गोल
— मेजर ध्यानचंद (1905–1979) · हॉकी के जादूगर
Table of Contents
Toggleइस पाठ का नाम पढ़कर आपके मन में कुछ गोल वस्तुओं के नाम या चित्र उभरे होंगे — गोल गेंद, गोल रोटी, गोल चंद्रमा आदि। लेकिन यह पाठ एक विशेष प्रकार के गोल और उसे करने वाले के बारे में है। यह एक प्रसिद्ध खिलाड़ी के संस्मरण का अंश है — मेजर ध्यानचंद।
कहानी / संस्मरण
बदला लेने का अनोखा ढंग
खेल के मैदान में धक्का-मुक्की और नोंक-झोंक की घटनाएँ होती रहती हैं। सन् 1933 की बात है — ध्यानचंद पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेल रहे थे। ‘सैंपर्स एंड माइनर्स टीम’ के एक खिलाड़ी ने गुस्से में आकर हॉकी स्टिक उनके सिर पर दे मारी और उन्हें मैदान से बाहर ले जाया गया।
थोड़ी देर बाद पट्टी बाँधकर वे फिर मैदान में लौटे और उसी खिलाड़ी की पीठ पर हाथ रखकर कहा, “तुम चिंता मत करो, इसका बदला मैं जरूर लूँगा।” यह सुनकर खिलाड़ी घबरा गया। पर ध्यानचंद ने एक के बाद एक छह गोल कर दिए।
ध्यानचंद का जीवन
- जन्म सन् 1905 में प्रयाग के एक साधारण परिवार में हुआ; बाद में परिवार झाँसी आ गया।
- 16 साल की उम्र में ‘फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट’ में साधारण सिपाही बने। शुरू में खेल में कोई दिलचस्पी नहीं थी — वे नौसिखिया खिलाड़ी थे।
- सूबेदार मेजर तिवारी के बार-बार कहने पर अभ्यास शुरू किया और धीरे-धीरे निखार आता गया।
- सन् 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उन्हें कप्तान बनाया गया; तब वे सेना में लांस नायक थे।
- बर्लिन में उनके खेल से लोग इतने प्रभावित हुए कि उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहने लगे। भारत ने स्वर्ण पदक जीता।
प्रश्न-उत्तर (पाठ से)
प्र.1 — ध्यानचंद की बात “…अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता” से उनके बारे में क्या पता चलता है?
○ वे अत्यंत क्रोधी थे।
○ वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे।
○ उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे।
वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।
वे जानते थे कि खेल को सही भावना (खेल-भावना) से खेलना चाहिए। उन्होंने गुस्से का जवाब गुस्से से नहीं, बल्कि अपने कौशल से दिया।
प्र.2 — लोगों ने मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ कहना क्यों शुरू कर दिया?
उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण।
○ उनकी हॉकी स्टिक की अनोखी विशेषताओं के कारण।
○ हॉकी के लिए उनके विशेष लगाव के कारण।
○ उनकी खेल भावना के कारण।
उनके हॉकी खेलने के असाधारण कौशल के कारण — बर्लिन ओलंपिक में उनके खेल ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया था।
सोच-विचार (क) — ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?
उनकी सफलता का कोई गुरु-मंत्र नहीं था। उनके अनुसार लगन, साधना (अभ्यास) और खेल भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र थे।
सोच-विचार (ख) — किन बातों से लगता है कि वे स्वयं से पहले दूसरों को रखते थे?
वे हमेशा गेंद को गोल के पास ले जाकर किसी साथी खिलाड़ी को दे देते थे ताकि गोल का श्रेय साथी को मिले। वे कहते थे कि हार या जीत उनकी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।
आपकी बात — पंक्ति “बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है…” का क्या अर्थ है?
जो व्यक्ति दूसरों के साथ बुराई करता है, उसके मन में हमेशा यह डर बना रहता है कि कहीं उसके साथ भी वैसी ही बुराई न हो जाए। इसलिए बुरे काम से बचना चाहिए।
Imp शब्द व अर्थ (मिलान)
| शब्द | अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| लांस नायक | भारतीय सेना का एक पद (रैंक)। |
| बर्लिन ओलंपिक | वर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल, जिसमें 49 देशों ने भाग लिया। |
| पंजाब रेजिमेंट | स्वतंत्रता से पहले अंग्रेज़ों की भारतीय सेना का एक दल। |
| सैंपर्स एंड माइनर्स टीम | अंग्रेज़ों के समय का एक हॉकी दल। |
| सूबेदार | स्वतंत्रता से पहले भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद। |
| छावनी | सैनिकों के रहने का क्षेत्र। |
व्याकरण — शब्दों के जोड़े
शब्द-युग्म (एक ही शब्द दो बार)
जिन जोड़ों में एक ही शब्द दो बार आता है, उन्हें शब्द-युग्म कहते हैं। बीच में छोटी रेखा (योजक चिह्न) लगती है।
भिन्न-भिन्न शब्दों वाले शब्द-युग्म
योजक की सहायता से
| शब्द | योजक रूप |
|---|---|
| अच्छा या बुरा | अच्छा-बुरा |
| छोटा या बड़ा | छोटा-बड़ा |
| अमीर और गरीब | अमीर-गरीब |
| उत्तर और दक्षिण | उत्तर-दक्षिण |
| गुरु और शिष्य | गुरु-शिष्य |
| अमृत या विष | अमृत-विष |
बात पर बल देना (ही, भी, तो)
‘ही’, ‘भी’, ‘तो’ जैसे शब्द बात पर बल देते हैं। इनके हटने से अर्थ बदल जाता है।
डाँडी या गोथा — एक स्वदेशी खेल
यह भील-भिलाला बच्चों का खेल है। ‘डाँडी’ और ‘गोथा’ का अर्थ है — खेलने की हाथ-लकड़ी। यह खेल काफी हद तक हॉकी जैसा है।
अंतर: हॉकी में गोल के लिए गोलपोस्ट होते हैं, पर इस खेल में नहीं। इसकी गेंद बाँस की बनी साधारण होती है।
खेल सामग्री
- बाँस के गुट्टे की गेंद — जिसे ‘दुईत’ कहते हैं।
- ‘गोथा’ — अंग्रेजी के ‘L’ अक्षर की तरह नीचे से मुड़ी बाँस की डंडियाँ।
- राख से मैदान का सीमांकन और घेरे के भीतर एक छोटा वृत्त।
कैसे खेलें
- दोनों दलों में कम से कम दो-दो खिलाड़ी हों।
- टॉस जीतने वाला दल खेल शुरू करेगा।
- हमला करने वाला दल गेंद को पीटते हुए बचाव दल के दायरे में दूर तक ले जाता है।
- दोनों दलों के एक-एक खिलाड़ी अपनी ‘डी’ में खड़े रहकर गेंद को रेखा पार करने से रोकते हैं।
- इसमें दोनों ओर से खेल सकते हैं — यह सुविधा हॉकी में नहीं है।
- जो दल गेंद को अधिक बार विरोधी के पाले में ढकेलता है, वही विजयी होता है।
विशेष नियम: गेंद को शरीर के किसी अंग से न छूना, न रोकना; हवा में शॉट न मारना। यह खेल होली से कुछ दिन पहले खेला जाता है और होलिका दहन के दिन दुईत व गोथे आग में डाल दिए जाते हैं।
एक दौड़ ऐसी भी
ओलंपिक की एक सौ मीटर दौड़ में नौ प्रतिभागी थे, सभी को कोई-न-कोई शारीरिक विकलांगता थी। दौड़ के बीच एक छोटा लड़का गिर पड़ा और रो पड़ा।
उसकी पुकार सुनकर बाकी सभी प्रतिभागी दौड़ना छोड़कर लौट आए, उसे उठाया, आँसू पोंछे, और फिर सब ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर साथ मिलकर दौड़ पूरी की। निर्णायकों ने सबको स्वर्ण पदक देकर समस्या हल की।
Imp शब्दावली (एक नज़र में)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| संस्मरण | यादों पर आधारित लेखन (memoir)। |
| नौसिखिया | नया, शुरुआती खिलाड़ी। |
| खेल भावना | खेल को सही मनोवृत्ति से खेलना (sportsmanship)। |
| श्रेय | किसी अच्छे काम का सम्मान/credit। |
| मंत्रमुग्ध | मोहित, आकर्षित हो जाना। |
| योजक चिह्न | दो शब्दों को जोड़ने वाली छोटी रेखा (-)। |
