माँ, कह एक कहानी
कवि: मैथिलीशरण गुप्त | काव्य-कृति: यशोधरा | कक्षा 7 — मल्हार
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Toggleभूमिका (Introduction)
यह कविता मैथिलीशरण गुप्त की काव्य-कृति यशोधरा से ली गई है। यह माँ यशोधरा और उनके बेटे राहुल के बीच संवाद (बातचीत) के रूप में लिखी गई है। माँ अपने बेटे को एक कहानी सुनाती है, जिसमें एक घायल हंस, एक शिकारी और उस हंस को बचाने वाले व्यक्ति के बीच हुए विवाद की बात है। कहानी के अंत में माँ अपने बेटे से ही पूछती है कि न्याय किसके पक्ष में होना चाहिए।
कवि परिचय
मैथिलीशरण गुप्त (1886–1964) का जन्म झाँसी (उत्तर प्रदेश) के चिरगाँव में हुआ था। वे 15-16 वर्ष की आयु में ही कविता लिखने लगे थे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनकी रचनाओं ने लोगों में देशप्रेम जगाया, इसलिए उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं — साकेत, भारत-भारती और यशोधरा।
कहानी को समझें (The Story)
कविता में तीन पात्रों के नाम स्पष्ट नहीं बताए गए, पर वे प्रसिद्ध बौद्ध कथा से जुड़े हैं:
| पात्र | वास्तविक पहचान |
|---|---|
| माँ | यशोधरा — एक राजकुमारी, सिद्धार्थ की पत्नी |
| बेटा | राहुल — सिद्धार्थ और यशोधरा का पुत्र |
| तात (पिता) | सिद्धार्थ — जो बाद में गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए |
पंक्ति-दर-पंक्ति व्याख्या (Explanation)
1. कहानी की शुरुआत
बेटा माँ से कहानी सुनाने की ज़िद करता है। माँ मज़ाक में पूछती है कि क्या उसने उसे अपनी नानी (जो कहानियाँ सुनाया करती हैं) समझ लिया है। बेटा फिर भी ज़िद करता है और पूछता है — कहानी में राजा था या रानी?
2. उपवन का दृश्य
माँ बताती है कि बेटे के पिता एक सुंदर बगीचे (उपवन) में सुबह-सुबह टहलने जाया करते थे, जहाँ चारों ओर मीठी सुगंध फैली रहती थी। इसके बाद बगीचे की प्रकृति का सुंदर वर्णन आता है — रंग-बिरंगे फूल, ओस की बूँदें, हल्की हवा और हंसों की आवाज़ें।
3. हंस का घायल होना
अचानक एक हंस तेज़ धार वाले तीर से घायल होकर गिर पड़ता है और उसका पंख (पक्ष) क्षतिग्रस्त हो जाता है। सिद्धार्थ चौंककर उसे उठाते हैं और उसकी देखभाल करते हैं।
4. शिकारी का आना और विवाद
तभी वहाँ शिकारी (आखेटक) आता है और घायल हंस को अपना शिकार मानते हुए वापस माँगता है। लेकिन सिद्धार्थ, जो हंस के रक्षक बन चुके हैं, उसे देने से इनकार कर देते हैं। शिकारी ज़िद पर अड़ जाता है और विवाद बढ़ जाता है।
5. न्यायालय में फैसला
दयालु सिद्धार्थ और निर्दयी शिकारी — दोनों अपनी बात पर अड़े रहते हैं, इसलिए मामला राजा के न्यायालय में जाता है।
6. माँ बेटे से निर्णय माँगती है
यहाँ माँ कहानी को स्वयं पूरा न करते हुए बेटे से ही पूछती है कि उसकी नज़र में न्याय किसके पक्ष में जाना चाहिए — शिकारी के या रक्षक के।
7. निष्कर्ष
बेटा उत्तर देता है — अगर कोई निर्दोष को मारने की कोशिश करे, तो कोई और उसे बचा क्यों न सके? सच्चा न्याय हमेशा रक्षक (बचाने वाले) का पक्ष लेता है, न कि मारने वाले का, क्योंकि न्याय के साथ दया भी ज़रूरी है।
महत्वपूर्ण बिंदु (Imp Points)
- संवादात्मक शैली — पूरी कविता माँ-बेटे के प्रश्न-उत्तर के रूप में लिखी गई है।
- वर्णनात्मक शैली — प्रकृति (फूल, ओस, हवा, पक्षी) का सुंदर चित्रण किया गया है।
- पुनरावृत्ति — कई पंक्तियाँ दो बार आती हैं, जिससे बातचीत स्वाभाविक और सुंदर लगती है।
- मुख्य विषय — न्याय और करुणा (दया) साथ-साथ होने चाहिए।
- यह कविता परोक्ष रूप से गौतम बुद्ध के बचपन की करुणामयी प्रवृत्ति को दर्शाती है।
प्रश्न-उत्तर (Q&A)
मेरी समझ से
पंक्तियों पर चर्चा
सोच-विचार के लिए
पंक्ति से पंक्ति (मिलान)
| कविता की पंक्ति | सरल अर्थ |
|---|---|
| कहती है मुझसे यह चेटी | यह सेविका मुझसे यह कहती है। |
| तू है हठी मानधन मेरे | हे मेरे पुत्र, तू बहुत हठ करता है। |
| झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे | हिम-कण/ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं। |
| गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से | तेज़ धार वाले तीर से घायल होकर गिर गया। |
| हुआ विवाद सदय-निर्दय में | दयालु और निर्दयी व्यक्ति में झगड़ा हुआ। |
| कह दे निर्भय, जय हो जिसका। | तू बिना डरे कह दे कि जीत किसकी होनी चाहिए। |
| तूने गुनी कहानी। | तूने कहानी को समझ लिया है। |
| उभय आग्रही थे स्विषय में | दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। |
| तब उसने, जो था खगभक्षी– हठ करने की ठानी। | तब उस तीर चलाने वाले ने हठ करने का निश्चय कर लिया। |
| रक्षक पर भक्षक को वारे न्याय दया का दानी! | न्याय में दया सम्मिलित होती है, न्याय मारने वाले के स्थान पर बचाने वाले का पक्ष लेता है। |
कविता में विराम चिह्न (उत्तर सहित)
नीचे दिए गए अंश में सही विराम चिह्न लगाए गए हैं:
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका।
सुन लूँ तेरी बानी।"
"माँ, मेरी क्या बानी?
मैं सुन रहा कहानी।
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!"
"न्याय दया का दानी?
तूने गुनी कहानी।"
निर्णय करें (सुझाव-उत्तर)
आपकी बात (सुझाव-उत्तर)
(ख) हम दादी-नानी या माता-पिता से कहानियाँ सुनते हैं और छोटे भाई-बहनों को सुनाते हैं।
(ग) हाँ, बीच में प्रश्न पूछना सही है — इससे सुनने वाला ध्यान से समझता है और सोचना सीखता है।
(घ) हाँ, कभी-कभी पसंदीदा कहानी बार-बार सुनने का मन करता है क्योंकि वह भावनात्मक रूप से जुड़ाव पैदा करती है।
