Class 6 Chapter 2 गोल

गोल

— मेजर ध्यानचंद (1905–1979) · हॉकी के जादूगर

इस पाठ का नाम पढ़कर आपके मन में कुछ गोल वस्तुओं के नाम या चित्र उभरे होंगे — गोल गेंद, गोल रोटी, गोल चंद्रमा आदि। लेकिन यह पाठ एक विशेष प्रकार के गोल और उसे करने वाले के बारे में है। यह एक प्रसिद्ध खिलाड़ी के संस्मरण का अंश है — मेजर ध्यानचंद

In simple English: This chapter is not about round things — it is about scoring a goal in hockey. It is a memoir (संस्मरण) written by the legendary player Major Dhyan Chand.
GOAL हॉकी

कहानी / संस्मरण

बदला लेने का अनोखा ढंग

खेल के मैदान में धक्का-मुक्की और नोंक-झोंक की घटनाएँ होती रहती हैं। सन् 1933 की बात है — ध्यानचंद पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेल रहे थे। ‘सैंपर्स एंड माइनर्स टीम’ के एक खिलाड़ी ने गुस्से में आकर हॉकी स्टिक उनके सिर पर दे मारी और उन्हें मैदान से बाहर ले जाया गया।

थोड़ी देर बाद पट्टी बाँधकर वे फिर मैदान में लौटे और उसी खिलाड़ी की पीठ पर हाथ रखकर कहा, “तुम चिंता मत करो, इसका बदला मैं जरूर लूँगा।” यह सुनकर खिलाड़ी घबरा गया। पर ध्यानचंद ने एक के बाद एक छह गोल कर दिए।

“दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है। अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता।”
The lesson: Dhyan Chand took his "revenge" not by hurting the player back, but by playing brilliantly and scoring goals. A person who does wrong always fears being wronged in return — but a true sportsman replies with skill, not anger.

ध्यानचंद का जीवन

  • जन्म सन् 1905 में प्रयाग के एक साधारण परिवार में हुआ; बाद में परिवार झाँसी आ गया।
  • 16 साल की उम्र में ‘फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट’ में साधारण सिपाही बने। शुरू में खेल में कोई दिलचस्पी नहीं थी — वे नौसिखिया खिलाड़ी थे।
  • सूबेदार मेजर तिवारी के बार-बार कहने पर अभ्यास शुरू किया और धीरे-धीरे निखार आता गया।
  • सन् 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उन्हें कप्तान बनाया गया; तब वे सेना में लांस नायक थे।
  • बर्लिन में उनके खेल से लोग इतने प्रभावित हुए कि उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहने लगे। भारत ने स्वर्ण पदक जीता।
Sportsmanship: Being 'The Wizard of Hockey' did not mean he scored every goal himself. He always tried to pass the ball to a teammate near the goal so they could get the credit. He believed — “win or loss belongs to the whole country, not to me.”
1905जन्म 19336 गोल 1936बर्लिन स्वर्ण 1979

प्रश्न-उत्तर (पाठ से)

प्र.1 — ध्यानचंद की बात “…अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता” से उनके बारे में क्या पता चलता है?

○ वे अत्यंत क्रोधी थे।

○ वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे।

○ उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे।

वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।

वे जानते थे कि खेल को सही भावना (खेल-भावना) से खेलना चाहिए। उन्होंने गुस्से का जवाब गुस्से से नहीं, बल्कि अपने कौशल से दिया।

प्र.2 — लोगों ने मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ कहना क्यों शुरू कर दिया?

उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण।

○ उनकी हॉकी स्टिक की अनोखी विशेषताओं के कारण।

○ हॉकी के लिए उनके विशेष लगाव के कारण।

○ उनकी खेल भावना के कारण।

उनके हॉकी खेलने के असाधारण कौशल के कारण — बर्लिन ओलंपिक में उनके खेल ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया था।

सोच-विचार (क) — ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?

उनकी सफलता का कोई गुरु-मंत्र नहीं था। उनके अनुसार लगन, साधना (अभ्यास) और खेल भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र थे।

सोच-विचार (ख) — किन बातों से लगता है कि वे स्वयं से पहले दूसरों को रखते थे?

वे हमेशा गेंद को गोल के पास ले जाकर किसी साथी खिलाड़ी को दे देते थे ताकि गोल का श्रेय साथी को मिले। वे कहते थे कि हार या जीत उनकी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।

आपकी बात — पंक्ति “बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है…” का क्या अर्थ है?

जो व्यक्ति दूसरों के साथ बुराई करता है, उसके मन में हमेशा यह डर बना रहता है कि कहीं उसके साथ भी वैसी ही बुराई न हो जाए। इसलिए बुरे काम से बचना चाहिए।

Imp शब्द व अर्थ (मिलान)

शब्दअर्थ या संदर्भ
लांस नायकभारतीय सेना का एक पद (रैंक)।
बर्लिन ओलंपिकवर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल, जिसमें 49 देशों ने भाग लिया।
पंजाब रेजिमेंटस्वतंत्रता से पहले अंग्रेज़ों की भारतीय सेना का एक दल।
सैंपर्स एंड माइनर्स टीमअंग्रेज़ों के समय का एक हॉकी दल।
सूबेदारस्वतंत्रता से पहले भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद।
छावनीसैनिकों के रहने का क्षेत्र।

व्याकरण — शब्दों के जोड़े

शब्द-युग्म (एक ही शब्द दो बार)

जिन जोड़ों में एक ही शब्द दो बार आता है, उन्हें शब्द-युग्म कहते हैं। बीच में छोटी रेखा (योजक चिह्न) लगती है।

जैसे-जैसे, वैसे-वैसे, धीरे-धीरे, थोड़ी-थोड़ी, बार-बार।

भिन्न-भिन्न शब्दों वाले शब्द-युग्म

धक्का-मुक्की, नोंक-झोंक, हार-जीत, बच्चे-बूढ़े, हाथ-लकड़ी।

योजक की सहायता से

शब्दयोजक रूप
अच्छा या बुराअच्छा-बुरा
छोटा या बड़ाछोटा-बड़ा
अमीर और गरीबअमीर-गरीब
उत्तर और दक्षिणउत्तर-दक्षिण
गुरु और शिष्यगुरु-शिष्य
अमृत या विषअमृत-विष

बात पर बल देना (ही, भी, तो)

‘ही’, ‘भी’, ‘तो’ जैसे शब्द बात पर बल देते हैं। इनके हटने से अर्थ बदल जाता है।

Emphasis words: “मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।” — the word ‘ही’ stresses that the revenge was fully completed. Remove it, and the sentence loses that force.

डाँडी या गोथा — एक स्वदेशी खेल

यह भील-भिलाला बच्चों का खेल है। ‘डाँडी’ और ‘गोथा’ का अर्थ है — खेलने की हाथ-लकड़ी। यह खेल काफी हद तक हॉकी जैसा है।

अंतर: हॉकी में गोल के लिए गोलपोस्ट होते हैं, पर इस खेल में नहीं। इसकी गेंद बाँस की बनी साधारण होती है।

खेल सामग्री

  • बाँस के गुट्टे की गेंद — जिसे ‘दुईत’ कहते हैं।
  • ‘गोथा’ — अंग्रेजी के ‘L’ अक्षर की तरह नीचे से मुड़ी बाँस की डंडियाँ।
  • राख से मैदान का सीमांकन और घेरे के भीतर एक छोटा वृत्त।

कैसे खेलें

  1. दोनों दलों में कम से कम दो-दो खिलाड़ी हों।
  2. टॉस जीतने वाला दल खेल शुरू करेगा।
  3. हमला करने वाला दल गेंद को पीटते हुए बचाव दल के दायरे में दूर तक ले जाता है।
  4. दोनों दलों के एक-एक खिलाड़ी अपनी ‘डी’ में खड़े रहकर गेंद को रेखा पार करने से रोकते हैं।
  5. इसमें दोनों ओर से खेल सकते हैं — यह सुविधा हॉकी में नहीं है।
  6. जो दल गेंद को अधिक बार विरोधी के पाले में ढकेलता है, वही विजयी होता है।

विशेष नियम: गेंद को शरीर के किसी अंग से न छूना, न रोकना; हवा में शॉट न मारना। यह खेल होली से कुछ दिन पहले खेला जाता है और होलिका दहन के दिन दुईत व गोथे आग में डाल दिए जाते हैं।

एक दौड़ ऐसी भी

ओलंपिक की एक सौ मीटर दौड़ में नौ प्रतिभागी थे, सभी को कोई-न-कोई शारीरिक विकलांगता थी। दौड़ के बीच एक छोटा लड़का गिर पड़ा और रो पड़ा।

उसकी पुकार सुनकर बाकी सभी प्रतिभागी दौड़ना छोड़कर लौट आए, उसे उठाया, आँसू पोंछे, और फिर सब ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर साथ मिलकर दौड़ पूरी की। निर्णायकों ने सबको स्वर्ण पदक देकर समस्या हल की।

The message: Real victory is not about coming first alone — it is about friendship, kindness and helping others. That day, everyone won together.

Imp शब्दावली (एक नज़र में)

शब्दअर्थ
संस्मरणयादों पर आधारित लेखन (memoir)।
नौसिखियानया, शुरुआती खिलाड़ी।
खेल भावनाखेल को सही मनोवृत्ति से खेलना (sportsmanship)।
श्रेयकिसी अच्छे काम का सम्मान/credit।
मंत्रमुग्धमोहित, आकर्षित हो जाना।
योजक चिह्नदो शब्दों को जोड़ने वाली छोटी रेखा (-)।
राष्ट्रीय खेल दिवस — भारत मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन (29 अगस्त) को ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ के रूप में मनाता है। सर्वोच्च खेल पुरस्कार ‘खेल रत्न’ भी उन्हीं के नाम पर है।