर मुझे मौका मिले, तो मैं शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण और समानता पर काम करना चाहूँगा। मैं लोगों को जागरूक करूँगा, बच्चों की मदद करूँगा और समाज में अच्छे व्यवहार को बढ़ावा दूँगा. छोटे-छोटे सुधार मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं.
“मैं क्यों लिखता हूँ?” का सरल अर्थ
अज्ञेय के अनुसार लेखक लिखकर ही समझता है कि वह क्यों लिखता है। कई बार लेखन भीतर की बेचैनी, विचार या दबाव को व्यक्त करने का माध्यम होता है। सच्चा लेखन भीतर की प्रेरणा से जन्म लेता है.
शब्द-संपदा
| शब्द | सरल अर्थ |
|---|---|
| स्फूर्ति | उत्साह, ऊर्जा |
| आवेग | तेज प्रेरणा या भाव |
| यथार्थ | सच्चाई |
| रहस्य | गुप्त बात |
| अनुसंधान | खोज, जाँच |
| दुर्बोध | जो जल्दी समझ में न आए |
| गांभीर्य | गंभीरता, गहराई |
| अभिव्यक्ति | भाव प्रकट करना |
| समावेश | शामिल करना |
| कोलाहल | शोर-शराबा |
