मैया मैं नहिं माखन खायो
— सूरदास
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Toggleपरिचय (Introduction)
यह पद महान भक्त कवि सूरदास द्वारा रचित है। इसमें बाल श्रीकृष्ण की एक मनोहारी लीला का वर्णन है। कृष्ण ने मक्खन (माखन) चुराकर खा लिया है, परंतु जब माँ यशोदा उन्हें पकड़ती हैं, तो वे बड़ी चतुराई से अनेक तर्क देकर स्वयं को निर्दोष सिद्ध करने का प्रयास करते हैं।
कवि से परिचय — सूरदास
माना जाता है कि सूरदास का जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ था। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन मथुरा और गोवर्धन सहित ब्रज क्षेत्र में श्रीकृष्ण के गुणगान में भजन गाते हुए बिताया। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में उपलब्ध हैं। उनकी अधिकतर कविताओं में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का सुंदर वर्णन मिलता है। अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के कारण वे महाकवि सूरदास कहलाते हैं। उनकी मृत्यु 16वीं शताब्दी में हुई।
पद (The Poem)
भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो॥
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥
मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥
तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।
जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो॥
ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।
सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥
भावार्थ / व्याख्या (Explanation)
पंक्ति 1–2: कृष्ण कहते हैं — "माँ, मैंने माखन नहीं खाया।" सुबह होते ही तुमने मुझे गायों के पीछे मधुबन (जंगल) में भेज दिया।
पंक्ति 3: मैं चार पहर (पूरा दिन) बंसीवट के पास घूमता रहा और शाम ढलने पर ही घर लौटा। फिर माखन खाने का समय कहाँ मिला?
पंक्ति 4: मैं तो छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं। इतने ऊँचे लटके छींके तक मैं किस प्रकार पहुँच सकता हूँ?
पंक्ति 5: ये सब ग्वाल-बाल (मित्र) मुझसे शत्रुता रखते हैं, इसलिए उन्होंने जबरदस्ती मेरे मुँह पर माखन लगा दिया।
पंक्ति 6–7: कृष्ण माँ को भोली कहते हैं — "तुम मन की बहुत सीधी हो, दूसरों के कहने पर विश्वास कर लेती हो। तुम्हारे मन में जरूर कोई भेदभाव है, तभी तुमने मुझे पराया समझ लिया।"
पंक्ति 8–9: रूठकर कृष्ण कहते हैं — "यह लो अपनी लाठी और कंबल, तुमने मुझे बहुत नचाया।" यह सुनकर माता यशोदा हँस पड़ीं और उन्होंने कृष्ण को गले से लगा लिया।
प्रश्न-उत्तर (Questions & Answers)
मेरी समझ से — सही उत्तर चुनिए
1. मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?
✔ सही उत्तर: मेरे छोटे-छोटे हाथ छींके तक कैसे जा सकते हैं?
2. श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?
✔ सही उत्तर: गाय चरा रहे थे।
सोच-विचार के लिए
(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?
श्रीकृष्ण ने बताया कि वे एक छोटे बालक हैं, उनकी बाँहें छोटी हैं जिससे वे छींके तक नहीं पहुँच सकते। वे सुबह से शाम तक गाय चराने मधुबन गए थे और शाम को ही घर लौटे। उन्होंने माखन नहीं खाया, बल्कि उनके ग्वाल मित्रों ने जबरदस्ती उनके मुँह पर माखन लगा दिया।
(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?
कृष्ण के भोले और चतुर तर्कों को सुनकर तथा उनके रूठने के प्यारे अंदाज़ को देखकर यशोदा माता को अपार वात्सल्य (ममता) उमड़ आया। बच्चे की मासूमियत पर वे मन ही मन मुग्ध हो गईं, इसलिए हँसते हुए उन्होंने कृष्ण को गले से लगा लिया।
अनुमान या कल्पना से
(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?
कृष्ण डाँट या दंड से बचना चाहते थे और माँ के सामने स्वयं को निर्दोष सिद्ध करना चाहते थे। इसीलिए वे एक के बाद एक चतुराई भरे तर्क दे रहे थे ताकि माँ उन पर विश्वास कर लें।
(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?
माँ के गले लगते ही कृष्ण का रूठना और नाराज़गी दूर हो गई होगी। दोनों के बीच का प्रेम और गहरा हो गया होगा तथा वातावरण फिर से आनंद और मुस्कान से भर गया होगा।
आपकी बात
क्या कभी आपको दूसरों के सामने अपनी बात सिद्ध करनी पड़ी है?
(यह आपके अपने अनुभव पर आधारित है।) उदाहरण — एक बार मुझ पर कक्षा में शोर मचाने का आरोप लगा, जबकि मैं चुप बैठा था। मैंने अपने शिक्षक से कहा कि उस समय मैं किताब पढ़ रहा था और मेरे पास बैठे साथी इसकी गवाही दे सकते हैं। इस तरह मैंने अपनी बात सिद्ध की।
समय का माप (Measuring Time)
पद में "पहर" और "साँझ" शब्द समय बताने के लिए आए हैं। एक पहर लगभग तीन घंटे का होता है और एक दिन में आठ पहर होते हैं।
(ख) श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?
वे चार पहर गाय चराते थे। चार पहर × 3 घंटे = लगभग 12 घंटे।
(ग) यदि वे शाम को छह बजे लौटे, तो सुबह कितने बजे निकले होंगे?
12 घंटे पहले, अर्थात् सुबह लगभग 6 बजे वे घर से निकले होंगे।
(घ) दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा?
दोपहर (दूसरे पहर की समाप्ति) लगभग 12 बजे होती है। एक पहर = 3 घंटे। अतः पहला पहर 12 − 6 = सुबह लगभग 6 बजे प्रारंभ होगा।
शब्दार्थ (Word Meanings)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जसोदा | यशोदा, श्रीकृष्ण की माता (जिन्होंने उन्हें पाला) |
| पहर | समय की इकाई — तीन घंटे का एक पहर |
| लकुटि-कमरिया | लाठी और छोटा कंबल (कमली) |
| बंसीवट | एक वट (बरगद) वृक्ष जहाँ कृष्ण बंशी बजाते थे |
| मधुबन | मथुरा के पास यमुना किनारे का एक वन |
| छींको / छीको | रस्सियों का बुना जाल जिसमें खाने की चीज़ें लटकाई जातीं |
| माता | जन्म देने वाली, जननी, माँ |
| ग्वाल-बाल | गाय पालने वालों के बच्चे, कृष्ण के मित्र |
| भोरी | भोली, सीधी-सादी |
| बिहँसि | मुस्काई, हँसी |
| पतियायो | विश्वास किया, सच मान लिया |
| बहियन | बाँह, हाथ, भुजा |
| भटक्यो | इधर-उधर घूमा या भटका |
| लपटायो | मला, लगाया, पोता |
दूध से घी बनने की प्रक्रिया (Milk to Ghee)
दूध को गर्म करके जमाया जाता है जिससे दही बनता है। दही को मथने (बिलोने) से मक्खन निकलता है, और मक्खन को गर्म करने पर घी तैयार होता है।
Imp बिंदु (Imp Points)
- यह पद महाकवि सूरदास द्वारा ब्रजभाषा में रचित है।
- पद में बाल कृष्ण की माखन-चोरी की लीला और उनके चतुर तर्कों का वर्णन है।
- कृष्ण स्वयं को निर्दोष सिद्ध करने के लिए अपनी छोटी बाँहों और मित्रों के षड्यंत्र का बहाना बनाते हैं।
- माता यशोदा का वात्सल्य भाव (ममता) इस पद का मुख्य रस है।
- पद में तुक (rhyme) का सुंदर प्रयोग है — जैसे "पठायो", "आयो", "पायो" आदि की अंतिम ध्वनि समान है।
- अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम "सूरदास" दिया है, जो उनकी विशेष शैली है।
- "पहर" और "साँझ" जैसे शब्द समय मापने की पुरानी इकाइयाँ दर्शाते हैं।
• Vatsalya Rasa — the emotion of parental love, the central feeling of this poem.
• Tuk (Rhyme) — matching end-sounds of lines that make the poem musical.
• Braj Bhasha — the sweet regional dialect of the Mathura–Vrindavan region used by Surdas.
• Chheeka — a hanging rope-net used to store food out of a child's or animal's reach.
