Class 6 Chapter 1 मातृभूमि

भूमिका (Introduction)

मातृभूमि’ प्रसिद्ध कवि सोहनलाल द्विवेदी द्वारा रचित एक देशभक्ति की कविता है। इस कविता में कवि ने भारत की प्राकृतिक सुंदरता, यहाँ की नदियों, पर्वतों, पशु-पक्षियों तथा महापुरुषों का गुणगान किया है। कवि अपनी मातृभूमि को पुण्यभूमि, स्वर्णभूमि, जन्मभूमि और धर्मभूमि कहकर उसके प्रति अपार प्रेम और गर्व प्रकट करते हैं।

In English: In this poem, the poet expresses deep love and pride for India — praising its natural beauty (the Himalayas, rivers, birds) and the great personalities born on this sacred land.

एक नज़र में — मातृभूमि की विशेषताएँ

मातृभूमि (भारत) हिमालय पर्वत (उत्तरी सीमा) पवित्र नदियाँ (गंगा, यमुना) झरने व पहाड़ियाँ (चिड़ियों का घर) आम के बाग (कोयल, मलय पवन) राम व सीता (जन्मभूमि) कृष्ण व बुद्ध (गीता, दया)

कवि परिचय (About the Poet)

सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988) हिंदी के प्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म आज से लगभग सवा सौ साल पहले हुआ था। उस समय अंग्रेज़ों का भारत पर शासन था। उन्होंने अपनी लेखनी से अंग्रेज़ों का विरोध किया। उनकी लेखनी का सबसे प्रिय विषय ‘देशभक्ति’ था। भारत के गौरव का गान करना उन्हें बहुत प्रिय था। उनकी अन्य प्रसिद्ध रचनाएँ हैं — ‘बढ़े चलो, बढ़े चलो’ तथा ‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’।

कविता (The Poem)

ऊँचा खड़ा हिमालय आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है।
Explanation: The tall Himalaya rises so high it seems to kiss the sky, while at its feet the ocean (Sindhu) bows and sways forever.
गंगा यमुन त्रिवेणी नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली, पग पग छहर रही हैं।
Explanation: Rivers like the Ganga, Yamuna and Triveni flow with waves; their unique, shining beauty spreads at every step.
वह पुण्य-भूमि मेरी, वह स्वर्ण-भूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।
Refrain: This is my holy land, my golden land, my birthland, my motherland.
झरने अनेक झरते जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।
अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है, तन-मन सँवारती है।
Explanation: Dense mango groves echo with the cuckoo's call, and the soft Malay breeze refreshes both body and mind.
वह धर्मभूमि मेरी, वह कर्मभूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।
जन्मे जहाँ थे रघुपति, जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता।
Explanation: This is the land where Lord Rama and Sita were born, and where Krishna sang the sacred Gita on his flute.
गौतम ने जन्म लेकर, जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई, जग को दिया दिखाया।
Explanation: Gautam Buddha was born here and increased its glory — he taught the world compassion and showed it light.
वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी। — सोहनलाल द्विवेदी

Imp शब्द-अर्थ (Imp Word Meanings)

शब्दअर्थ
हिमालयभारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला।
सिंधुसमुद्र / हिंद महासागर।
त्रिवेणीतीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम।
मलय पवनदक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु।
रघुपतिश्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र।
गीताप्रसिद्ध प्राचीन ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवद्गीता’।
गौतम बुद्धप्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक।
अमराइयाँआम के घने बाग / उद्यान।
पुण्य-भूमिपवित्र भूमि।
पग पगहर पग / हर कदम पर।

प्रश्न-उत्तर — मेरी समझ से (Q & A)

(1) हिंद महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है?

सिंधु ✔ (विकल्प: चरण, हिमालय, वंशी, सिंधु)

(2) ‘मातृभूमि’ कविता में मुख्य रूप से क्या है?

भारत की प्रशंसा की गई है।
(कविता में भारत की प्राकृतिक सुंदरता, महापुरुषों तथा गौरव — सभी की प्रशंसा एक साथ है, इसलिए सबसे सटीक उत्तर ‘भारत की प्रशंसा’ है।)

सोच-विचार के लिए (Answers)

1. कोयल कहाँ रहती है?

कोयल घनी अमराइयों (आम के बागों) में रहती है।

2. तन-मन कौन सँवारती है?

बहती हुई मलय पवन तन-मन को सँवारती (ताज़ा) है।

3. झरने कहाँ से झरते हैं?

झरने मातृभूमि की पहाड़ियों में से झरते हैं।

4. श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?

श्रीकृष्ण ने अपनी वंशी (बाँसुरी) पर पवित्र गीता का संदेश सुनाया था।

5. गौतम ने किसका यश बढ़ाया?

गौतम बुद्ध ने अपनी मातृभूमि (भारत) का यश बढ़ाया।

‘लहर’ व ‘छहर’ पर आधारित प्रश्न

कहाँ-कहाँ छटा छहर रही है?

नदियों (गंगा, यमुना, त्रिवेणी) की जगमगाती निराली छटा पग-पग पर छहर (फैल) रही है।

किसका पानी लहर रहा है?

गंगा, यमुना और त्रिवेणी नदियों का पानी लहर रहा है।

मिलान — मिलते-जुलते भाव (Matching)

स्तंभ 1 (पंक्ति)स्तंभ 2 (भाव)
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है। वह भूमि मेरी माँ समान है।
चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।यहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है कि पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं।
अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है।यहाँ आम के घने उद्यान हैं जिनमें कोयल आदि पक्षी चहचहा रहे हैं।

अनुमान या कल्पना से (Answers)

कोयल क्यों, किसे और कैसे पुकार रही होगी?

कोयल आम के बागों में मस्त होकर, अपने साथी को मधुर स्वर में ‘कुहू-कुहू’ की आवाज़ से पुकार रही होगी। ऋतु बसंत की सुंदरता में वह प्रसन्न होकर गा रही होगी।

पवन किसका तन-मन सँवारती है? वह यह कैसे करती है?

मलय पवन मनुष्य के तन-मन को सँवारती है। वह अपनी शीतल और सुगंधित हवा से शरीर को ताज़गी और मन को शांति देती है, जिससे थकान दूर हो जाती है।

शब्दों के रूप (Answers)

(क) युग्म शब्दों के अर्थ

शब्दअर्थ
घर-घरहर घर में / प्रत्येक घर।
बाल-बालहर बाल में / बहुत नज़दीक से बचना।
साँस-साँसहर साँस में / प्रत्येक श्वास।
देश-देशहर देश में / प्रत्येक देश।
पर्वत-पर्वतहर पर्वत में / प्रत्येक पर्वत पर।

(ख) ‘भूमि’ से बने नए शब्द

नया शब्दअर्थ
तपोभूमितपस्या करने की भूमि।
देवभूमिदेवताओं की भूमि।
भारतभूमिभारत देश की भूमि।
जन्मभूमिजहाँ जन्म हुआ, वह भूमि।
कर्मभूमिकर्म (काम) करने की भूमि।
रणभूमियुद्ध की भूमि।
यज्ञभूमियज्ञ करने की भूमि।
सिद्धभूमिसिद्धि प्राप्त करने की पवित्र भूमि।

थोड़ा भिन्न, थोड़ा समान (Answers)

दया’ और ‘दिया’ में केवल एक मात्रा का अंतर है, फिर भी अर्थ पूरी तरह बदल जाता है। ऐसे ही एक-मात्रा-अंतर वाले कुछ शब्द:

शब्द जोड़ाअर्थ
घड़ा – घड़ीपानी का बर्तन – समय बताने वाला यंत्र।
सुत – सुतापुत्र – पुत्री।
बाल – बालाकेश/बच्चा – कन्या।
दिन – दीनदिवस – गरीब/असहाय।
कमल – कमलाफूल – लक्ष्मी।

वंशी-से — वाद्य पहचान (Answers)

‘वंशी’ बाँसुरी को कहते हैं, जो मुँह से फूँककर बजाया जाने वाला वाद्य है। शब्द-जाल से मिले फूँककर बजाए जाने वाले वाद्यों के नाम:

चित्र-अक्षरवाद्य का नाम
श…शहनाई
बी…बीन
बाँ…बाँसुरी
सीं…सींगी
ना…नादस्वरम्
भं…भोंपू / भंगी
शं…शंख

आज की पहेली (Answers)

क्रमअक्षरशब्द
1स म ह ग रमहासागर
2ह म य लहिमालय
3ग गगंगा
4भ त रभारत
5ल क यकोयल
6व न पपवन

झरोखे से — वंदे मातरम्

वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत था। भारत में इसका स्थान ‘जन गण मन’ के समान है (राष्ट्रगीत)।

वंदे मातरम्भावार्थ
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!हे माता, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ!
सुजलाम्, सुफलाम्,तुम जल से भरी हुई हो, फलों से परिपूर्ण हो,
मलयज शीतलाम्,तुम्हें मलय से आती शीतल पवन ठंडक देती है,
शस्यश्यामलाम्, मातरम्!तुम अन्न के खेतों से परिपूर्ण वंदनीय माता हो!
शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,जिसकी रात को चंद्रमा का प्रकाश सुशोभित करता है,
फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,जो खिले फूलों के पेड़ों से सुसज्जित है,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,सदैव हँसने वाली, मधुर भाषा बोलने वाली,
सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!सुख देने वाली, वरदान देने वाली माँ — मैं प्रणाम करता हूँ!

साझी समझ — ‘मातृभूमि’ व ‘वंदे मातरम्’ की तुलना

समानताएँभिन्नताएँ
दोनों में मातृभूमि/भारत माँ को माँ के समान माना गया है।‘मातृभूमि’ सरल हिंदी में है; ‘वंदे मातरम्’ संस्कृतनिष्ठ भाषा में है।
दोनों भारत की प्राकृतिक सुंदरता (नदी, पवन, फल) का वर्णन करते हैं।‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगीत है व स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है; ‘मातृभूमि’ महापुरुषों पर अधिक बल देती है।
दोनों में देशभक्ति व माँ के प्रति प्रणाम का भाव है।रचयिता अलग हैं — सोहनलाल द्विवेदी बनाम बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय।

पढ़ने के लिए — पुष्प की अभिलाषा

चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ देना वनमाली! उस पथ में देना तुम फेंक।
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक। — माखनलाल चतुर्वेदी
Meaning: The flower does not wish to adorn a bride, a garland, a king's grave, or a god's head. Its only wish — to be scattered on the path where brave soldiers march to sacrifice their lives for the motherland.

Imp बिंदु (Imp Points to Remember)

  • कवि: सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988), देशभक्ति के प्रसिद्ध कवि।
  • कविता में भारत को पुण्यभूमि, स्वर्णभूमि, धर्मभूमि, कर्मभूमि, जन्मभूमि व मातृभूमि कहा गया है।
  • सिंधु’ शब्द हिंद महासागर के लिए आया है।
  • कविता में राम, सीता, श्रीकृष्ण व गौतम बुद्ध — इन महापुरुषों का उल्लेख है।
  • ‘यमुन’ शब्द कविता की लय के लिए ‘यमुना’ के स्थान पर प्रयोग हुआ है।
  • वंदे मातरम् — राष्ट्रगीत, रचयिता बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय।
  • यह कविता हमें अपनी मातृभूमि से प्रेम और गर्व करना सिखाती है।