संवादहीन Class 9 Notes and Solutions

संवादहीन – शेखर जोशी

संवादहीन

लेखक: शेखर जोशी  |  हिंदी गद्य — कहानी

लेखक परिचय

प्रमुख रचनाएँ: साथ के लोग, दाज्यू, हलवाहा, नौरंगी बीमार है, आदमी का डर, डांगरी वाले, मेरा पहाड़ (कहानी संग्रह); एक पेड़ की याद (शब्दचित्र-संग्रह); स्मृति में रहें वे (संस्मरण); न रोको उन्हें शुभा (कविता संग्रह); मेरा ओतल्या गाँव (आत्मवृत्त)।

सम्मान: महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार, साहित्य भूषण सम्मान, अखिल भारतीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य पुरस्कार।

कहानी का सार (Summary)

⭐ Imp

📘 'Samvaadheen' means 'Without Dialogue' — a story about an old woman's loneliness and her only companion, a parrot.

'संवादहीन' एक ग्रामीण वृद्ध स्त्री के अकेलेपन की संवेदनशील कहानी है। कहानी के दो मुख्य पात्र हैं — ताई और उनका तोता मिट्ठू। यह कहानी समकालीन जीवन की विसंगतियाँ — पलायन, अकेलापन और आदर्श बनाम यथार्थ — को उभारती है।

मुख्य पात्र

📘 Main Characters — understanding each character helps decode the story's deeper meaning.

👵 ताई

  • वृद्ध ग्रामीण स्त्री
  • बहू-बेटे शहर चले गए
  • बड़े घर में अकेली
  • मिट्ठू ही उनकी ममता का केंद्र
  • तेज स्वभाव, भावुक हृदय

🦜 मिट्ठू (तोता)

  • पहाड़ी तोता, गनपत लाया था
  • ताई का एकमात्र संवाद-साथी
  • चतुर — सुनकर दोहरा लेता
  • मौके पर सटीक उत्तर देता
  • अंत में स्वतंत्र हो उड़ जाता है

👨‍🏫 जगन मास्टर

  • स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति
  • पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर बेचैन
  • नियम-सिद्धांतों वाले, आदर्शवादी
  • अपनी गलती से परेशान

👩 मास्टराइन (जगन मास्टर की पत्नी)

  • मिट्ठू को अपने पास रखने को राजी
  • बिना पति की सलाह के निर्णय लिया
  • कहानी में नाम नहीं दिया गया

कहानी का प्रवाह

📘 Story Flow — the diagram below shows how events unfold from beginning to end.

ताई अकेली बड़ा घर, परिवार शहर में गनपत मिट्ठू (तोता) लाया ताई की ममता मिट्ठू पर बरसी ताई–मिट्ठू का प्रेमपूर्ण संवाद नोक-झोंक भी, पर साथ बना रहा ताई कुंभ स्नान को गईं मिट्ठू जगन मास्टर के पास छोड़ा मिट्ठू उड़ गया! जगन मास्टर ने दूसरा तोता लाया ताई लौटीं — एवजी मिट्ठू चुप संवादहीन अंत — मुक्त अंत

कहानी — संवादहीन

गहरी साँस लेकर ताई कहतीं, "भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?" और बंद पिंजड़े में अपने पंखों को फड़फड़ाता, उछल-कूद मचाता मिट्ठू उत्तर देता, "राम-राम कहो, सीताराम कहो।"

ताई दुहरातीं — सीताराम! सीताराम! ताई और मिट्ठू, मिट्ठू और ताई। अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।

⭐ Imp — अकेलापन का कारण

📘 Tai once had a prosperous family, but one by one everyone left for cities — this 'migration from villages' is a real social problem in India.

ताई ने अपने जीवन में अच्छे दिन भी देखे थे — पूत-परिवार, बहू-बेटियाँ, नौकर-चाकर, गाय-ढोर। बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए। धीरे-धीरे सब पराए हाथों में चला गया। सूने घर की भाँय-भाँय जैसे उन्हें काटने को दौड़ती थी।

भला हो गनपत का, जिसने ताई के सूनेपन को सहारा दे दिया था — वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था। ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।

जो ताई अपनी खातिर चूल्हा जलाने में आलस्य कर जाती थीं, वही अब नियमपूर्वक मिट्ठू के लिए दाल-भात बनातीं। मिट्ठू के वक्त-बेवक्त के तकाजों के लिए रोटी बचाकर रखतीं। अब ताई को पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।

कुशाग्र बुद्धि छात्र की तरह मिट्ठू ताई के पढ़ाए पाठ को न केवल हू-ब-हू दुहरा देता बल्कि एक-दो बार सुनकर याद भी रख लेता था और मौके बे-मौके ताई के सवालों का सटीक उत्तर दे देता। बड़े घर का सूनापन धीरे-धीरे मिट्ठू की बातचीत से अब रौनक में बदल गया था।

सुबह की दिनचर्या: सुबह पौ फटने लगती, पेड़ों में चिड़ियाँ चहचहातीं तो मिट्ठू भी ताई को भोर की झपकी से जगाने के लिए अपना पाठ शुरू कर देते —

"हर हर गंगे! हर हर गंगे!! सीताराम बोल! सीताराम बोल!! मिट्ठू राम राम! मिट्ठू राम राम!!"

ताई अचकचाकर उठ बैठतीं। लाड़ से मिट्ठू को निहारकर आशीर्वाद देतीं — "जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ" और मिट्ठू भी बदले में कहते — "खुश रहो! खुश रहो!!"

ताई थकी-माँदी लेटी होतीं और अनायास ही मिट्ठू से सवाल कर बैठतीं, "मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?" और नौजवान मिट्ठू ताई के बुढ़ापे का सहारा बनकर दम-खम के साथ उन्हें दिलासा देते — "कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!"

ऐसा नहीं कि ताई और मिट्ठू का संवाद हमेशा प्रेमपूर्ण ही रहता हो। कभी-कभी मिट्ठू पानी और दाने की कटोरियों को जान-बूझकर उलटा देते, तो खीझकर ताई कोसतीं, "मेरी जान खाने को आ गया है, मर जा!" और मिट्ठू भी उतनी ही खीझ के साथ हमला बोल देते, "मर जा! मर जा! मर जा!" फिर मान-मनौवल का दौर चलता और दुनिया पहले की तरह प्रेम से चलने लगती।

कुंभ-स्नान का प्रसंग

📘 Kumbh Mela — one of the world's largest religious gatherings held in Prayagraj (Allahabad). Millions of Hindus attend for a sacred bath in the Ganges.

गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे। ताई धर्म-संकट में पड़ गईं — प्रयाग में कुंभ-स्नान का लोभ जहाँ उन्हें खींच रहा था, वहीं मिट्ठू की चिंता भी थी। अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी — वह ताई के लौटने तक मिट्ठू को अपने पास रखने के लिए सहमत हो गई।

विदा के दिन ताई की आँसुओं की धार रुके नहीं रुकती थी। बार-बार वह मिट्ठू को पुचकारतीं, जल्दी लौट आने का दिलासा देतीं। मिट्ठू भी उनकी बातों के उत्तर में 'हर हर गंगे', 'राम राम सीताराम' कहकर उन्हें भरोसा देते रहे।

जगन मास्टर का आदर्शवाद

⭐ Imp — स्वतंत्रता बनाम पिंजरा

जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के आदमी थे। पिंजड़े में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होने लगती। उन्होंने एक दिन कमरा बंद करके मिट्ठू के पिंजरे का दरवाजा खोल दिया — ताकि उसे खुली हवा में आने का मौका मिले। मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।

📘 Mitthu had become so used to the cage that he didn't want freedom at first — a deep comment on how captivity can kill the desire for freedom.

जगन मास्टर ने मुट्ठी में थोड़ा अनाज लेकर पिंजरे के दरवाजे से लेकर बाहर तक बिखेर दिया। मिट्ठू धीरे-धीरे दाना चुगते हुए बाहर आ गए। यह क्रम तीन-चार दिन तक चला।

एक दिन मिट्ठू की नजर ऊपर खुले रोशनदान पर पड़ी और वह रोशनदान पर पहुँच गए। जगन मास्टर हाथ में अनाज लेकर 'आ-आ' की गुहार लगा ही रहे थे कि मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!! ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, 'मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!' पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।

एवजी मिट्ठू

ताई के तेज स्वभाव के अतिरिक्त मिट्ठू के प्रति उनके लगाव को सभी जानते थे। बहुत सोच-विचार के बाद गनपत ने सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता लाया जाए, ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके।

जगन मास्टर अपनी फिक्र के मारे खाना-पीना छोड़कर घंटों पिंजरे के सामने बैठकर नए तोते को पाठ रटाने लगे — "मिट्ठू, राम राम सीताराम, हर गंगे..." बोलते-बोलते उनका गला सूख जाता, पर वह तोता टुकुर-टुकुर उन्हें देखता रहता।

⭐ Imp — दुखद अंत (मुक्त अंत)

कुंभ-स्नान से लौटकर ताई सीधे जगन मास्टर के दरवाजे पहुँचीं। ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू 'राम राम सीताराम' की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा, पिंजड़े में कूद-फाँद मचाकर तूफान खड़ा कर देगा। लेकिन वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की, वह केवल इधर-उधर ताकता रहा।

ताई अपने मिट्ठू को गुहार कर थक गईं लेकिन उनके सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा।


कहानी के प्रमुख विषय-बिंदु

📘 Key Themes — the diagram shows the 6 major themes that the story explores.

संवादहीन विषय-बिंदु अकेलापन स्वतंत्रता की चाह पलायन मानव-पशु प्रेम आदर्श बनाम यथार्थ संवाद की जरूरत

कहानी का सौंदर्य — भाषिक विशेषताएँ

📘 Literary Devices — these writing techniques make the story vivid and emotionally powerful.

विशेष बिंदुअर्थउदाहरण (कहानी से)
चित्रात्मकता (दृश्य बिंब)शब्दों से मन में जीवंत चित्र बनानामिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।
संवादात्मकतापात्रों के भाव व्यक्त करने के लिए बातचीत का प्रयोग"राम-राम कहो, सीताराम कहो।"
पुनरुक्तिशब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता"कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!"
अतिश्योक्तिकिसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना"रेलगाड़ी में उसका भी टिकट लगेगा, आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।"
लोकधर्मी भाषाग्रामीण, सहज, बोल-चाल की भाषा"भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?"
प्रश्नोत्तर शैलीपात्र द्वारा प्रश्न पूछना"मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?"
ध्वन्यात्मकताध्वनि का आभास कराने वाले शब्द"मिट्ठू के पंखों की फड़फड़ाहट"

कहानी के अंत के प्रकार

⭐ Imp

📘 This story has an 'Open Ending' — Tai's real Mitthu is gone, the substitute parrot is silent. The reader is left to imagine what Tai felt.

'संवादहीन' कहानी का अंत मुक्त अंत (Open Ending) है — ताई का मिट्ठू लौटा नहीं, एवजी मिट्ठू चुप है। कहानी पाठक को सोचने के लिए छोड़ देती है।

#अंत का प्रकारअर्थ
1सुखांतकहानी का अंत प्रसन्नता, सफलता से होता है
2दुखांतदुख, वियोग, मृत्यु या हानि से होता है
3मुक्त अंत ✔स्पष्ट रूप से खत्म नहीं, सोचने के लिए छोड़ा जाता है
4अप्रत्याशित अंतअचानक और अनपेक्षित रूप से सामने आता है
5यथार्थवादी अंतजीवन की सच्चाई जैसा लगे
6प्रेरणात्मक अंतकोई प्रेरणा या सकारात्मक सोच मिले
7व्यंग्यात्मक अंतव्यंग्य या कटाक्ष से कोई सत्य प्रकट हो

अभ्यास — मेरे उत्तर मेरे तर्क (MCQ)

📘 MCQ Answers with Reasoning — each correct option is marked ✅ with a yellow box explaining WHY it is correct.

✅ = सही उत्तर  |  📝 = कारण

1. कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?

(क) परोपकार और त्याग

✅ (ख) ममता और स्नेह

(ग) करुणा और क्रोध

(घ) जिज्ञासा और सहायता

📝 ताई मिट्ठू को बच्चे की तरह पालती हैं — उसके लिए खाना बनाती, रोटी बचाती हैं — यह ममता और स्नेह का संबंध है।

2. जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस मूल्य का संकेत देता है?

(क) अनुशासन और परंपरा

(ख) उदासीनता और असावधानी

(ग) आत्मगौरव और विद्रोह

✅ (घ) करुणा और नैतिकता

📝 जगन मास्टर को पिंजरे में बंद मिट्ठू की यातना असह्य लगती थी — यह करुणा और नैतिक जिम्मेदारी का भाव है।

3. मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?

(क) भोजन की खोज

(ख) प्रेम की आकांक्षा

✅ (ग) स्वतंत्रता की चाह

(घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति

📝 रोशनदान से बाहर की दुनिया देखते ही मिट्ठू उड़ गया — यह हर प्राणी की जन्मजात स्वतंत्रता की इच्छा का प्रतीक है।

4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?

(क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी

✅ (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव

(ग) आर्थिक विपन्नता

(घ) मिट्ठू के प्रति प्रेम और संवाद

📝 बहू-बेटे शहर चले गए, घर सूना पड़ा — संवाद और अपनेपन का अभाव ही ताई के दुख का असली कारण है।

5. कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?

(क) मजबूरी

(ख) कर्मपरायणता

✅ (ग) अकेलापन

(घ) संवादधर्मिता

📝 आधुनिक पलायन की वजह से वृद्ध लोग गाँव में अकेले रह जाते हैं — यही कहानी की केंद्रीय विसंगति है।

मेरी समझ — मेरे विचार (विस्तृत प्रश्नोत्तर)

1. "भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?" — ताई इस वाक्य में किस 'नैया' की बात कर रही हैं?

उत्तर:

यहाँ 'नैया' का अर्थ है — जीवन की नाव। ताई बुढ़ापे में अकेली हैं, परिवार छोड़ गया है, कोई सहारा नहीं। वे ईश्वर से पूछ रही हैं कि इस कठिन जीवन को कैसे पार करूँगी? यह वाक्य उनकी असहायता, निराशा और विश्वास — तीनों को एक साथ दर्शाता है।

2. "धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।" — इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत है?

उत्तर:

बहू-बेटे शहर चले गए, बेटियाँ ब्याह के बाद अपनी गृहस्थी में चली गईं, नौकर-चाकर भी चले गए। जमीन, खेती, कारोबार — सब पराए हाथों में चला गया। यह वाक्य पलायन और पारिवारिक विघटन की समस्या को दर्शाता है।

3. "ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।" — क्यों?

उत्तर:

ताई के पास अपना प्रेम लुटाने के लिए कोई नहीं था। जब गनपत मिट्ठू लाया, तो ताई की दबी हुई ममता को एक केंद्र मिल गया। अब मिट्ठू ही उनके लिए बेटा, दोस्त, बातचीत का साथी — सब कुछ बन गया।

4. "अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं..." — इससे ताई के व्यक्तित्व में क्या परिवर्तन पता चलता है?

उत्तर:

पहले ताई अपने लिए खाना बनाने में भी आलस्य करती थीं। मिट्ठू आने के बाद वे सक्रिय, चौकस और जागरूक हो गईं। यह दर्शाता है कि किसी के लिए जिम्मेदारी होना जीवन में उत्साह लाता है

5. "जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।" — उनका व्यक्तित्व कैसा था?

उत्तर:

जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति थे। वे दूसरों की स्वतंत्रता पर बाधा नहीं डालना चाहते थे। पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होती थी। उन्होंने मिट्ठू को खुली हवा देने की कोशिश की — यह उनके करुणा, आदर्शवाद और नैतिक चेतना को दर्शाता है। हालाँकि उनकी यही आदर्शवादिता अंत में मुसीबत बन गई।

6. कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' किसके लिए सबसे अधिक सार्थक है?

उत्तर:

शीर्षक सबसे अधिक ताई के लिए सार्थक है। उनका असली मिट्ठू चला गया, एवजी मिट्ठू चुप है — वह जो संवाद चाहती थीं, वह अब संभव नहीं। जीवन भर उन्होंने संवाद के लिए तरसा, परिवार से नहीं मिला, अब तोते से भी नहीं मिला। यह शीर्षक संवाद के अभाव की त्रासदी को व्यक्त करता है।

7. ताई के बड़े से घर को 'सूना खंडहर' क्यों कहा गया?

उत्तर:

खंडहर वह जगह होती है जो कभी आबाद थी, अब वीरान हो गई हो। ताई का घर भी कभी बहू-बेटे, नौकर-चाकर से भरा था। अब वहाँ सिर्फ ताई और मिट्ठू हैं। घर की दीवारें हैं पर जीवन नहीं — इसीलिए 'सूना खंडहर' कहा गया।


मेरे प्रश्न — सही प्रश्न पहचानिए

उत्तर: ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया।

सही प्रश्न:

प्रश्न क: ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
(प्रश्न ख गलत है — वह मिट्ठू देने वाले की पहचान पूछता है, जो अलग तथ्य है।)

उत्तर: ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था।

सही प्रश्न:

प्रश्न ख: ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
(प्रश्न क गलत है — मिट्ठू लौटने के बाद नहीं, पहले उड़ा।)

उत्तर: गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।

सही प्रश्न:

प्रश्न क: गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
(प्रश्न ख गलत है — गाँववाले खुश नहीं थे।)

उत्तर: कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' जीवन के मौन का प्रतीक है।

सही प्रश्न:

प्रश्न ख: शीर्षक 'संवादहीन' का क्या भावार्थ है?
(प्रश्न क गलत है — शीर्षक उचित है।)


व्याकरण की बात

📘 Grammar Section — covers idioms (muhavare), word pairs (shabd-yugm), sound words (dhvanyatmak shabd), and sentence types.

'मिट्ठू' — मुहावरा

'मिट्ठू' शब्द का अर्थ: मधुरभाषी, मीठा बोलने वाला, तोता।

मुहावरा: 'अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना' — अर्थ: अपनी प्रशंसा आप करना।

कहानी में: "अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।"

शब्द-युग्म (Word Pairs)

📘 Shabd-Yugm = Words written in pairs. Types include: repeated (baar-baar), similar meaning (din-pratidin), opposite (din-raat), and related (uthna-baithna).

शब्द-युग्मप्रकारअर्थवाक्य प्रयोग
वक्त-बेवक्तविपरीतार्थकसमय पर / बिना समय केमिट्ठू के वक्त-बेवक्त के तकाजों के लिए रोटी बचाकर रखतीं।
नियम-सिद्धांतसमानार्थकनियम और उसूलजगन मास्टर ने अपने नियम-सिद्धांत बना रखे थे।
शादी-ब्याहसमानार्थकविवाह संस्कारवे शादी-ब्याह के भोज में गईं।
तीज-त्योहारसजातीयपर्व-उत्सवतीज-त्योहार के दिन घर में रौनक होती थी।

ध्वन्यात्मक शब्द (Sound Words)

'फड़फड़ाहट' — पक्षी के उड़ने पर पंखों से उत्पन्न ध्वनि। अन्य उदाहरण: खड़खड़ाहट, गड़गड़ाहट, सनसनाहट, चहचहाहट, बड़बड़ाहट।

अर्थ के आधार पर वाक्य भेद

📘 Types of Sentences based on Meaning — 8 types, each expressing a different purpose: statement, negation, question, exclamation, command, wish, doubt, and condition.

#वाक्य भेदअर्थ/उपयोगउदाहरण (कहानी से)
1विधानवाचककिसी घटना/स्थिति का कथनजगन मास्टर ने पिंजरे का दरवाजा खोल दिया।
2निषेधवाचककिसी काम के न होने का भावमिट्ठू ने कोई हरकत नहीं की।
3प्रश्नवाचककुछ पूछने या जानने के लिएमिट्ठू! अब कैसे कटेगी?
4विस्मयादिबोधकआश्चर्य, प्रसन्नता या दुख व्यक्त करनामिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से देखा और ये गए! वो गए!!
5आज्ञावाचककिसी को कुछ करने का आदेश/आग्रहराम-राम कहो, सीताराम कहो।
6इच्छावाचकआकांक्षा, आशा, इच्छा प्रकट करनाजीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ!
7संदेहवाचकशंका या अनिश्चितता प्रकट करनाताई का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा।
8संकेतवाचकएक काम का होना दूसरे पर निर्भरजब खेती-बाड़ी नहीं, कारबार नहीं, तो नौकर-चाकर किस दम पर टिकते!

खोजबीन — शब्दों की (उत्तर)


शब्द-संपदा (Vocabulary)

📘 Important words from the story — knowing these helps you understand the text deeply and use them in your own writing.

ढोरपालतू गोजातीय पशु, चौपाया
तकाजाआवश्यकता, बार-बार माँगना
कुशाग्रकुश की नोंक जैसा तीक्ष्ण बुद्धि वाला
पौ फटनाभोर का प्रकाश, तड़का होना
अचकचानाभौचक्का होना, चौंक उठना
निहालप्रसन्न, हर तरह से तृप्त
रोबीलाप्रभावशाली व्यक्तित्व वाला
तुनकमिजाजछोटी बात पर नाराज हो जाने वाला
वियोगविच्छेद, विरह, अभाव
साँकलजंजीर, सिकड़ी, श्रृंखला
देहरीदरवाजे की चौखट में नीचे की लकड़ी
प्रायश्चितपाप का मार्जन करने के लिए किया जाने वाला काम
कौतूहलवशउत्सुकता, अचंभे से
मशगूलकिसी काम में लगा हुआ
एवजीबदले में काम करने वाला, स्थानापन्न (Substitute)
आग्नेय दृष्टिआग जैसी क्रोधित नजर
अतलअथाह, तलहीन (bottomless)
जूनवक्त, वेला; दिन का आधा भाग

भाषा संगम — तोता विभिन्न भाषाओं में

📘 Language Harmony — the word for 'parrot' in 18 Indian languages listed in the 8th Schedule of the Constitution.

भाषातोताभाषातोता
हिंदीतोतासंस्कृतशुकः
पंजाबीतोताउर्दूतोता
कश्मीरीतोतॅुसिंधीतोतो
मराठीपोपटगुजरातीपोपट, सूडो
कोंकणीपोपटनेपालीसुगा
बांग्लातोताअसमियाभाटौ
मणिपुरीतेनवाओड़िआशुआ
तेलुगुचिलुकतमिलकिली
मलयालमशुक्म्, तत्तकन्नड़गिळि