Class 6 Chapter 13 पेड़ की बात

अध्याय 13

पेड़ की बात

लेखक — जगदीशचंद्र बसु | अनुवादक — शंकर सेन

परिचय (Introduction)

क्या आपने कभी कोई बीज बोया है? बीज से पेड़ बनने की कहानी बहुत रोचक है। कैसे अंकुर फूटता है, पौधा बनता है, धीरे-धीरे बढ़ता है और बड़ा पेड़ बन जाता है। इस पाठ में महान वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु ने पेड़-पौधों के जीवन को इतने सुंदर और सजीव ढंग से समझाया है, मानो पेड़ भी हमारी तरह ही जीते हैं।

In English: This chapter tells the fascinating life-story of a plant — from a tiny seed sprouting, to becoming a sapling, and finally growing into a large tree. The author, scientist J.C. Bose, describes plants as living beings that eat, breathe and care for their offspring, just like humans.

कहानी (The Story)

1. बीज का अंकुरित होना

बहुत दिनों तक बीज मिट्टी के नीचे पड़े रहे। सर्दियों के बाद वसंत आया, फिर वर्षा की शुरुआत में पानी बरसा। तब मानो बाहर से कोई शिशु को पुकार रहा हो — "ऊपर उठ जाओ, सूरज की रोशनी देखो।" आहिस्ता-आहिस्ता बीज का ढक्कन दरक गया और दो कोमल पत्तियों के बीच अंकुर बाहर निकला।

अंकुर का एक अंश नीचे माटी में मज़बूती से गड़ गया और दूसरा अंश माटी भेदकर ऊपर उठा — जैसे कोई नन्हा शिशु अपना सिर उठाकर आश्चर्य से नई दुनिया को देख रहा हो!

Imp Point: The seed sprouts after spring and the first rains. One part goes down (becomes the root) and one part rises up (becomes the stem).
बीज अंकुर पौधा पेड़

2. जड़ और तना

अंकुर का जो अंश माटी के भीतर जाता है, उसे जड़ कहते हैं और जो ऊपर की ओर बढ़ता है, उसे तना कहते हैं। सभी पेड़-पौधों में ये दो भाग मिलेंगे। आश्चर्य की बात यह है कि पौधे को जैसे भी रखो, जड़ हमेशा नीचे और तना हमेशा ऊपर की ओर ही जाएगा।

लेखक ने गमले को कुछ दिन उल्टा (औंधा) लटकाए रखा। कुछ ही दिनों में पौधे की सब पत्तियाँ और डालियाँ टेढ़ी होकर ऊपर की तरफ़ उठ गईं और जड़ घूमकर नीचे की ओर लटक गई। (जैसे मूली बोने पर पहले पत्ते-फूल नीचे रहते हैं, फिर ऊपर की ओर उठ आते हैं।)

3. पेड़-पौधे कैसे भोजन करते हैं?

जिस तरह हम भोजन करते हैं, पेड़-पौधे भी उसी तरह भोजन करते हैं। पर पौधों के दाँत नहीं होते, इसलिए वे केवल तरल द्रव्य या वायु से भोजन ग्रहण करते हैं। पेड़-पौधे अपनी जड़ के द्वारा माटी से रस पीते हैं। जैसे चीनी पानी में गल जाती है, वैसे ही माटी में पानी डालने पर बहुत-से द्रव्य गल जाते हैं और पेड़ उन्हें सोख लेता है।

जड़ों को पानी न मिलने पर पेड़ का भोजन बंद हो जाता है और पेड़ मर जाता है।

सूक्ष्मदर्शी (microscope) से देखने पर पता चलता है कि पेड़ में हज़ारों-हज़ार नल हैं। इन्हीं नलों के द्वारा माटी से पेड़ के शरीर में रस का संचार होता है।

In English: Plants have no teeth, so they absorb only liquids or gases. Roots drink dissolved nutrients from the soil, which travel up through thousands of tiny tubes (like veins). Without water, the plant's food supply stops and it dies.

4. पत्तों का काम — हवा से भोजन

पेड़ के पत्ते हवा से भी आहार ग्रहण करते हैं। पत्तों में अनगिनत छोटे-छोटे मुँह होते हैं। जब हम साँस छोड़ते हैं तो एक विषैली वायु बाहर निकलती है, जिसे 'अंगारक' वायु (कार्बन डाइऑक्साइड) कहते हैं। यह हवा जीव-जंतुओं के लिए ज़हर है।

विधाता की करुणा का चमत्कार देखो — जो हवा जीव-जंतुओं के लिए ज़हर है, पेड़-पौधे उसी का सेवन करके उसे पूरी तरह शुद्ध कर देते हैं।

जब सूरज का प्रकाश पड़ता है, तब पत्ते सूर्य-ऊर्जा की सहायता से 'अंगारक' वायु से अंगार (कार्बन) अलग कर लेते हैं और यही अंगार पेड़ के शरीर में बदल जाता है।

Imp Point: Leaves take in "poisonous" carbon dioxide, use sunlight to separate the carbon, and release pure air. This is nature's way of cleaning the air — the basis of what we call photosynthesis.

5. प्रकाश ही जीवन है

पेड़-पौधे प्रकाश चाहते हैं — प्रकाश न मिलने पर वे बच नहीं सकते। खिड़की के पास रखे पौधे की सारी पत्तियाँ अंधकार से बचकर प्रकाश की ओर बढ़ती हैं। वन में सभी पेड़ इस होड़ में रहते हैं कि कौन पहले सिर उठाकर प्रकाश पा ले।

प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है। पेड़-पौधे और सारी हरियाली प्रकाश को पकड़ने के जाल हैं।

ईंधन जलाने पर जो प्रकाश और ताप निकलता है, वह असल में सूर्य की ही ऊर्जा है। पशु और मनुष्य हरियाली खाकर जीते हैं, इसलिए हम भी अप्रत्यक्ष रूप से सूर्य के प्रकाश की खुराक पाकर ही जीवित हैं।

6. फूल, बीज और मातृ-ममता

कुछ पेड़ एक वर्ष बाद ही मर जाते हैं, पर मरने से पहले संतान (बीज) छोड़ जाना चाहते हैं। बीज ही पेड़ की संतान है। बीज की सुरक्षा के लिए पेड़ फूल की पंखुड़ियों से घिरा एक छोटा-सा घर तैयार करता है।

मटमैली माटी और विषैली वायु से इतने सुंदर फूल कैसे खिलते हैं? लेखक कहते हैं — यह माँ की ममता का ही जादू है, जो पारस पत्थर की तरह माटी को सोने जैसा सुंदर बना देती है।

7. परागण और पेड़ का अंत

मधुमक्खी और तितली फूलों का रस पीने आती हैं और एक फूल के पराग-कण दूसरे फूल तक ले जाती हैं। पराग-कण के बिना बीज पक नहीं सकता। इस तरह फूल में बीज बनता है।

पेड़ अपने शरीर का रस पिलाकर बीजों का पोषण करता है और संतान के लिए सब-कुछ लुटा देता है। धीरे-धीरे उसका शरीर सूख जाता है, डालियाँ एक-एक कर टूट पड़ती हैं और अंत में एक दिन पेड़ जड़ सहित भूमि पर गिर पड़ता है।

इस तरह संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है।

In English: Bees and butterflies carry pollen from one flower to another — without pollination, seeds cannot ripen. The parent tree sacrifices everything to nourish its seeds, then withers and finally falls, giving its life for the next generation.

लेखक परिचय (About the Author)

जगदीशचंद्र बसु (1858–1937)

प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु का बचपन प्रकृति के अवलोकन में बीता। वे जीवविज्ञान, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान और विज्ञान-कथा लेखन में रुचि रखते थे। उन्होंने सिद्ध किया कि पौधों का भी एक निश्चित जीवनचक्र और प्रजनन प्रणाली होती है। वे विश्व के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने यह स्थापित किया कि पौधे भी अन्य जीवों के समान होते हैं। उन्होंने रेडियो तरंगों द्वारा संचार स्थापित कर एक बड़ी वैज्ञानिक खोज भी की। 'पेड़ की बात' का बांग्ला से हिंदी अनुवाद शंकर सेन ने किया है।

प्रश्न-उत्तर (Questions & Answers)

मेरी समझ से

(1) "जैसे पौधे को भी सब भेद मालूम हो गया हो" — पौधे को कौन-सा भेद पता लग गया?

  • उसे उल्टा लटकाया गया है।
  • उसे किसी ने सजा दी है।
  • बच्चे को गमला रखना नहीं आया।
  • ★ प्रकाश ऊपर से आ रहा है।

कारण: गमला उल्टा लटकाने पर भी पत्तियाँ प्रकाश की ओर मुड़ गईं, इसलिए पौधे को समझ आ गया कि प्रकाश किस दिशा से आ रहा है।

(2) पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे हैं?

  • हमारे जैसे ही साँस लेते हैं।
  • हमारे जैसे ही भोजन ग्रहण करते हैं।
  • ★ हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं।
  • धरती पर हमारे साथ ही जन्मे हैं।

कारण: जो 'अंगारक' वायु (कार्बन डाइऑक्साइड) जीवों के लिए ज़हर है, पेड़ उसी को ग्रहण करके हवा को शुद्ध कर देते हैं। इसलिए वे हमारे सच्चे मित्र हैं।

सोच-विचार के लिए

(क) बीज के अंकुरित होने में किस-किस का सहयोग मिलता है?

बीज के अंकुरित होने में मिट्टी, पानी (वर्षा), उपयुक्त मौसम (वसंत की गर्मी) और सूरज की रोशनी का सहयोग मिलता है। इन्हीं की सहायता से बीज का ढक्कन दरकता है और अंकुर बाहर निकलता है।

(ख) पौधे अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?

पौधे दो तरीकों से भोजन प्राप्त करते हैं — (1) जड़ों के द्वारा माटी से पानी में घुले द्रव्य (रस) सोखते हैं, और (2) पत्तों के द्वारा हवा से 'अंगारक' वायु लेकर सूर्य के प्रकाश की सहायता से भोजन बनाते हैं।

अनुमान या कल्पना से

(क) वृक्ष के समाप्त होने के बाद क्या होता है?

वृक्ष के समाप्त होने के बाद उसके छोड़े गए बीज ही उसकी संतान बनते हैं। ये बीज मिट्टी में गिरकर, अनुकूल मौसम मिलने पर फिर से अंकुरित होते हैं और नए पेड़ बन जाते हैं। इस तरह जीवन का चक्र चलता रहता है।

(ख) पेड़-पौधों के बारे में लेखक की रुचि कैसे जागृत हुई होगी?

लेखक जगदीशचंद्र बसु का बचपन प्रकृति के बीच बीता था। पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं को ध्यान से देखने, उन पर प्रयोग (जैसे गमला उल्टा लटकाना) करने और सूक्ष्मदर्शी से बारीकी से अध्ययन करने से उनकी रुचि जागृत हुई होगी।

मिलकर करें मिलान (Match the Following)

वाक्यांशसही अर्थ / संदर्भ
1. बीज का ढक्कन दरक गयाबीज के दोनों दलों में दरार आ गई या फट गए।
2. उसे 'अंगारक' वायु कहते हैंसाँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु — कार्बन डाइऑक्साइड।
3. पत्ते सूर्य-ऊर्जा के सहारे 'अंगारक' वायु से अंगार निःशेष कर डालते हैंसूर्य के प्रकाश से पत्ते विषाक्त वायु के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं।
4. प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र हैजीवन के लिए सूर्य का प्रकाश आधारशक्ति या महत्वपूर्ण है।
5. जैसे फूल-फूल के बहाने वह स्वयं हँस रहा होअपनी संपन्नता और भावी पीढ़ी की उत्पत्ति से प्रसन्न-संतुष्ट।
6. इस अपरूप उपादान से किस तरह ऐसे सुंदर फूल खिलते हैंमटमैली माटी और विषाक्त वायु से सुंदर-सुंदर फूलों में परिवर्तित होते हैं।

प्रवाह चार्ट — बीज से बीज तक की यात्रा

बीज फूल फल अंकुर कली बीज पौधा पत्ता

Imp शब्दार्थ (Important Word Meanings)

शब्दअर्थ
अंकुरबीज से निकलने वाली नई कोंपल / विकास का सूचक
अंगारककार्बन डाइऑक्साइड (विषैली वायु)
आहिस्ताधीरे-से, धीमी गति से
आबद्धबँधा हुआ, जकड़ा हुआ
सूक्ष्मदर्शीबहुत बारीक चीज़ देखने वाला यंत्र (Microscope)
अपरूप उपादानबेढंगी / साधारण सामग्री (मटमैली माटी)
पराग-कणफूल के भीतर की धूल / पुष्परज (Pollen)
प्रफुल्लितखिला हुआ, अति प्रसन्न
न्योछावरसमर्पण करना, त्याग देना
क्षीणदुर्बल, कमज़ोर, घटा हुआ
घनिष्ठतागहरी नज़दीकी / मित्रता
विषाक्तज़हरीला, विष मिला हुआ

याद रखने योग्य Imp बातें

पाठ का सार-तत्व

  • बीज के दो भाग बनते हैं — नीचे जाने वाला जड़ और ऊपर उठने वाला तना
  • पौधे को कैसे भी रखो, जड़ नीचे और तना ऊपर ही जाता है।
  • पेड़ जड़ों से पानी में घुला भोजन और पत्तों से हवा से भोजन लेते हैं।
  • प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है — बिना प्रकाश पौधे जीवित नहीं रह सकते।
  • पेड़ 'अंगारक' वायु (ज़हरीली हवा) को शुद्ध करके जीवों के मित्र बनते हैं।
  • मधुमक्खी-तितली परागण (pollination) में सहायता करती हैं, जिससे बीज बनता है।
  • पेड़ अपनी संतान (बीज) के लिए अपना जीवन न्योछावर कर देता है — यह मातृ-ममता का प्रतीक है।