नहीं होना बीमार 🩺
पाठ 5 — मल्हार | लेखक: स्वयं प्रकाश (1947–2019)
Table of Contents
Toggle📖परिचय (Introduction)
यह कहानी एक छोटे बच्चे की है जो अपने बीमार पड़ोसी सुधाकर काका को अस्पताल में देखने जाता है। वहाँ का साफ-सुथरा माहौल और स्वादिष्ट खाना देखकर उसे लगता है कि बीमार होना भी एक "ठाठ" वाली बात है। कुछ दिनों बाद, स्कूल न जाने के लिए वह बीमारी का बहाना बनाता है — लेकिन उसका दिन उसकी सोच से बिल्कुल अलग निकलता है।
कहानी का सार-प्रवाह (Story Flow)
📝कहानी (The Story)
1. अस्पताल की पहली यात्रा
बच्चा नानीजी के साथ पहली बार अस्पताल जाता है, जहाँ पड़ोसी सुधाकर काका भर्ती हैं। वार्ड में एक जैसे साफ पलंग, सफेद चादरें, लाल कंबल, हरे पर्दे और चमकता हुआ फर्श देखकर बच्चे को माहौल बहुत सुंदर और शांत लगता है — न ट्रैफिक का शोर, न धूल, न मच्छर-मक्खी।
नर्स आकर काका को दवा देती है, और नानीजी अपने साथ लाई साबूदाने की खीर चम्मच से काका को खिलाती हैं। काका बड़े स्वाद से खीर खाते हैं।
2. बच्चे के मन में विचार — "काश मैं बीमार होता!"
यह सब देखकर बच्चा सोचता है — "क्या ठाठ हैं बीमारों के भी! साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो।" उसे लगता है कि काश वह सुधाकर काका की जगह होता।
3. स्कूल से बचने की योजना
कुछ दिनों बाद बच्चे का मन स्कूल जाने का नहीं होता — उसने होमवर्क भी नहीं किया था और सजा मिलने का डर था। उसे याद आता है कि बीमार होना कितना "आरामदायक" लगा था, इसलिए वह सोचता है — "चलो बीमार पड़ जाते हैं!"
वह रजाई से नहीं निकलता और नानीजी से कहता है, "मैं आज बीमार हूँ... मेरे सिर में दर्द है, पेट भी दुख रहा है और बुखार भी है।"
4. घर में अकेलापन और कल्पना
घर के सब लोग अपने-अपने काम पर निकल जाते हैं — छोटे मामा नहाकर, कुसुम मौसी कॉलेज बस के लिए, मुन्नू स्कूल के लिए। बच्चा रजाई में पड़ा-पड़ा घर की गतिविधियों का अनुमान लगाता रहता है और अंत में अकेला रह जाता है।
5. नानाजी-नानीजी की जाँच और झूठा नाटक
नानाजी आकर उसका माथा छूते हैं, पेट देखते हैं, नब्ज़ जांचते हैं। बुखार नहीं होने पर भी बच्चा खुद को बीमार साबित करने के लिए थर्मामीटर मांगता है (जो घर में मिलता ही नहीं)। नानाजी उसे कड़वी पुड़िया और काढ़ा पिलाते हैं और आदेश देते हैं — "आज इसे कुछ खाने को मत देना। आराम करने दो।"
6. भूख, बोरियत और ईर्ष्या
पूरे दिन लेटे रहने से बच्चे की पीठ दुखने लगती है, और भूख के कारण उसे नींद में भी खाने की चीज़ें — कचौड़ी, बर्फी, गोलगप्पे, साबूदाने की खीर — दिखाई देने लगती हैं। दोपहर में खाने की खुशबू आने पर वह चुपके से झाँककर देखता है कि सब दाल-चावल और तली हरी मिर्च खा रहे हैं, और मुन्नू मीठा आम चूस रहा है।
यह देखकर बच्चे को जलन और गुस्सा आता है, और वह गुस्से में पाँव पटकता हुआ वापस बिस्तर पर आ जाता है। पूरे दिन उसे भूखा ही रहना पड़ता है।
7. सीख (The Turning Point)
इसके बाद बच्चे ने स्कूल से छुट्टी पाने के लिए फिर कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाया।
💡पाठ की व्याख्या (Explanation)
- तुलना (Contrast): लेखक ने अस्पताल के सुंदर, शांत माहौल की तुलना बच्चे के अकेले, उबाऊ दिन से की है — यही कहानी को रोचक बनाता है।
- चित्रात्मक भाषा (Descriptive Language): जैसे — "हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे", "धीमी-धीमी गुनगुन" — इससे पाठक की आँखों के सामने दृश्य जीवंत हो उठता है।
- बच्चे की कल्पना का प्रयोग: जब बच्चा अकेला लेटा रहता है, तब वह घर और गली की गतिविधियों की कल्पना करता है — यह लेखन शैली कहानी को और रोचक बनाती है।
- हास्य (Humour): थर्मामीटर ढूँढ़ना, झूठे लक्षण बताना — ये मज़ेदार प्रसंग कहानी में हँसी लाते हैं।
❓प्रश्न-उत्तर (Q&A)
(क) मेरी समझ से — सही उत्तर चुनिए
(ख) सोच-विचार के लिए
(ग) अनुमान और कल्पना से
(घ) समस्या और समाधान
(ङ) शीर्षक (Title)
⭐Imp Points / Imp Terms
| Imp Point | विवरण (Detail) |
|---|---|
| लेखक | स्वयं प्रकाश (1947–2019), प्रसिद्ध हिंदी कहानीकार |
| कहानी का प्रकार | बाल मनोविज्ञान पर आधारित प्रथम-पुरुष (first-person) कहानी |
| मुख्य पात्र | बच्चा (कथावाचक), नानाजी, नानीजी, सुधाकर काका, मुन्नू |
| मुख्य विषय / Theme | झूठ बोलने और बहाना बनाने का दुष्परिणाम |
| शिक्षा / Moral | चीज़ें जैसी दिखती हैं, हमेशा वैसी होती नहीं — बहाना बनाने से समस्या और बढ़ती है |
| चित्रात्मक भाषा | वातावरण को दृश्य की तरह वर्णित करने की लेखन शैली |
| साबूदाने की खीर | कहानी में बार-बार आने वाला प्रतीक — "आराम व विशेष सुविधा" का प्रतीक |
- "मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा।" — बच्चे की गलत सोच की शुरुआत
- "भूखे रहो! इससे सारे विकार निकल जाएँगे।" — नानाजी की पुरानी मान्यता
- "इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।" — कहानी की सीख
✍️लेखक परिचय (About the Author)
स्वयं प्रकाश हिंदी के जाने-माने लेखक थे, जिनकी कहानियाँ बच्चों और बड़ों दोनों के दिलों को छूती हैं। उनकी रचनाएँ मानो हमारे अपने जीवन के अनुभवों जैसी लगती हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में मात्रा और भार, अगली किताब, ज्योति रथ के सारथी, और फीनिक्स शामिल हैं।
