फूल और काँटा
कवि: अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' | कक्षा: हिंदी पाठ्यपुस्तक 'मल्हार'
यह कविता एक ही पौधे पर उगने वाले फूल और काँटे के माध्यम से एक गहरी बात कहती है — बाहरी परिस्थितियाँ (चाँदनी, वर्षा, हवा) दोनों को समान रूप से मिलती हैं, फिर भी दोनों का स्वभाव बिल्कुल अलग होता है। कवि इसी उदाहरण से यह समझाते हैं कि व्यक्ति की असली पहचान उसके गुणों और कर्मों से होती है, केवल उसके कुल/परिवार के नाम से नहीं।
In simple English: even when two things grow in the same conditions, their nature can be completely different — and a person's true worth comes from their actions, not their family name.
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' 1865–1947
इनका जन्म आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। इन्होंने बच्चों के लिए अनेक रोचक कविताएँ लिखीं। इनकी प्रसिद्ध काव्य-कृति प्रियप्रवास को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है। बच्चों के लिए इनके कविता-संकलन चंद्र-खिलौना और खेल-तमाशा प्रसिद्ध हैं।
हैं जनम लेते जगह में एक ही,
एक ही पौधा उन्हें है पालता।
रात में उन पर चमकता चाँद भी,
एक ही सी चाँदनी है डालता।
मेह उन पर है बरसता एक सा,
एक सी उन पर हवायें हैं बही।
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं।
छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ,
फाड़ देता है किसी का वर बसन।
प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर,
भौंर का है बेध देता श्याम तन।
फूल लेकर तितलियों को गोद में,
भौंर को अपना अनूठा रस पिला।
निज सुगंधों औ निराले रंग से,
है सदा देता कली जी की खिला।
है खटकता एक सब की आँख में,
दूसरा है सोहता सुर शीश पर।
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे,
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।
— अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
एक जैसी परिस्थितियों में भी दोनों का स्वभाव अलग-अलग रहता है।
Even with identical care and conditions, nature/behaviour still differs — this is the poem's central idea.
A famous family name means little if the person themself lacks good qualities — true greatness comes from one's own character.
मुख्य भाव (Central Idea)
- समान परिस्थितियाँ मिलने पर भी हर प्राणी/वस्तु का स्वभाव अलग हो सकता है।
- व्यक्ति की पहचान उसके अपने गुणों और कर्मों से होनी चाहिए, न कि केवल उसके कुल/परिवार के नाम से।
प्रतीकार्थ (Symbolism)
| प्रतीक | अर्थ (क्या दर्शाता है) |
|---|---|
| फूल | दया, प्रेम, अच्छाई, परोपकार, सुंदरता |
| काँटा | स्वार्थ, कठोरता, बुराई, दुख पहुँचाने वाला स्वभाव |
Imp शब्द: 'बड़प्पन'
'बड़प्पन' शब्द 'बड़ा' + 'पन' से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है — बड़ाई, श्रेष्ठता या महानता का भाव। इसका प्रयोग व्यक्ति के गुण, स्वभाव और चरित्र की ऊँचाई बताने के लिए होता है — जैसे उदारता, विनम्रता, त्याग, परोपकार आदि।
- काँटा अपने आस-पास की सुगंध को नष्ट करता है।
- काँटा तितलियों और भौंरों को आकर्षित करता है।
- काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है।
- काँटा पौधे को हानि पहुँचाता है।
- फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं।
- फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं।
- फूल और काँटे के बारे में लोगों के विचार समान होते हैं।
- व्यक्ति का कुल ही उसके सम्मान का आधार होता है।
- व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं।
- कुल की प्रतिष्ठा हमेशा व्यक्ति के गुणों से बड़ी होती है।
- धन-दौलत और ताकत से व्यक्ति के बड़प्पन का पता चलता है।
- कुल के बड़प्पन की प्रशंसा व्यक्ति की कमियों को ढक देती है।
- बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है।
- कुल का नाम व्यक्ति में बड़प्पन की पहचान का मुख्य आधार है।
"मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवायें हैं बही। पर सदा ही यह दिखाता है हमें, ढंग उनके एक से होते नहीं।"
"किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।"
